परिचय :
खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान : दोस्तों अगर आप बहुत ज्यादा खांसी और कफ़ की समस्या से परेशान हैं। तो आपको घबड़ाने की जरूरत नहीं है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अगर आप एक आयुर्वेदिक उपचार करना चाहते हैं तो यहां पर हम आपको एक आयुर्वेदिक औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं। जिसके प्रयोग से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
इस जड़ी बूटी का नाम मुलेठी है या इसको यष्टिमधु भी बोलते हैं।
वैसे मैं यहां पर आपको एक बात स्पष्ट करना चाहता हूं कि लोगों के मन में एक आम धारणा है कि मुलेठी का प्रयोग केवल सर्दी-खांसी और जुकाम में ही कर सकते हैं।
लेकिन ऐसा नहीं है यह बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि। और इसका कई आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में प्रयोग किया जाता है।
अर्थात आप समझ सकते हैं कि यह केवल सर्दी-खांसी में ही नहीं प्रयोग की जाती है बल्कि इसका प्रयोग बहुत से रोगों के लिए किया जाता है।
यहां पर आपको एक बात और स्पष्ट हो जानी चाहिए कि लोगों के मन में एक आम धारणा होती है की आयुर्वेदिक दवा किसी भी तरीके का नुकसान नहीं पहुंचती हैं लेकिन ऐसा नहीं है।
हर औषधि की अगर कोई अच्छाई होती है तो उसके साथ कुछ दुष्परिणाम भी है।
इसीलिए उनके इस्तेमाल में बहुत ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है या इनका सही तरीके से सही मात्रा में प्रयोग में लाया जाता है तभी हम इसका सही तरीके से बहुत अच्छे परिणाम ले सकते हैं।
यहां पर इस लेख में हम आपको इसके प्रयोग की विधि , इसकी कितनी मात्रा लेनी चाहिए और उसके क्या नुकसान है। इसका पूरी तरीके से विवरण दे रहे है।
इसीलिए आप इसको प्रयोग करने से पहले इस लोक को अच्छी तरीके से पढ़े।[खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]

मुलेठी(यष्टिमधु ) क्या है?
मुलेठी ठंडे वातावरण में उगने वाला एक झाड़ी नुमा पौधा होता है। जिसकी लंबाई 2 फीट से लेकर के 6 फीट तक होती है।
इसके तने और जड़ को प्रयोग में लाया जाता है। जिसे छाल सहित सुखा लिया जाता है। यह हल्के मीठे स्वाद वाला होता है।
अपने औषधि गुणों के कारण ही इसका इस्तेमाल कई आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है।
क्योंकि यह दाँत और मसूड़ों के लिए भी फायदेमंद है इसीलिए इसका प्रयोग हर्बल टूथपेस्ट बनाने में भी किया जाता है।
दूसरी भाषाओं में मुलेठी के नाम :
- मुलेठी का वानस्पतिक नाम : Glycyrrhiza glabra (ग्लिह्राइझा ग्लॅब्रा)
- कुल का नाम : Fabaceae (फैबेसी)
- अंग्रेजी (English) : Liquorice root (लिकोरिस रूट),स्वीटवुड (Sweetwood)
- संस्कृत (Sanskrit) : यष्टीमधु, यष्टीमधुक, मधुयष्टि, जलयष्टि, क्लीतिका, मधुक, स्थल्यष्टी
- हिन्दी (Hindi) : मुलहठी, मलेटी, मुलेठी, मीठी लकड़ी, जेठीमधु
- ऊर्दू (Urdu): मुलेठी (Mulathi)
- कन्नड़ (Kannad) : जेष्टमधु (Jeshthmadhu), यष्टिमहुकम (Yashtimahukam)
- गुजराती (Gujarati) : जेठीमध (Jethimadh)
- मराठी (Marathi) : जेष्टिमधु (Yashtimadhu), जेष्टमध (Jeshthamadh)
- तमिल (Tami)l : अतिमधुरम (Athimadhuram), आदिमधुरम (Adimaduram)
- तेलगु (Telugu) : यष्टिमधुकम (Yashtimadhu Kam), अतिमधुरम (Athimadhuram)
- पंजाबी (Punjabi) : मुलेठी (Mulethi), एलेसस (Alasus)
- बंगाली (Bengali) : यष्टिमधु (Yashtimadhu), जष्ठीमधु (Yashtimadhu)
- मलयालम (Malayalam): मलहठी (Malhathi), अतिमधुरम (Athimadhuram)
[खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
सामान्य अवस्था में मुलेठी की मात्रा :
सामान्य तौर पर : 3-5 ग्राम मुलेठी चूर्ण
किसी रोग में : आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के अनुसार

मुलेठी के फायदे और सेवन का तरीका :
