परिचय
अधकपारी का दर्द : अर्द्धसीसी , अधकपारी या माइग्रेन तीनों एक ही बात है। अधकपारी के सिर दर्द में सामान्यतया एक फड़फड़ाता हुआ सर दर्द होता है या फिर टीस वाला सिर दर्द होता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यह दर्द मध्यम स्वरूप का भी हो सकता है और बहुत तेज स्वरूप का भी हो सकता है जो कि बर्दाश्त से बाहर होता है। यह दर्द सामान्य रूप से सिर के आधे हिस्से में ही होता है।
लेकिन कुछ केस में ये सिर के पूरे हिस्से में भी होता है। जब कोई माइग्रेनके रोग से पीड़ित हो जाता है तो उस व्यक्ति के आंख ,कान और नाक ,ये ज्ञानेंद्रिया बहुत ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं।
जिसकी वजह से अगर माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति तेज प्रकाश में जाता है या तेज ध्वनि सुनता है अर्थात तेज आवाज के गाने सुनता है या शोर करता है या फिर तीक्ष्ण गंध का अनुभव करता है।
तब उसको माइग्रेन का दर्द उठने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अतिरिक्त यदि माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति बहुत अधिक शारीरिक परिश्रम करता है तब भी उसका माइग्रेन का दर्द बढ़ जाता है अर्थात यह सारे लक्षण माइग्रेन के ट्रिगर का काम करते हैं।
अधकपारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन इसके के शुरू होते ही इसे रोकने के लिए, दर्द से राहत देनेऔर इसकी गंभीरता को कम करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है।
मध्यम सिरदर्द या गंभीर सिरदर्द के बार-बार होने का महत्वपूर्ण कारण माइग्रेन है।वैसे तो अधकपारी का रोग किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह युवावस्था या वयस्क लोगों को ज्यादा होता है जिनकी उम्र 50 वर्ष से कम होती है।
लेकिन समय के साथ में इसकी गंभीरता कम होती जाती हैऔर 50 वर्ष की उम्र के बाद इसका दर्द काफी कम हो जाता है या लगभग ठीक ही हो जाता है। ऐसा शोध में पाया गया है।
भारत में लगभग 20% महिलाओं को और 9% पुरुषों को हर साल किसी न किसी कारण से माइग्रेन की समस्या हो जाती है। यह समस्या अक्सर महीने में 10 से 12 बार अपना असर दिखाती है। [अधकपारी का दर्द ]
माइग्रेन का दर्द जब उठना है तो इसका असर 4 घंटे से लेकर चार दिनों तक बना रहता है। या उन लोगों को ज्यादा होता है जो माइग्रेन के इलाज के लिए किसी न किसी तरीके की दर्दनिवारक रासायनिक दवाओं का प्रयोग कर रहे होते हैं।
क्योंकि माइग्रेन के ठोस कारणों का अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है ,लेकिन कुछ शोधों से यह बात साबित होती है कि अधिकतर मामलों में माइग्रेन वंशानुगत होता है।

अधकपारी (माइग्रेन ) का कारण
जिन लोगों का तंत्रिका तंत्र सामान्य लोगों की तुलना में अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है उन लोगों को माइग्रेन होने की शत प्रतिशत संभावना बढ़ जाती है।
क्योंकि इन लोगों के दिमाग की तंत्रिका तंत्र की कोशिकाएं आसानी से उत्तेजित हो जाती हैं जिसके कारण दिमाग की इलेक्ट्रिकल गतिविधियां तेज हो जाती है।
जैसे-जैसे इलेक्ट्रिकल गतिविधि दिमाग में फैलती जाती है वैसे-वैसे आंख की रोशनी ,संवेदना ,मांसपेशियों का समन्वय या बोलने जैसे काम अस्थाई रूप से काम करना बंद कर देते हैं अर्थात यह बाधित हो जाते हैं।
