जानिए जौ के 32 फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

जानिए जौ के 32 फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

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परिचय 

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी : दोस्तों अगर आप मोतियाबिन्द ,सर्दी जुकाम ,डिप्थीरिया ,घेंघा रोग, सांस की परेशानी ,खून की कमी ,बहुत ज्यादा प्यास लगना , हाइपर एसिडिटी ,गुल्म रोग ,पेट दर्द ,

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बवासीर ,मधुमेह ,पेशाब के रोग ,बुखार ,कम भूख लगना ,दस्त ,गठिया ,जांघ की जकड़न ,हर्पीस ,कुष्ठ रोग ,अल्सर ,मुँहासे ,अर्थराइटिस ,मोटापा और सूजन  जैसे रोगों से परेशान हैं तो आप लोगो को घबड़ाने की जरुरत नहीं है।

 आप अपनी इन समस्याओं से जौ (Barley) के प्रयोग से मुक्ति पा सकते हैं या कम कर सकते हैं। 

जौ, जिसे संस्कृत में ‘यव’ भी कहा जाता है, एक प्राचीन अनाज है जो अपने असाधारण पोषक तत्वों और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।

इसकी तासीर ठण्डी होती है। यह गेहूं की तरह ही अनाजों की श्रेणी में आता है और इसका उपयोग आहार और चिकित्सा दोनों ही रूपों में किया जाता है।

प्राचीन समय से ही जौ को एक महत्वपूर्ण आहार माना जाता रहा है। ऋषि-मुनि इसको सात्विक आहार के रूप में खाने में प्रयोग करते थे।

क्योंकि उनको इसके पोषक तत्वों के बारे में सब पता था। जौ के दानों को पीसकर आटा बनाया जाता है, जिससे रोटी और दूसरे खाद्य पदार्थ बनाए जाते हैं।

जौ में प्रोटीन, फाइबर, A ,B ,C ,E जैसे विटामिन्स और कैल्शियम ,पोटैशियम ,फास्फोरस ,मैग्नीशियम ,आयरन ,कॉपर ,सल्फर जैसे मिनरल्स और  कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। यह एक पौष्टिकारक आहार है जो शरीर को ऊर्जा और ताकत देता है।

जौ की खेती मुख्य रूप से पशु चारे, बियर और व्हिस्की के उत्पादन और खाने के लिए की जाती है। इसका उपयोग माल्टिंग और ब्रूइंग प्रक्रिया में भी होता है।

जौ के इन गुणों को जानकर हम समझ सकते हैं कि यह क्यों इतना महत्वपूर्ण अनाज माना जाता है और इसका उपयोग आज भी विभिन्न रूपों में किया जाता है।

इसके सेवन से न केवल पोषण मिलता है, बल्कि यह शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है अर्थात शरीर की इम्युनिटी पावर को बढ़ाता है।[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी] 

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

अन्य भाषाओं में जौ के नाम 

वानास्पतिक नाम :  Syn-Hordeum sativum Pers., Hordeum nigrum Willd.

कुल :  Poaceae (पोएसी) 

अंग्रेजी  : माल्टिंग बार्ले  (Malting barley)

संस्कृत  : यव, हयप्रिया, तीक्ष्णशूक,अक्षत, कुंचकिन

हिंदी  : जव, जौ

उर्दू  : जव 

 कन्नड़ : यव , कुंचकीन

गुजरती : जौ , जव

तमिल : बारलियारिसि 

तेलगू : यव, बारलीबियम , यवक 

बंगाली : जो , जब   

पंजाबी : नाई , जवा 

मलयालम : जवेगम्बु , यवम 

मराठी : जव , जवा 

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जौ की न्यूट्रीशनल वैल्यू

जौ की न्यूट्रीशनल वैल्यू इस प्रकार है:

