खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार: दोस्तों आज हम जिस बीमारी के बारे में विस्तार से वर्णन करने जा रहे हैं वह बीमारी है तो बड़ी आम लेकिन बड़ी ही दुःखदाई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आप में से बहुत से ऐसे लोग होंगे जो कभी ना कभी इस बीमारी से पीड़ित हुए होंगे या फिर वर्तमान में इससे पीड़ित होंगे। जी हां हम बात कर रहे हैं बवासीर अर्थात पाइल्स की।
यह एक ऐसी बीमारी है जो गुदामार्ग को प्रभावित तो करते ही करती है साथ में कमर दर्द की बड़ी ही भयंकर परेशानी भी देती है। जिसको लोग समझ नहीं पाते हैं। वह यह नहीं जान पाते हैं कि जो कमर में दर्द हो रहा है वह इस पाइल्स की वजह से हो रहा है।
जबकि आदमी कुछ और समझकर कमर दर्द का अलग इलाज करता है और पाइल्स का अलग। हालांकि अगर पाइल्स का इलाज किया जाए तो कमर दर्द की समस्या अपने आप ही खत्म हो जाती है ऐसा बहुत से कैसे में होता है।
इस बीमारी में गुदा मार्ग में बहुत ही ज्यादा दर्द होता है और उसमें मस्से बन जाते हैं। ये मस्से गुदा मार्ग के अंदर भी बन सकते हैं और गुदा मार्ग के मुख पर भी बन सकते हैं। गुदा मार्ग के अंदर बनने वाले मस्से को हम खूनी बवासीर कहते हैं और गुदा मार्ग के मुख पर बनने वाले मस्से को हम बादी बवासीर कहते हैं।
लेकिन दोनों ही अवस्था बड़ी ही पीड़ा दायक होती है। क्योंकि जो बादी बवासीर मे खून तो नहीं गिरता है लेकिन उसके अंदर दर्द बहुत ज्यादा होता है। जबकि खूनी बवासीर में मस्सों में दर्द तो कम होता है लेकिन शरीर का खून बहुत ज्यादा गिर जाता है।
पूरी दुनिया में 70% लोग ऐसे हैं जो इस रोग से पीड़ित हैं। यह ऐसा रोग है कि अगर इसका सही समय पर इलाज न कराया जाए तो इसका स्वरूप बिगड़कर भगंदर का रूप ले लेता है। जिसे फिस्टुला भी कहते हैं।
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होते हैं और जब उनको पाइल्स के लक्षण दिखाई देते हैं तो वह तुरंत इसका डॉक्टर के द्वारा इलाज शुरू कर देते हैं।

लेकिन अक्सर ऐसा देखा गया है कि इलाज करने के बाद भी उनका रोग ठीक नहीं हो पता है। इसके पीछे बहुत से कारण होते हैं जिसमें सबसे बड़ा जो कारण होता है वह उनके खान-पान से सम्बंधित होता है।
इसीलिए बवासीर के रोग में खानपान का भी बहुत बड़ा महत्व होता है। उसका ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। इसके लिए एक सही डाइट का पालन करना बड़ा जरूरी है जिससे कि बवासीर के रोग से जल्दी छुटकारा मिल सके।
इसके अलावा आयुर्वेद में अर्शकल्प वटी नाम की दवा भी आती है जो अलग-अलग कंपनियों की होती है जिसका प्रयोग बवासीर को समाप्त करने के लिए भी किया जाता है।
तो दोस्तों अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम यहां पर आपको बवासीर से संबंधित खानपान ,उसकी दवा, सावधानी आदि के बारे में विस्तृत विवरण देने जा रहे हैं। आशा करते हैं कि हमारा यह लेख आपके रोग को खत्म करने में कुछ सहायता कर सके। [खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
बवासीर के प्रकार
बवासीर दो तरीके की होती है जो इस प्रकार
खूनी बवासीर
इस टाइप की बवासीर में गुदा मार्ग के अंदर मस्से बन जाते हैं। इसमें दर्द कम अथवा न के बराबर होता है। लेकिन जब शौच क्रिया की जाती है तो उसके साथ खून गिरता है। जिसकी वजह से स्वास्थ्य गिरने लगता है और शरीर कमजोर पड़ने लगता है।
जिसके कारण और भी दूसरी तरीके की बीमारियां शरीर को घेरने लगती है जैसे की आंखों की रोशनी कम होना, बालों का झड़ना, चेहरे का तेज कम हो जाना। यह शरीर में रक्त और पित्त का संतुलन बिगड़ने के कारण होता है।