यह सब माइग्रेन का दर्द उठने से पहले के लक्षण होते हैं। जिसे औरा कहते हैं। दिमाग के तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं के उत्तेजित होने पर हमारा दिमाग एक प्रकार के हार्मोन्स को रिलीज करता है अर्थात छोड़ता है।
जिसके कारण दिमाग के खून की नसों में और दिमाग को ढकने वाले ऊतक की परतों में सूजन हो जाती है। इस सूजन के कारण ही हमारे सिर में फड़फड़ाहट भरा दर्द या टीस वाला दर्द, उल्टी या मतली जैसी गतिविधियां प्रारंभ होती है। [अधकपारी का दर्द ]
शोध में यह पाया गया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन होने की समस्या ज्यादा होती है। इसका कारण महिलाओं में पाया जाने वाला एक विशेष प्रकार का हार्मोन्स है जिसको एस्ट्रोजन कहते हैं।
जब एस्ट्रोजन का महिलाओं के अंदर किसी भी कारण से उतार- चढ़ाव होता है तो यह महिलाओं में माइग्रेन के ट्रिगर का काम करता है।
जब एक लड़की अपने यौवन अवस्था की तरफ बढ़ती है तो उसके अंदर एस्ट्रोजन का स्तर भी बढ़ता है जिसके कारण लड़कियों में माइग्रेन की समस्या एक आम बात हो जाती है।
इसके अतिरिक्त कुछ महिलाओं ने मासिक धर्म शुरू होने से पहले या मासिक धर्म के दौरान या फिर मासिक धर्म खत्म होने के बाद माइग्रेन की समस्या होती है क्योंकि इस अवस्था में भी एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव होता है।
अगर कोई महिला गर्भवती है तो गर्भावस्था के अंतिम महीने में भी एस्ट्रोजन के स्तर में बदलाव होता है जिसके कारण माइग्रेन का दर्द उठने की संभावना बनी रहती है।
जैसे-जैसे महिलाओं की उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे उन महिलाओं में मासिक धर्म आना भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। और जब मासिक धर्म आना पूरी तरीके से बंद हो जाता है तो इसका मतलब यह होता है कि उनके अंदर एस्ट्रोजन का बहुत उतार-चढ़ाव होता है।
तब इस स्थिति में भी माइग्रेन होने की समस्या बन जाती है अर्थात हम यह भी बोल सकते हैं कि रजनोवृत्ति के कारण भी माइग्रेन होता है।[अधकपारी का दर्द ]

इसके अतिरिक्त माइग्रेन को शुरू करने के अन्य कारण ये भी है:
- अनिद्रा
- मौसम में बदलाव, रेड वाइन
- कुछ खाद्य पदार्थ
- भोजन समय पर नहीं करना या भूखे रहना
- चमकती रोशनी
- तेज गंध
- तनाव
- खाने वाले ऐसे पदार्थ जिनमें टाइरामिन होता है, जैसे पुरानी दही , सोया उत्पाद, सूखी मछली और कुछ नट्स
- खाने वाले ऐसे पदार्थ ऐसे पदार्थ जिनमें नाइट्रेट होते हैं जैसे प्रसंस्कृत मीट
- खाने वाले ऐसे पदार्थ ऐसे पदार्थ जिनमें MSG (मोनोसोडियम ग्लूटामेट) होता है, फ़ास्ट फ़ूड,और कुछ मसाले
- कैफ़ीन (चॉकलेट)
हर व्यक्ति के शरीर की प्रकृति अलग-अलग होती है।
अर्थात किसी का शरीर कफ प्रकृति का होता है तो किसी का शरीर वात प्रकृति का होता है तो किसी का शरीर पित्त प्रकृति का होता है। [अधकपारी का दर्द ]
इसीलिए कौन सा खाद्य पदार्थ किस व्यक्ति को माइग्रेन की समस्या खड़ी करेगा यह उसकी शरीर की प्रकृति के ऊपर निर्भर करता है।
सिर में चोट, गर्दन में दर्द, या जबड़े के जोड़ की समस्या की वजह से भी माइग्रेन का दर्द शुरू हो सकता है