कार्बोहाइड्रेट (%) : 57.9  ± 5.1

डाइटरी फाइबर : 29.5  ± 15.5

प्रोटीन (%) : 27.3  ± 4.3

फैट (%) :  4.57  ± 1.31

विटामिन ए (mg/100 g) : 20.5  ± 4.7

विटामिन बी1 (mg/100 g) : 0.61  ± 0.40

विटामिन बी2 (mg/100 g) : 1.56  ± 0.65

विटामिन बी3 (mg/100 g) : 7.18  ± 7.39

विटामिन बी6 (mg/100 g) : 1.12  ± 0.97

विटामिन बी12 (mg/100 g) : 1.16  ± 0.26

विटामिन सी (mg/100 g) : 251.6  ± 239.1

विटामिन ई (mg/100 g) : 15.0  ± 14.1

सोडियम (mg/100 g) : 328.2  ± 288.4

कैल्शियम (mg/100 g) : 479.4  ± 172.5

फ़ॉस्फोरस (mg/100 g) : 380.4  ± 60.7

क्रोमियम (mg/100 g) : 0.14  ± 0.06

कॉपर (mg/100 g) : 1.66  ± 1.25

सल्फर (mg/100 g) : 305.5  ± 6.4

आयरन (mg/100 g) : 23.3  ± 10.1

मैगनीशियम (mg/100 g) : 183.2  ± 46.0

मैंगनीज़ (mg/100 g) : 3.94  ± 1.56

मॉलिब्डेनम (mg/100 g) : 0.048  ± 0.006

पोटैशियम (mg/100 g) : 3384  ± 649

ज़िंक (mg/100 g) : 3.43  ± 1.36

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

जौ के फायदे 

जौ में आयरन ,मैगनीशियम ,मैंगनीज़ ,मॉलिब्डेनम ,पोटैशियम ,ज़िंक आदि पौष्टिक गुण होने के कारण ये बहुत सी बीमारियों के इलाज में  इस्तेमाल किया जाता है। चलिये अब इसको  विस्तार से जानते हैं –

मोतियाबिंद के लिए फायदेमंद है जौ 

उम्र बढ़ने के साथ मोतियाबिंद की शिकायत लगभग हर किसी को होती है। जौ का प्रयोग इस समस्या के निवारण में सहायता करता है।

20-30 मिली त्रिफला का  काढ़ा लें और उसमे जौ को पकायें। अब उसमे थोड़ा सा गाय का घी मिलाकर खाएं।  मोतियाबिंद में लाभ होगा।

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सर्दी-जुकाम में लाभकारी है जौ 

बदलते मौसम के साथ लगभग हर उम्र के लोगों को जिनकी शारीरिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है उनको  सर्दी-खांसी और जुकाम की शिकायत हो जाती है।

इस परेशानी को दूर करने के लिए जौ के सत्तू में गाय का घी मिलाकर खाने से सर्दी- खाँसी ,जुकाम और  हिचकी में आराम मिलता है। इसके अलावा 15-30 मिली जौ का काढ़ा बनाकर पीने से सर्दी-जुकाम में आराम होता है।

डिप्थिरिया से राहत दिलाता है जौ 

जौ के हरे पत्ते का  5-10 मिली रस लेकर उसमे 500 मिग्रा काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से डिप्थिरिया में लाभ होता है।[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

घेंघा रोग में फायदेमंद होती है जौ 

जौ ,अलसी ,सरसों, नीम के पत्ते, सहजन के बीज तथा मूली बीज को खट्टी छाछ(मट्ठा ) में पीसकर गले के प्रभावित भाग पर लेप करने से घेंघा (गलगण्ड) में आराम मिलता है।

सांस लेने की तकलीफ से दिलाये राहत जौ

 सांस लेने की तकलीफ से राहत दिलाने में जौ बहुत काम आता है। जौ के सत्तू को मधु के साथ सेवन करने से सांस की बीमारियों में अतिशय लाभ होता है।

प्यास बुझाने में मदद करता है जौ

आमतौर पर जब किसी बीमारी या दवा का कुछ विपरीत प्रभाव हो जाता है तो बहुत ज्यादा प्यास लगने की समस्या हो जाती है जो कितना भी पानी पियो लकिन वो शांत ही नहीं होती है ।

इस समस्या से राहत पाने के लिए भुने हुए या फिर कच्चे जौ की पीस कर एक पिने योग्य पेय बना लें। फिर उसमें शहद और चीनी मिलाकर पियें। इससे अत्यधिक लगी हुई प्यास बुझ जाती है।

हाइपरएसिडिटी से दिलाये राहत जौ 

आज कल की जीवनशैली में हाइपरएसिडिटी की समस्या होना एक सामान्य बात हो गयी है। जौ के प्रयोग से इस समस्या को कम या खत्म किया जा सकता है।

इसके लिए छिलका रहित जौ, वासा( अडूसा ) तथा 15-30 मिली आंवले के काढ़े में दालचीनी, इलायची और तेजपत्ता का चूर्ण और शहद मिलाकर पीने से हाइपरएसिडिटी की समस्या में आराम मिलता है।[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी] 

गुल्म (Tumour) रोग के लिए लाभदायक है जौ 

जौ से बनाए खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में  लवण या नमक मिलाकर दूध के साथ सेवन करने से गुल्म रोग में लाभ होता है।