बादी बवासीर
यह बवासीर शरीर के अंदर वात और कफ का संतुलन बिगड़ने के कारण उत्पन्न होती है। वात और कफ का संतुलन बिगड़ने के कारण पेट की समस्या उत्पन्न हो जाती है अर्थात कब्ज की शिकायत होने लगती है।
जिसकी वजह से पेट साफ नहीं होता है और बादी बवासीर बनने लगता है। इस तरह के बवासीर में मल त्याग के समय खून तो नहीं गिरता है लेकिन दर्द बहुत ज्यादा होता है। जिसकी वजह से व्यक्ति न तो चैन से सो पाता है , न ही चल पाता है और ना ही बैठ पाता है।
इस बवासीर में व्यक्ति बड़ी ही असहनीय पीड़ा का अनुभव करता है और उसकी कमर में भी बहुत ज्यादा दर्द होता है जिसकी वजह से उसे चलने और बैठने में परेशानी होती है। अगर बादी बवासीर का सही से इलाज नहीं किया जाता है तो व्यक्ति कमर की गंभीर समस्या से पीड़ित हो जाता है। [खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
क्या खाएं बवासीर की बीमारी में
- अनाज: गेहूं, जौ, स्टीम राइस (शैला चावल )।
- दाल: मसूर, मूंग, अरहर।
- फल : अमरूद, आँवला, पपीता,
- सब्जियां: सहजन (मोरिंगा ), टिण्डा,, परवल, लहसुन, लौकी, तोरई, करेला, कददू, चौलाई, बथुआ, मूली के पत्ते, मेथी, हरे साग , सूरन, खीरा, गाजर, सेम, बीन्स।
- अन्य: हल्का खाना, काला नमक, मट्ठा, ज्यादा पानी पीएं, जीरा, हल्दी, सौंफ, पुदीना, शहद, गेहूं का ज्वारा, पुनर्नवा, नींबू, हरड़, जायफल ,पंचकोल, हींग।
क्या परहेज करें बवासीर की बीमारी में
- अनाज: नया चावल
- दाल: उड़द , काबुली चना, मटर, सोयाबीन
- फल : कटहल ,आड़ू ,कच्चा आम, केला
- सब्जियां: आलू, शिमला, मिर्च, कटहल, बैंगन, अरबी (घुईया ), भिंडी, सभी मिर्च।
- अन्य: तेल, गुड़, मैदा से बानी चीज ,, छोले ,समोसा, पकोड़ी, पराठा, चाट, पापड़, सूखी सब्जियाँ, मालपुआ, ठण्डा खाना , मसालेदार भोजन, मांसाहार, तेल , घी ,ब्रेड ,बिस्किट , जंक फ़ूड, डिब्बाबंद खाना
बवासीर होने के लक्षण
बवासीर ये लक्षण देखे जा सकते हैं –
- मलत्याग के समय जलन के साथ खून का आना और अत्यधिक पीड़ा होना
- मल त्याग के बाद भी पेट साफ ना हेने का अहसास होना।
- गुदा के आस-पास लटकता हुआ मांस महसूस होता है। इसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
- बार-बार शौच की इच्छा होना, लेकिन मल का बाहर न आना ।
- शौच के समय का म्यूकस निकलना ।
- गुदा के आस-पास खुजली होना व सूजन रहना।
जब यह लक्षण दिखाई थे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर बवासीर का इलाज शुरू कर देना चाहिए। [खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
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बवासीर होने के कारण
जब हमारे शरीर में वात ,कफ और पित्त दूषित होता है तभी यह बीमारी पैदा होती है।
जब शरीर का वात और कफ दूषित होता है तो बादी बवासीर की समस्या उत्पन्न होती है।
जब पित्त और रक्त दूषित हो जाता है तो खूनी बवासीर की समस्या उत्पन्न होती है।
इसके अलावा यह रोग अनुवांशिक कारणों से भी हो सकता है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य और भी कारण है जिसकी वजह से बवासीर की समस्या होती है वह कारण इस प्रकार हैं –
- शारीरिक परिश्रम कम करना।
- गरिष्ठ एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना।
- कब्ज की वजह से मल सूखा रहता है। जिस कारण मलत्याग के समय अत्यधिक जोर लगाकर मलत्याग करने से गुदामार्ग की रक्तवाहनियों पर जोर पड़ता है। जिस कारण ये फूलकर लटक जाती हैं जिसे मस्सा कहते हैं और बवासीर की परेशानी शुरू हो जाती है।