फ़ेमिलियल हेमीप्लेजिक माइग्रेन :
एक दुर्लभ प्रकार का माइग्रेन है, जो शरीर के एक हिस्से में कमजोरी का कारण बनता है।यह आनुवंशिक बीमारियों से जुड़ा हुआ है।
माइग्रेन में जीन की भूमिका कितनी होती है , इसका अभी अध्ययन किया जा रहा है क्योंकि ये अभी शोध का विषय है । लेकिन इतना तो तय है कि माइग्रेन का दर्द एक सिर दर्द से बढ़कर भी कुछ है।
औरा वाला माइग्रेन :
यह भी एक दुर्लभ प्रकार का माइग्रेन है। इसमें आंखों से सम्बंधित परेशानी होती है अर्थात इसमें विजुअल डिस्टरबेंस हो जाता है।
जिसमें मरीज को रुक-रुक कर चमकीली सी रोशनी दिखाई पड़ती है या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं उसके सामने दिखाई देती हैं या फिर उसकी आंखों के सामने काले-काले धब्बे दिखाई देते हैं, ऐसा उसको महसूस होता है।
उसकी त्वचा में एक चुभन सी महसूस होती है और वह बहुत ज्यादा कमजोरी का अनुभव करता है।
यह वर्टिगो, शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करने और समन्वय करने में कठिनाई , नज़र में बदलाव,अस्पष्ट रूप से बोलने का कारण बन सकता है।[अधकपारी का दर्द ]

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अर्द्धसीसी (माइग्रेन) के लक्षण
माइग्रेन के सबसे अहम लक्षणों में से तो एक लक्षण यह है कि यह सिर के आधे हिस्से में ही होता है और यह दर्द काफी तीव्र प्रकृति का अर्थ टीस वाला भी हो सकता है और स्पंदन वाला अर्थात फड़फड़ाहट वाला भी हो सकता है।
इसका दर्द सामान्य तौर पर गर्दन में पीछे की तरफ से शुरू होता है और जब इसका दर्द होकर समाप्त होता है तो ऐसा लगता है कि हमारा शरीर कितना कमजोर हो गया है और शरीर में तथा हाथ पैरों में कोई भी जान नहीं है।
इसका दर्द खत्म होने के बाद शरीर पूरी तरीके से सुस्त पड़ जाता है। इसका जब दर्द उठाता है तो व्यक्ति को कुछ भी अच्छा नहीं लगता है और वह ऐसा सोचता है
कि वह अंधेरे कमरे में जाकर शांत होकर सो जाए और ऐसा करने से उसको आराम भी मिलता है। क्योंकि माइग्रेन के दर्द में अगर मरीज सो जाता हैं तो अच्छी नींद आने पर इसका दर्द कम हो जाता है।
कई मरीजों में माइग्रेन का दर्द उठने पर उनको मतली की शिकायत होती है और कुछ केस में तो उल्टी भी हो जाती है।
माइग्रेन का दर्द उठने पर दिमाग एकाग्रचित नहीं हो पता है और बहुत ज्यादा मन में व्याग्रता उत्पन्न होती है।
जब माइग्रेन का दौरा किसी मरीज को पड़ता है तो इसका असर 4 घंटे से लेकर 4 दिनों तक बना रह सकता है। [अधकपारी का दर्द ]
माइग्रेन का दर्द उठने से पहले शरीर को कुछ संकेत मिलने लगते हैं। यह संकेत हमारे शरीर को आगाह करते हैं कि माइग्रेन का अटैक शुरू होने वाला है।
इसमें विजुअल डिस्टरबेंस हो जाता है। जिसमें मरीज को रुक-रुक कर चमकीली सी रोशनी दिखाई पड़ती है या टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं उसके सामने दिखाई देती हैं
या फिर उसकी आंखों के सामने काले-काले धब्बे दिखाई देते हैं, ऐसा उसको महसूस होता है।
उसकी त्वचा में एक चुभन सी महसूस होती है और वह बहुत ज्यादा कमजोरी का अनुभव करता है। माइग्रेन का अटैक होने से पहले ऐसा 25 परसेंट लोगों के साथ होता है जिसको हम और कहते हैं।