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

पेट दर्द में फायदेमंद होता है जौ 

गरिष्ठ भोजन या बिना समय के भोजन करने से पेट में गैस बन जाती है। जिससे पेट में दर्द होने लगता है। जौ के आटे में जौ क्षार और मट्ठा मिलाकर पेट पर लगाने से दर्द से राहत देता है।

शुगर को नियंत्रित करता है जौ 

मधुमेह में जौ को किसी भी रूप में अपने खाने में सेवन करना चाहिए। जौ के छिलके को उतारकर उसका चूर्ण बना लेते हैं। अब उस चूर्ण में त्रिफला के काढ़े को मिलाकर रातभर भिगोकर रख देते हैं।

फिर सुबह में छानकर उसको छाया में सुखा लेते हैं। उसके बाद उसको भूनकर उसका सत्तू बना लेते हैं। अब उसमे शहद मिलाकर प्रतिदिन उसका सेवन करने से डायबिटीज में लाभ मिलता है।

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पेशाब संबंधी परेशानी को दूर करे जौ 

पेशाब संबंधी बीमारी जैसे- पेशाब करते वक्त दर्द या जलन होना, रुक-रुक कर पेशाब आना, कम पेशाब होना आदि में जौ का प्रयोग करना फायदेमंद होता है। जौ इस तरह की बीमारी में बहुत ही लाभ पहुंचाता है।

इसमें जौ का सत्तू प्रतिदिन पीने से प्रमेह, पेशाब करने में परेशानी , सफेद दाग, कोढ़ आदि रोगों को नहीं होने देता है या फिर उसकी संभावना को कम कर देता है।[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

बुखार में करें प्रयोग जौ 

जौ किसी संक्रमण के कारण हुए बुखार को दूर करता है। इसके लिए जौ से बनाये सत्तू में शहद मिलाकर पीने से पित्त के बढ़ जाने के कारण उल्टी और पेट दर्द, बुखार, जलन तथा अत्यधिक प्यास से राहत मिलती है।

भूख को बढ़ाये जौ 

भुने हुए जौ से बनाए स्टार्च तथा 65 मिग्रा जौ की डण्ठल की भस्म में शहद मिलाकर प्रयोग करने से अजीर्ण और खाने की इच्छा बढ़ाने में मदद मिलती है।

 डायरिया रोके जौ 

अगर डायरिया या  दस्त है कि रूकने का  नाम ही नहीं ले रहा तो जौ का घरेलू उपाय बहुत काम आयेगा। शुष्क यव से बनाए काढ़े का सेवन करने से अतिसार या दस्त में लाभ होता है।

गठिया के दर्द में आराम पहुँचाये जौ 

अगर आप गठिया रोग के दर्द दे परेशान हैं तो इसे आप जौ के प्रयोग से ठीक कर सकते हैं। इसके लिए आप को मुलेठी का चूर्ण, दूध और  घी मिला हुआ जौ का आटा लेकर आपस में मिला लेना है

और इसका लेप बनाकर इस लेप को जोड़ों पर लगाना होता है। इस प्रयोग से गठिया के दर्द में आराम मिल जाता है। 

रंग को निखरे जौ 

आज का दौर ऐसा है कि सभी लड़कियां अपना रंग निखारना चाहती हैं जिससे की उनको शादी में कोई परेशानी  न हो। इसके लिए वो केमिकल वाली क्रीम का उपयोग करती हैं।

लकिन वो सिर्फ एक छलावा होता है। उससे उनको कोई खास परिणाम नहीं मिलता है। लेकिन अगर वही वो जौ का प्रयोग करें तो बिना किसी त्वचा के नुकसान के उनको अच्छे परिणाम मिल सकते है।  इसके लिए –

  100 ग्राम जौ के आटे को बारीक सूती कपडे में रखकर उसकी पोटली बना लें। और उस पोटली को गाय के कच्चे दूध में रात भर डुबो कर रख दे। सुबह में इसको बाहर निकाल ले जो की एक प्रकार के पेस्ट में बदल चूका होगा।

अब इस पेस्ट को फ्रीज में रख लें।अब जब भी सुबह में नहाए तो साबुन की जगह इस पेस्ट को शरीर पर रगड़े। इसका प्रयोग हफ्ते में 2 से 3 बार करें।  धीरे-धीरे रंग साफ होने लगता है और सांवलापन दूर होने लगता है।

100 ग्राम जौ का आटा ले और उसके अंदर एक चम्मच हल्दी और दो चम्मच सरसों का तेल तथा आवश्यकता अनुसार उसमें पानी मिलाकर एक पेस्ट बना लें। अब नहाने से पहले उसको पूरे शरीर पर लगाकर रगड़े और फिर गर्म पानी से नहा लें।