आयुर्वेद के अनुसार मुलेठी कई रोगों में फायदेमंद है। यह वात, पित्त और कफ दोष को दूर करने का काम करती है।
मुलेठी केवल हमें अंदरूनी तौर पर ही सेहतमंद नहीं करती है। बल्कि इसे हम अपने शरीर के बाहर भी इस्तेमाल करते हैं।
बाहरी रूप में इसे हम अपने बालों और त्वचा के लिए इस्तेमाल करते हैं। इसका प्रयोग हम अपने खून को साफ करने के लिए भी करते हैं।
इसके अलावा इसके बहुत से प्रयोग और सेवन की विधि है जिसे हम विस्तृत तरीके से बता रहे हैं। आप इसको ध्यान पूर्वक पढ़िए।
खांसी या सूखी खांसी में:
अगर आपको खांसी हो गई है तो आप मुलेठी का एक टुकड़ा लेकर उसको चूसते रहें। इस खांसी में फायदा मिल जाता है।
अगर आपको सूखी खांसी हो गई है तो एक चम्मच मुलेठी के पाउडर के साथ में शहद मिलाकर उसे दिन में दो-तीन बार चाटिए। इसके अलावा आप मुलेठी का काढ़ा बना लीजिए और फिर उसकी 20 से 25 मिली की मात्रा सुबह और शाम इस्तेमाल करिए। इससे भी आपको सूखी खांसी में आराम मिलता है। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
बाल बढ़ाने में :
मुलेठी के काढ़े से बालों को धोने पर बाल तेजी से बढ़ते हैं। इसके अलावा मुलेठी पाउडर और पिसी हुई तिल को दूध में ममिलाकर सिर पर लेप लगाने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।
माइग्रेन के दर्द :
मुलेठी पाउडर में शहद मिलाकर इसे ड्राप से नाक में डालें। इससे माइग्रेन के दर्द से आराम मिलता है।
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बालों के लिए :
इसके लिए 50 ग्राम मुलेठी पाउडर , 750 मिली आंवला रस और 750 मिली तिल के तेल को मिलाकर पका लें। फिर रोज इस तेल की 1-2 बूँद नाक में डालने से असमय बाल सफ़ेद नहीं होते और बालों का झड़ना भी काफी कम होता है।
आंखों के लिए :
मुलेठी पाउडर और सौंफ का चूर्ण समान मात्रा में लें । इस चूर्ण को सुबह और शाम को खाने से आंखों की जलन कम होती है और रोशनी बढ़ती है।
मुलेठी को पानी के साथ घिसकर रूई में भिगोकर आंखों पर बाँधने से आंखों की लालिमा कम होती है। औरआँख आने पर उसके दर्द, जलन जैसे लक्षणों से आराम करती है।
मुलेठी पाउडर और आंवले के पाउडर को पानी में मिलाकर उससे नहाने से या आंखों को धोने से र आंखों के सफ़ेद धब्बों में लाभ होता है। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
और पढ़ें : आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान
कान के रोग में :
मुलेठी और अंगूर दूध दूध में पकाकर कान में डालने से पित्त के कारण होने वाले कान के रोग में लाभ होता है।
नाक के रोगों में :
3 ग्राम मुलेठी , 3 ग्राम शुण्ठी , 6 छोटी इलायची और 25 ग्राम मिश्री मिलाकर इसका काढ़ा बनाएं। इस काढ़े की 1-2 बूँद नाक में डालने से नाक के रोग में आराम मिलता हैं।
मुंह के छालों में :
मुंह में छाले होने पर मुलेठी के कुछ टुकड़े लें और उसमें शहद मिलाकर चूसें। इससे छाले जल्दी ठीक होते हैं।
गला बैठने के इलाज में :
कभी-कभी तेज आवाज में चिल्ला-चिल्ला कर बात करने से या गले में किसी प्रकार का संक्रमण हो जाने से हमारी आवाज भारी हो जाती है या फिर आवाज नहीं निकाल पाती है।
इस स्थिति में हमें मुलेठी का प्रयोग करना चाहिए। मुलेठी को कुछ टुकड़ों लेकर इसे चूसते रहने से गला बैठने की समस्या में आराम मिलता है
सिरदर्द में :
मुलेठी पाउडर के एक हिस्सा और इसका चौथाई हिस्सा कलिहारी चूर्ण और थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर सूंघने से सिरदर्द से आराम मिलता है। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
हिचकी और साँस के रोगों में :
अगर आप हिचकी से परेशान हो गए हैं तो आप मुलेठी के एक टुकड़े को मुंह में रखकर कुछ देर तक चूसते रहिए। इससे हिचकी आना बंद हो जाएगी।
अगर आपको सांस फूलने की कोई समस्या हो गई है तो आप मुलेठी का काढ़ा बनाकर उसे 10 से 15 मिली की मात्रा में लेकर पिए। इससे आपको आराम मिलेगा।