उम्र बढ़ने के साथ माइग्रेन का अटैक भी धीरे-धीरे कम होने लगता है या लगभग समाप्त हो जाता है। लेकिन कभी-कभी बुजुर्ग लोगों में बिना सिर दर्द के नजर को प्रभावित करने वाला माइग्रेन हो जाता है।
अर्द्धशीशी( माइग्रेन )से राहत पाने के घरेलू उपचार
- दिनचर्या में बदलाव
- योग
- 7 -8 घण्टे की नींद
- तनाव मुक्त रहना
माइग्रेन एक अनुवांशिक बीमारी है। इसलिए इसको जड़ से तो ठीक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसको नियंत्रित जरूर किया जा सकता है।
इसके लिए औषधि के साथ-साथ योग की भी सहायता ली जाती है क्योंकि योग में शरीर को और मन को दोनों को स्थिर किया जाता है और गहरी सांस ली जाती है।
जिसकी वजह से हमारा शरीर आराम की मुद्रा में तनाव युक्त हो जाता है और माइग्रेन की समस्या से निजात मिलना शुरू हो जाता है।
माइग्रेन के दर्द से मुक्ति पाने के लिए आमतौर पर घरेलू उपचार बहुत ही कारगर साबित होते हैं।
तो यहां पर हम कुछ घरेलू उपचार बता रहे हैं जिसको आप विस्तार पूर्वक समझे और उसको प्रयोग करके लाभ पाने की कोशिश करें। [अधकपारी का दर्द ]
बर्फ से सिकाई फायदेमंद है माइग्रेन के लिए
जब माइग्रेन का दर्द होता है तो दिमाग के खून की नसें और दिमाग को ढकने वाले ऊतक में सूजन आ जाता है।
इस सूजन को अगर खत्म करना है तो इसमें बर्फ से सिकाई बहुत ही फायदेमंद होती है। बर्फ से सिकाई करने पर यह सूजन कम होने लगती है। जिससे हमें माइग्रेन के दर्द में आराम पहुंच जाता है।
इसमें हम बर्फ के टुकड़ों को सूती तौलिया में लपेटकर सिर को , माथे को, और गर्दन के पीछे 20 से 25 मिनट तक सिकाई करते हैं।
उसके बाद पिपरमेंट तेल की कुछ बूँद उसके ऊपर टपका कर फिर दोबारा से बर्फ से सिकाई करते हैं। तो ऐसा करने पर हमें माइग्रेन के दर्द से बहुत जल्दी राहत मिल जाती है।

मेंथॉल तेल दिलाए माइग्रेन से राहत
माइग्रेन की समस्या होने पर अगर मेंथॉल तेल से बनी हुई चाय पी जाए तो माइग्रेन के दर्द में बहुत राहत मिलती है।
इसके अलावा यदि पिपरमेंट तेल की कुछ बूंद को एक चम्मच शहद में डालकर आधे गिलास पानी में मिलाकर पिए तो उससे भी माइग्रेन के दर्द में बहुत ज्यादा रहता मिलता है।
इसके अलावा बर्फ के साथ मेंथॉल तेल की कुछ बूँद डालकर सिर की सिकाई करने से भी माइग्रेन के दर्द में फायदा पहुंचता है। [अधकपारी का दर्द ]
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एप्पल विनेगर या सब का सिरका राहत दिलाई माइग्रेन के दर्द से
अगर सब के सिरके को एक गिलास पानी में एक चम्मच मिलाकर और उसके अंदर एक चम्मच शहद डालकर लगातार 1
महीने तक पिया जाए तो माइग्रेन के दर्द से राहत मिलने लगती है। अगर माइग्रेन का दर्द उठने से पहले औरा से मिलने वाले संकेत माइग्रेन की ओर इशारा करें तो
हम एक चम्मच की जगह इसके दो से तीन चम्मच सिरके को एक गिलास पानी और एक चम्मच शहद मिलाकर प्रयोग में लेना चाहिए। ऐसा सिर्फ एक-दो दिन करना है। उसके बाद 1 महीने वाला प्रयोग करें।
तुलसी के तेल के प्रयोग से पाएं माइग्रेन में राहत
तुलसी के तेल की पांच बंदे एक गिलास पानी में डालकर पीने से माइग्रेन के दर्द में रहता मिलता है। इसके अलावा इसके तेल को थोड़ा सा उंगलियों पर लेकर माथे पर लगाना चाहिए
और नाक के पास रखकर सूंघना चाहिए। इससे माइग्रेन के दर्द में राहत मिलने लगती है।