इससे भी रंग धीरे-धीरे साफ होने लगता है और शरीर का सांवलापन दूर होने लगता है।यह प्रयोग हफ्ते में दो से तीन बार करें। [जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]    

आग से जल जाने पर प्रयोग करें जौ 

जौ के आटे में तिल का तेल मिलाकर जले हुए भाग पर लगाने से जलने के कारण होने वाली जलन से आराम मिलता है।  

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी

किडनी की पथरी दूर करे जौ 

अगर किडनी की पथरी की समस्या से ग्रसित हो तो इसके लिए जौ के सत्तू का प्रयोग करें या  जौ की रोटी खाएं औरअगर हो सके तो जौ को उबालकर उसके पानी को पीने में इस्तेमाल करें

इससे किडनी की पथरी बाहर निकल जाती है और नई पथरी भी नहीं बनती है।  

गर्भ धारण में सहायता करे जौ 

जो महिलाएं बार-बार होने वाले गर्भपात से परेशान है तो उनको जो का प्रयोग इस प्रकार से करना चाहिए  –

  • – 12 ग्राम जौ का आटा या फिर सत्तू , 12 ग्राम तिल और 12 ग्राम शक्कर या खांड ले।  इन सबको आपस में मिलाकरपीस ले। अब इस चूर्ण को शहद के साथ चाटने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुक जाता है। 
  • –  बराबर मात्रा में जौ का आटा या सत्तू और शर्करा आपस में मिलाकर खाने से बार-बार होने वाला गर्भपात रुक जाता है।  

बाँझपन की पहचान करें जौ की सहायता से 

इस विधि को आप प्राकृतिक सोनोग्राफी भी कह सकते हैं। इसमें जौ की सहायता से पहचान सकते हैं कि कोई स्त्री बाँझ है अथवा नहीं।  इसके लिए जौ के कुछ दानो को मिट्टी में दबाकर एक गमले में रख देते हैं।

फिर जिस स्त्री का बांझपन चेक करना होता है , उस स्त्री के पेशाब को लेकर थोड़ी मात्रा में इन जौ के ऊपर गिरा देते हैं।  अगर जौ लगभग एक हफ्ते में उगना शुरू हो जाए तो समझ लेना चाहिए कि वह स्त्री बाँझ नहीं है।

इसके अतिरिक्त आधुनिक चिकित्सा पद्धति का भी प्रयोग करें। [जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी] 

लू से बचाये जौ 

अगर किसी को लू लग जाए तो इसके लिए जौ के आटे का लेप बनाकर शरीर पर मलने से लू का असर खत्म हो जाता है।  

शरीर की शक्ति को बढ़ाये जौ 

अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा कमजोर हो तो उसको जौ का प्रयोग इस प्रकार से करना चाहिए –

यहां पर जिस विधि का वर्णन करने जा रहे हैं इस विधि को सप्ताह में केवल दो या तीन बार ही करना है।  इसके लिए बिना छिलके वाला जौ लेना है। ये लगभग 100 ग्राम लेना हैं। 

फिर आधा लीटर गाय का दूध लेकर इसकी खीर बना ले और इस खीर का सेवन करें।  अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से बहुत कमजोर है या पतला है तो उसका वजन भी बढ़ जाता है और अंदरूनी ताकत भी उसके शरीर में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। 

अगर किसी व्यक्ति के शरीर में खून की कमी हो गई है तो उसको जौ को उबालकर उसका एक-एक गिलास पानी सुबह-शाम पीना चाहिए।  इससे शरीर में खून की मात्रा बढ़ जाती है और शरीर को बल प्रदान होता है। 

पीलिया को दूर करे जौ 

अगर किसी को पीलिया हो गया है तो उसको जौ का सत्तू खाना चाहिए। जौ का सत्तू खाकर ऊपर से एक गिलास गन्ने का रस पी लेना चाहिए।

ऐसा चार-पांच दिन करने में ही पीलिया खत्म हो जाती है अथवा काम हो जाती है। [जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

साँस की परेशानी को दूर करे जौ 

अगर कोई व्यक्ति सांस की तकलीफ या दमा के रोग से परेशान है तो उसे 10 ग्राम जौ की राख लेकर उसके अंदर 10 ग्राम धागे वाली मिश्री को पीस ले ना चाहिए। 

फिर इस चूर्ण को गर्म पानी के साथ सुबह-शाम फंकी के रूप में लेना चाहिए। इससे सांस की सभी प्रकार की समस्या धीरे-धीरे कम होने लगती है अथवा लगभग समाप्त हो जाती है।  