- मलत्याग ठीक से ना होना।
- नशे का सेवन।
- फाइबर युक्त भोजन खाना।
- जिन लोगों को अपनी नौकरी अथवा रोजगार की वजह से कई-कई खड़े रहना पड़ता है,या फिर जिनको भारी वजन उठाना पड़ता है। ऐसे लोगों को बवासीर होने की अधिक संभावना रहती है।
- अवसाद
भगन्दर और बवासीर में अन्तर
जब बवासीर पुरानी होकर बिगड़ जाती है अर्थात वह अपने अगले स्तर में पहुंच जाती है तो वह भगंदर बन जाती है। [खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
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सही जीवन शैली और खान-पान के द्वारा बवासीर का इलाज
बवासीर रोग से पीड़ित हो जाने पर अपना खान-पान और जीवन शैली इस प्रकार रखना चाहिए –
- एक ही जगह पर अधिक देर तक न बैठे।प्रतिदिन व्यायाम करेंं।
- हफ्ते में एक दिन का व्रत रखें ।
- गरिष्ठ भोजन का सेवन बिल्कुल भी न करें ।
- शारीरिक परिश्रम अथवा व्यायाम करें।
- शीतल एवं ताजा पानी पीना चाहिए ।
- तनाव और गुस्सा करने से बचें ।
- जंक-फूड का सेवन ना करें ।
- मलत्याग आराम से करें और जोर न लगाएं ।
बवासीर के इलाज के लिए डाइट प्लान क्या होना चाहिए ?
सबसे पहले खाली पेट 1-2 गिलास गुनगुना पानी पिएं। नाश्ते से पहले आवंला रस में एलोवेरा रस मिलाकर पिएं। इसके साथ ही इन बातों का भी पालन करें –
| समय | आहार |
| नाश्ता (8 :00 AM) | 1 कप हर्बल चाय कम दूध वाली ,कम नमक वाला दलिया / पोहा /उपमा (सूजी) /अंकुरित अनाज / 2 पतली रोटी (मिश्रित अनाज आटा) + 1 कटोरी सब्जी/ मूंग दाल खिचड़ी/ फलों का सलाद (सेब, पपीता, अमरूद) |
| दिन का भोजन (12:00 -01:00 PM) | 1-2 पतली रोटियां (मिश्रित अनाज आटा) + 1/2 कटोरी चावल (मांण्ड रहित) /खिचड़ी/ मट्ठा, 1 कटोरी हरी सब्जियां (उबली हुई) +1 कटोरी दाल मूंग (पतली) + 1 प्लेट सलाद |
शाम का नाश्ता (5:00-6:00 pm) | 1 कप हर्बल चाय कम दूध वाली /सब्जियों का सूप |
रात का भोजन (7: 00 – 8:00 Pm) | 1-2 पतली रोटियां (मिश्रित अनाज आटा) + 1 कटोरी हरी सब्जियां (फाइबर युक्त) +1 कटोरी दाल मूंग (पतली) |
सलाह: यदि मरीज को चाय की आदत है तो इसके स्थान पर 1 कप हर्बल चाय दे सकते हैं।[खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
बवासीर के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे

बवासीर या पाइल्स के दर्द में जामुन का उपयोग है फायदेमंद
जामुन के कोमल पत्तों के 20 ml रस में थोड़ी सी चीनी मिला कर दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम पीने से बवासीर से खून आना बन्द हो जाता है। इसके अलावा
10 gm जामुन के पत्तों को एक गिलास दूध के साथ घोंट लें। सात दिन तक तीनो समय पीने से बवासीर से खून आना बन्द हो जाता है।
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एलोवेरा के उपयोग से बवासीर का उपचार

एलोवेरा में ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जिससे कब्ज की समस्या नहीं रहती है और बवासीर की जलन भी कम हो जाती है।
यह खूनी और बादी दोनों तरह के पाइल्स के इलाज में फायदा देती है। गुदा के बाहर के मस्सों में एलोवेरा जेल लगाने से जलन और खुजली को ख़त्म हो जाती है।
एलोवेरा के 150 से 200 gm गूदे को खाने से कब्ज नहीं रहती है और मलत्याग ने में आसानी होती है।
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बवासीर के दर्द से छुटकारा दिलाये सुगन्धबाला

सुगन्धबाला तथा सोंठ से शोधित पानी में शहद मिलाकर प्रयोग करने से खूनी बवासीर की समस्या से निजात मिलता है।
इसके अतिरिक्त पेट की परेशानियों से भी राहत मिलता है।