दिल से जुड़ी बीमारियों में :
5 ग्राम मुलेठी का पाउडर और 5 ग्राम कुटकी का पाउडर आपस में मिल लीजिए। अब इसके अंदर 20 ग्राम मिश्री को भी मिला लीजिए। और एक कप पानी में मिलाकर इसको पीजिए।
ऐसा आपको प्रतिदिन करना है। ऐसा करने से आपको दिल से जुड़ी बीमारी से राहत मिलेगी।
मुलेठी,शहद , गुड और कूट को मिलाकर एक पाउडर बना लें और इस पाउडर को रोगी को खिलाकर उसे उल्टी करवा दें।
इससे पित्त दोष के बढ़ने से हृदय रोग होने की जो गंभीर समस्या हो जाती है उसमें आराम मिल जाता है

पेट के अल्सर में :
अगर आपके पेट में अल्सर हो गया है तो आप इसको ठीक करने के लिए मुलेठी का प्रयोग कर सकते हैं।
इसके लिए आपको एक चम्मच मुलेठी पाउडर लेना होगा और उसे एक कप दूध के साथ दिन में तीन बार सेवन करना होगा।
इससे आपको पेट के अल्सर में आराम मिल जाएगा। लेकिन इसमें इस बात का ध्यान रखना है कि जब तक आप इस दवा का प्रयोग कर रहे हैं
तब तक आपको मिर्च -मसाले ,तीखा और तली हुई चीजों से परहेज करना है। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
पेट दर्द में :
गलत खान-पान की वजह से हमारा खाना ठीक से नहीं पच पाता है जिसके कारण हमें पेट में दर्द होने लगता है और पेट में ऐंठन होता है।
इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आपको एक चम्मच मुलेठी पाउडर लेना होगा और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर उसे दिन में तीन बार प्रयोग करना होगा।
इससे आपको पेट दर्द में आराम मिल जाएगा।
पेट फूलने की स्थिति में आप 2 से 5 ग्राम मुलेठी का पाउडर ले लीजिए और इतनी ही मात्रा में मिश्री को भी ले लीजिए और इस पानी के साथ मिला करके पीजिए।
आपको आराम मिल जाएगा। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
उल्टी में खून आना रोकती है मुलेठी :
अगर किसी को उल्टी करने पर खून आने लगता है तो उसके लिए आपको 1 से 2 ग्राम मुलेठी का पाउडर और इतना ही लाल चंदन का पाउडर लेना होगा
और इसे 50 मिलि दूध के साथ मिलाकर पीना होगा। इससे उल्टी में खून आना बंद हो जाएगा।
खून की कमी में :
जिसके शरीर में खून की कमी है वह एक चम्मच शहद के साथ एक चम्मच मुलेठी पाउडर को मिलाकर के खाए। खून की कमी दूर हो जाएगी।
या फिर 10 से 20 मिली मुलेठी का काढ़ा बना लें और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर के उसको दिन में तीन बार प्रयोग करें। खून की कमी दूर हो जाती है।
पेशाब में जलन :
अगर पेशाब में जलन की शिकायत है तो एक कप दूध में एक चम्मच मुलेठी के पाउडर को मिलाकर के पीजिए। इससे पेशाब के जलन में राहत मिलती है।
स्तनों में दूध बढ़ाने में :
बहुत सी महिलाओं में प्रसव के बाद उनके स्कूलों में दूध नहीं उतर पता है। या फिर कम उतरता है। इस कारण नवजात बच्चे को भरपेट दूध न मिल पाने से उसे एक गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए महिलाओं को मुलेठी का सेवन करना चाहिए। जिससे उनके स्तनों में दूध बढ़ जाता है।
इसके लिए 1 कप दूध में 3 चम्मच शतावर का पाउडर और 2 चम्मच मुलेठी का पाउडर लेकर उबालते हैं।
जब दूध उबाल कर आधा रह जाए तो इसको उतार कर ठंडा होने देते हैं। फिर इस दूध की आधी मात्रा सुबह और आधी मात्रा शाम को पिलाते हैं। इस तरह स्तनों में दूध उतर जाता है।
फिर इसके साथ-साथ 100 मिलि दूध में 2 से 4 ग्राम मुलेठी का पाउडर और 5 से 10 ग्राम मिश्री का पाउडर मिलाकर महिलाओं को सुबह शाम पिलाना चाहिए
जिससे उनके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है।
यहां पर इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि यह सभी प्रयोग चिकित्सक की सलाह से और उसकी देखरेख में ही करें। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
माहवारी में होने वाले अधिक रक्तस्राव होने पर :