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माइग्रेन से छुटकारा पाना है तो प्रयोग करें मूंगफली का मक्खन
जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या होती है उनको सामान्य मक्खन की जगह पीनट बटर अर्थात मूंगफली के मक्खन का सेवन करना चाहिए।
इसके अलावा खट्टे फल खाने चाहिए, केला खाना चाहिए और अगर एवोकाडो मिले तो उसको भी खाना चाहिए।
इसके साथ-साथ हमें अपने खान-पान में फास्ट फूड अर्थात जंक फूड से भी दूरी बनाकर रखनी चाहिए और स्वस्थ भोजन अपने खाने में प्रयोग करना चाहिए। [अधकपारी का दर्द ]
तिल के तेल की मालिश राहत दिलाई माइग्रेन में
यह तो आप जानते ही होंगे कि हमारे शरीर में किसी भी तरीके के तनाव को दूर करने में मालिश बहुत कारगर साबित होती है।
तिल के तेल की प्रकृति ठंडी होती है तो अगर माइग्रेन में मालिश तिल के तेल से की जाए तो इससे हमारे शरीर को फायदा भी पहुँचता है और माइग्रेन से राहत भी दिलाता है।
इस तेल से हमें अपने सिर की मालिश और पूरे शरीर की मालिश तथा पैर के तलवों की मालिश करनी चाहिए।
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अदरक का प्रयोग फायदेमंद है माइग्रेन में
जब माइग्रेन के कारण मतली आने लगे या फिर उल्टी होने लगे तो ऐसे में अदरक के एक टुकड़े को छीलकर उसको कुचलकर उसको पानी में उबाल लें।
फिर उसके अंदर ठंडा करके एक चम्मच शहद और नींबू की कुछ बूँदे डालकर इसका सेवन करें तो इससे माइग्रेन में होने वाली समस्या से राहत मिल जाती है।
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माइग्रेन से राहत चाहते हैं तो प्रयोग करें धनिया की चाय
वैसे तो धनिया का प्रयोग हम सब मसाले के रूप में अपने सब्जियों में करते ही हैं। क्योंकि यह हमारे पाचन तंत्र को सुधरता है और खाने में स्वादिष्ट भी होती है।
लेकिन अगर माइग्रेन के दर्द से राहत पाना चाहते हैं तो आप धनिया की चाय बनाकर प्रयोग करें। इससे माइग्रेन के दर्द में राहत मिलता है।
इन सभी प्रयोग के अतिरिक्त आप माइग्रेन से राहत पाने के लिए एक्यूपंक्चर पद्धति का भी सहारा ले सकते हैं। [अधकपारी का दर्द ]
इस पद्धति के अंतर्गत हमारे शरीर के कुछ हिस्सों में मौजूद कुछ नसों को उत्तेजित किया जाता है जो माइग्रेन के अटैक को कम करने के साथ-साथ उससे निजात दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
इस पद्धति में माथे पर स्थित कुछ पॉइंट्स को दबाया जाता है। उसके अतिरिक्त खोपड़ी के पीछे स्थित कुछ पॉइंट्स को दबाया जाता है।
जिससे यह नसें उत्तेजित हो जाती हैं और माइग्रेन के दर्द से छुटकारा मिलता है। इस पद्धति से कोई बुरा असर भी नहीं होता है।
माइग्रेन से बचाव के कुछ अतिरिक्त उपाय
अपने आहार और जीवन शैली में बदलाव करके कुछ हद तक माइग्रेन के खतरों को काम किया जा सकता है इसके लिए –
- एकदम ठंडी से एकदम गर्मी में और एकदम गर्मी से एकदम ठंड में ना जाएं। इसके लिए शरीर को थोड़ा टेंपरेचर के साथ एडजस्ट होने दें उसके हिसाब से अंदर-बाहर हों।
- जब तेज गर्मी से आए तो कभी भी एकदम से ठंडा पानी अर्थात फ्रिज का पानी न पिए।
- अगर काम के लिए तेज धूप में बाहर निकालने की जरूरत पड़ती है तो नंगी आंखों के साथ बाहर न निकले। धूप के चश्मे का प्रयोग करें अथवा छाते का प्रयोग करें।