बवासीर के परेशानी से आराम दिलाये कुश
बीजबंद तथा कुश के जड़ के काढ़े की 2-4 ग्राम मात्रा को चावल के पानी के साथ प्रयोग करने से बवासीर या पाइल्स तथा लिकोरिया से जल्दी आराम मिलता है। [खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
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बवासीर के लिए फायदेमंद है सेब का सिरका
सेब का सिरका खून की नलियों को सिकोड़ने में मदद करता है। एक गिलास पानी में एक चमच्च सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बार पीने से खूनी बवासीर से आराम मिलता है।
सेब के सिरके में रुई भिगोकर गुदा में रखने से बादी बवासीर के जलन और खुजली से राहत मिलती है।
पाइल्स या अर्श या बवासीर में फायदेमंद है रामदाना
5-10 gm रामदाना का पञ्चाङ्ग चूर्ण लेकर उसमे शहद मिलाकर प्रयोग करने से दोनों तरह के बवासीर की परेशानी से राहत मिलती है।
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बवासीर के उपचार के लिए जैतून(ऑलिव ) के तेल का इस्तेमाल
जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाने से गुदा मार्ग की रक्तवाहिकाओं में आई सूजन कम होती है। जिससे दर्द में आराम मिलता है।
बवासीर में लाभदायक है बादाम का तेल
बादाम के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाने से गुदा मार्ग की रक्तवाहिकाओं में आई सूजन कम होती है। जिससे दर्द में आराम मिलता है।
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नारियल का प्रयोग पहुंचाए बवासीर में लाभ
नारियल की जटाओं की राख को प्रतिदिन सुबह खाली पेट मठ्ठे में मिलाकर पीने से बवासीर में लाभ मिलता है।[खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
अंजीर खाने से बवासीर रोग में लाभ

रात में 3 अंजीर लेकर एक गिलास पानी में रातभर के लिए भिगों दें। फिर सुबह में खाली पेट इसको खाकर कर इसके पानी को भी पिएं।
इससे बवासीर में लाभ मिलता है।
बवासीर के घरेलू उपचार के लिए जीरे का प्रयोग
जीरे को पानी के साथ पीसकर लेप बना कर इसे मस्सों वाली जगह पर लगाने से बादी बवासीर के दर्द से छुटकारा मिलता है ।
जीरे को भूनकर मिश्री के साथ पीसकर इसे दिन में 2 से 3 बार 1-2 ग्राम की मात्रा में मट्ठे के साथ पीने से खूनी बवासीर में राहत मिलती है।
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नींबू के इस्तेमाल से पाइल्स का इलाज
नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर खाने से पाइल्स में फायदा पहुँचता है।
पाइल्स का घरेलू उपचार है पपीते
पपीते का सेवन करने से कब्ज नहीं होता है और इससे पेट भी अच्छी तरीके से साफ हो जाता है जिससे पाइल्स में होने वाले दर्द से आराम मिलता है।[खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
बवासीर का घरेलू उपचार करने के लिए खाएं पका हुआ केला
वैसे तो बवासीर के रोग में पका हुआ खेल खाना माना होता है। लेकिन अगर इसी पके हुए केले की खाने की विधि को बदल दिया जाए तो यही बवासीर की एक दवा का काम कर जाती है।
इसके लिए पके हुए केले को पानी में उबालें और इसको सुबह शाम दो टाइम खाए तो इसे बवासीर में आराम मिलता है।
गर्म पानी के प्रयोग से बवासीर के दर्द में पाएं तुरंत राहत
बवासीर के दर्द और जलन से आराम पाने का सबसे अच्छा इलाज है कि एक बाथटब में गरम पानी लेकर उसमे 15 – 20 मिनट बैठ जाएं।
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पाइल्स के दर्द से राहत दिलाये फूलगोभी
फूल गोभी को घी में भूनकर थोड़ा सेंधानमक मिलाकर खिलाने से बवासीर में लाभ मिलता है।
अर्शकल्प वटी क्या है?