अगर किसी महिला को माहवारी के समय बहुत ज्यादा खून आने की शिकायत रहती है तो उसे चिकित्सक की सलाह और उसकी देखरेख में बताएं को गए प्रयोग को करने से आराम मिलने की संभावना है।
इसके लिए महिला को थोड़े से चावल को लेना होगा और उसे पानी में धोना होगा फिर उसे निकले हुए पानी को फेंकना नहीं है।
उस पानी को मुलेठी के साथ प्रयोग करना है। इसके लिए उसे
पानी के साथ 5 से 10 ग्राम मिश्री का पाउडर और 1 से 2 ग्राम मुलेठी के पाउडर को मिलाकर प्रयोग में लाना है
अर्थात उसको पीना है। इससे बहुत ज्यादा आने वाले खून की समस्या से निजात मिल सकता है।
शरीर की कमजोरी दूर करने में :
शारीरिक कमजोरी को दूर करने में भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है।
इसके लिए 1 चम्मच गाय का शुद्ध देसी घी लेते हैं और उसमें 1 चम्मच मुलेठी का पाउडर और ½ चम्मच शहद मिला लेते हैं
और फिर उसको 1 कप दूध के साथ सुबह और शाम को रोजाना 5 से 6 हफ्तों तक प्रयोग करते हैं। [खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
शरीर की बदबू को दूर करने में :
बहुत से लोगों को गर्मी में अधिक पसीना आने से उनके पसीने से बहुत ज्यादा बदबू आती है।
तो इस समस्या को दूर करने के लिए मुलेठी को पानी के साथ पीस करके उसके लेप को शरीर पर लगाने के बाद में कुछ समय बाद नहा लें । ऐसा करने से पसीने की बदबू आना दूर हो जाता है।
सेक्स क्षमता बढ़ाने में :
अगर किसी महिला या पुरुष को कामेच्छा की कमी रहती है तो उसको दूर करने के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है।
इसके लिए 1 चम्मच शुद्ध देसी घी के साथ आधा चम्मच शहद और 2 से 4 ग्राम मुलेठी के पाउडर को मिलाकर पीने सेक्स क्षमता बढ़ाने में सहायता मिल सकती है।
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खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग फायदे और नुकसान FAQ –
मुलेठी बलगम के लिए अच्छा है?
जी हां मुलेठी बलगम के लिए बहुत ही अच्छी दवा है। यह हमारे नाक और फेफड़ों में जमा कफ को पतला और ढीली करके बाहर निकलने में सहायता करती है।
इसलिए यह बोला जाता है कि आप दिन में दो-तीन बार मुलेठी चबायें
खांसी के लिए मुलेठी का उपयोग कैसे करें?
इसके लिए मुलेठी को उबालकर काढ़ा तैयार कर लें। और फिर उसे काढ़े को दिन में 3 से 4 बार पिए। इससे खांसी में तुरंत राहत मिल सकती है।
और गले की जलन और कर्कश आवाज से भी छुटकारा मिल सकता है।
क्या मुलेठी गर्म होती है?
जी हां मुलेठी की तासीर गर्म रहती है। इस वजह से इसको सर्दियों में ही प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।
क्योंकि मुलेठी के अंदर एंटीवायरस और एंटीबैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं ,इसीलिए यह सर्दी ,जुखाम ,बुखार और खांसी जैसी परेशानियों को दूर करने में सहायता करती है।
मुलेठी में कौन सा विटामिन होता है?
मुलेठी के अंदर विटामिन ए और विटामिन ई भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसके अंदर
कैल्शियम ,मैग्नीशियम, आयरन ,पोटेशियम, फास्फोरस ,सेलेनियम, सिलिकॉन और जिंक जैसे सूक्ष्म खनिज तत्व भी पाए जाते हैं।
मुलेठी खाने का सही तरीका क्या है?
अगर यह कहा जाए कि सभी रोगों के लिए मुलेठी का प्रयोग करने का एक ही तरीका सबसे उत्तम है तो ऐसा कहना उचित नहीं होगा।
क्योंकि अलग-अलग रोगों के हिसाब से मुलेठी का सेवन अलग-अलग तरीके से किया जाता है। लेकिन
फिर भी जो सबसे सामान्य तरीका है ,वह है इसके छोटे से टुकड़े को लेकर चबाना जो की सर्दी ,खांसी ,जुकाम जैसे रोगों में कारगर साबित हो जाता है।
थायराइड में मुलेठी का प्रयोग कैसे करें?
थायराइड में मुलेठी की चाय बनाकर पी सकते हैं ,या फिर इसका काढ़ा पी सकते हैं।
चेतावनी :
यह लेख केवल जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य से लिखा गया है। आप इसमें बताई गई सभी विधिओं को चिकित्सा के परामर्श से ही प्रयोग करें।