- ज्यादा चिलचिलाती धूप में अथवा उमस भरी गर्मी में सफर करने से बचें। क्योंकि ऐसे में आपके शरीर में पानी की कमी हो सकती है , जबकि माइग्रेन से पीड़ित व्यक्ति के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।
- भरपूर मात्रा में पानी का सेवन करें। यह पानी एक साथ ना पिए ,रुक-रुक कर थोड़ा-थोड़ा पीते रहे ,जिससे शरीर में पानी की कमी न होने पाए।
- गर्मी के मौसम में चाय और कॉफी का प्रयोग करने से बचें। क्योंकि इससे ज्यादा पसीना होगा ,शरीर में गर्मी बढ़ेगी ,और पानी की कमी हो जाएगी। [अधकपारी का दर्द ]
- महिलाएं ऐसा कुछ भी ना खाएं जिससे उनका एस्ट्रोजन प्रभावित हो अर्थात वह मिर्च मसाले से बचें ,ब्लड प्रेशर को हाई होने से बचाए ,और गर्भनिरोधक गोली का सेवन न करें और अगर सेवन करने की नौबत आती भी है तो कम मात्रा में सेवन करें।
- सुबह-सुबह नंगे पांव घास पर टहलें , इससे तनाव कम होता है।
- प्रतिदिन सुबह-सुबह मेडिटेशन करें और योगासन करें। मेडिटेशन 10 मिनट और योगासन 30 मिनट तक करें।
- गर्मियों में खाने में तरल पदार्थ का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें क्योंकि इससे शरीर की तासीर ठंडी रहती है ,जैसे कि नारियल पानी ,छाछ ,नींबू पानी, सब्जियों का सूप या लस्सी या इसी तरीके के और तरल पदार्थ जिससे शरीर ठंडा रहे और पानी की कमी ना हो।
- खाने में फल और सब्जियां खाएं। फलों में केले का और खट्टे फलों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें।
- खाने में समुद्री नमक का सेवन कम से कम करें अगर हो सके तो खाने में सेंधा नमक का प्रयोग शुरू कर दें।
- अपनी पसंद के मधुर संगीत सुनें। यह गाने पॉप टाइप के नहीं होने चाहिए ,स्लो म्यूजिक का सुनने में आनंद ही अलग होता है। इससे दिमाग के नसें रिलैक्स होती हैं और माइग्रेन में आराम मिलता है और अच्छी नींद भी आती है।
- इन सब उपायों को करने से माइग्रेन में आराम तो मिलने लगता है ,लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो तो आप चिकित्सक की सलाह लें और उसकी बताई हुई दवाओं का प्रयोग करें। [अधकपारी का दर्द र]
अधकपारी का दर्द –FAQ –
क्या माइग्रेन के दर्द के बिना भी आंखों की रोशनी प्रभावित होती है ?
हाँ कभी-कभी माइग्रेन, बिना सिरदर्द के बिना आँखों की रोशनी या संतुलन में गड़बड़ी जैसे लक्षण पैदा करता है।
क्या दर्द निवारक दवाओं से माइग्रेन बढ़ता है ?
हाँ दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग करने से माइग्रेन और भी बिगड़ सकता है।
माइग्रेन किस विटामिन की कमी से होता है?
शरीर में विटामिन डी की कमी से माइग्रेन की समस्या उत्पन्न होती है।
माइग्रेन के लिए कौन सी आयुर्वेदिक दवा सबसे अच्छी है?
वैसे तो माइग्रेन के दर्द के लिए बहुत सी आयुर्वेदिक दवाइयां हैं। लेकिन उनमें से कुछ दवाओं में किसी भी कंपनी की कामदुघ रस ,चंद्रकला रस ,शिराशूलादि वज्र रस ,गोदनाति भस्म को लिया जा सकता है।
चेतावनी
यहां पर दी गई समस्त जानकारी शिक्षा के लिए और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए है। रोगों से मुक्ति पाने के लिए पेशेवर चिकित्सक की सहायता लेना जरूरी होता है।