अर्शकल्प वटी एक आयुर्वेदिक दवा है। जिसका प्रयोग बवासीर और फिस्टुला के इलाज में किया जाता है।[खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
अर्शकल्प वटी में मौजूद सामग्रियां
अर्शकल्प वटी में निम्न लिखित चीजें शामिल होती हैं –
पाउडर के रूप में :
- निमोली (azadirachta indica)
- देसी कपूर (cinnamomum camphora)
- खूनखराबा (daemonorops draco)
- रसौत शुद्ध (berberis aristata)
- रीठा (sapindus mukorossi)
- छोटी हरड (terminalia chebula)
- बकायन (melia azedarach)
अर्क के रूप में :
- मकोय (solanum nigrum)
- एलोवेरा या घृतकुमारी (aloe barbadensis)
- नागदोन (artemisia vulgaris)
अर्शकल्प वटी के फायदे
- कब्ज को जड़ से मिटाती है
- बवासीर (पाइल्स) की समस्या से छुटकारा दिलाती है
- मस्सों में होने वाली जलन और खुजली दूर करती है
- फिस्टुला (भगंदर) के इलाज में उपयोगी है
- गैस और अपच की समस्या से राहत दिलाती है
बवासीर रोग में ध्यान देने वाली बातें
- प्रतिदिन योग करें ।
- ताजा एवं हल्का गर्म भोजन करें।
- भोजन धीरे धीरे शांतिपूर्वक एवं खुश मन से करें।
- थोड़ा- थोड़ा दिन में 3-4 बार भोजन अवश्य करें।
- हफ्ते में एक दिन भोजन का त्याग करें।
- एक ही बार में भर पेट खाना खाने से परहेज रखें ।
- भोजन को धीरे–धीरे अच्छी तरह से चबाकर खाएं।
- भोजन लेने के बाद 500 कदम टहलें।
- सूर्यादय से पहले जाग जाएं।
- रात में सही समय अर्थात 10 PM तक सोने की कोशिश करें और कम से कम 8 घंटे की नींद लें।[खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार]
बवासीर रोग का उपचार करने के लिए कौन-कौन से योग और आसन
- योग प्राणायाम एवं ध्यान: भस्त्रिका, कपालभांति, बाह्यप्राणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी, उदगीथ, उज्जायी, प्रनव जप।
- आसन: गोमुखासन, मर्कटासन,पश्चिमोत्तानासन, सर्वांगासन, कन्धरासन।
खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार–FAQ-
क्या बवासीर का इलाज केवल सर्जरी से संभव है?
नहीं ऐसा नहीं है। सही खान-पान ,सही जीवन शैली और सही समय पर उपचार से इसको ठीक किया जा सकता है।
बवासीर के कारण क्या दूसरी बीमारियां होती हैं?
जी हां बवासीर के कारण दूसरी बीमारियां भी हो सकती हैं। अगर बवासीर बहुत दिनों तक हमारे शरीर में रह जाए और इसका सही समय पर इलाज न किया जाए और ना ही अपनी जीवन शैली को सुधारा जाए। अगर बवासीर लंबे समय तक रह जाती है तो आंखों की रोशनी कम होने लगती है ,बाल झड़ने लगते हैं और शरीर में खून की कमी होने लगती है जिसे एनीमिया भी बोलते हैं। इसके अतिरिक्त कोलोरेक्टल कैंसर होने का भी खतरा बन जाता है।
सर्जरी के बाद बवासीर दोबारा हो सकता है?
जी हां सर्जरी के बाद बवासीर दोबारा हो सकती है। अगर इसको दोबारा होने से रोकना है तो इसका एकमात्र उपाय अपना खान-पान और जीवन शैली को सुधारना होता है जिससे कि यह हमें दोबारा से पीड़ित ना कर सके।
चेतावनी
इस लेख में दी गई समस्त जानकारी केवल ज्ञानवर्धन के लिए और आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के लिए है। बीमारी होने पर चिकित्सक के परामर्श के अनुसार उपचार करें।