जांघ की जकड़न को जौ के प्रयोग से करें ठीक  

जौ की रोटी या फिर उसके सत्तू को नियमित रूप से अपने आहार में शामिल करने से जांघ में लचीलापन आने लगता है और धीरे-धीरे जकड़न कम होने लगती है। 

हर्पीज (दाद या छाजन) में फायदेमंद है जौ 

जौ तथा मुलेठी को समान मात्रा में लेकर आपस में कूट-पीसकर एक पेस्ट बना लें। उस पेस्ट में घी मिलाकर दाद पर लेप करने से लाभ मिलता है।

कुष्ठ को दूर करे जौ 

कुष्ठ रोग में जौ से बनाए गए भोज्य पदार्थ का प्रयोग करना चाहिए।

अल्सर को दूर भगाएं जौ के प्रयोग से  

समान मात्रा में जौ, मुलेठी तथा तिल के चूर्ण में घी मिलाकर गुनगुना करके घाव पर लेप करने से व्रण में लाभ होता है।

चेहरे से मुँहासों को कम करे जौ 

छिलके रहित जौ के साथ माजूफल के छिलके को अच्छी तरह से घोंट कर मुंह पर लेप करने से मुँहासों को दूर किया जा सकता है ।[जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

अर्थराइटिस को दूर भगायें जौ से 

आजकल टेक्नॉलजी कारण  बैठकर ज्यादा काम करना पड़ता है। जिसके कारण लगभग हर उम्र के लोग इस बीमारी का शिकार होने लगे हैं।

इससे राहत पाने के लिए जौ के सत्तू को पानी में घोलकर सेवन करने से अत्यधिक प्यास, हाथ-पैरों की जलन , रक्तपित्त और अर्थराइटिस में लाभ होता है।

मोटापा कम करे जौ 

जौ के पानी अथवा सत्तू  में आँवला और शहद मिलाकर इसका नियमित सेवन करने से मोटापा कम होता है।

शरीर की सूजन को कम करे जौ 

अगर शरीर के किसी अंग में सूजन हो गयी है तो जौ के घरेलू इलाज से इसको ठीक किया जा सकता है। इसके लिए जौ को पीसकर सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन कम हो जाती है।

जौ का उपयोगी भाग 

आयुर्वेद में जौ के दानों  का प्रयोग दवा और आहार के रुप में सबसे ज्यादा किया जाता है।

जौ का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? 

चिकित्सक के परामर्श के अनुसार-

-जौ का  20-40 मिली रस

-30-40 मिली जूस के रूप में 

– 60-250 मिग्रा क्षारके रूप में 

-2-5 ग्राम चूर्ण 

जौ के नुकसान 

जौ  का उचित मात्रा से अधिक प्रयोग करने से मूत्राशय को नुकसान पहुंचता है।  इसके अतिरिक्त जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है उनके लिए भी जौ  नुकसानदेह होता है।

क्योंकि इसके अंदर भी ग्लूटेन पाया जाता है।  इसीलिए इसका प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। [जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी]

जानिए जौ के फायदे ,नुकसान ,तासीर और करें बीमारियों की छुट्टी – FAQ 

क्या हम रोजाना जौ का आटा खा सकते हैं?

बिल्कुल, जौ का आटा प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होता है। जौ का आटा एक पौष्टिक विकल्प है और इसे रोजाना खाने में शामिल करना सेहत के लिए लाभदायक हो सकता है।

जौ खाने का सबसे अच्छा समय क्या है?

जौ का सेवन सुबह खाली पेट या नाश्ते में करना उत्तम होता है। इससे दिनभर ऊर्जा मिलती है और पाचन क्रिया भी सुधरती है। वजन नियंत्रण के लिए दिन के पहले भाग में जौ का सेवन करना बेहतर होता है।

क्या जौ से यूरिक एसिड बढ़ता है?

जौ में प्यूरीन की मात्रा कम होती है, इसलिए इसके सेवन से यूरिक एसिड का स्तर सामान्यतः नहीं बढ़ता। हालांकि, यूरिक एसिड के स्तर पर नियंत्रण रखने के लिए जौ का संतुलित मात्रा में सेवन करना उचित होता है।    

जौ के आटे की तासीर क्या होती है?

जौ के आटे की तासीर ठंडी होती है, जो पाचन क्रिया को सुधारने और गर्मी के प्रभाव से राहत दिलाने में सहायक है। 

जौ किसे नहीं खाना चाहिए?

जौ का सेवन उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिन्हें ग्लूटेन से एलर्जी है या जिन्हें सेलियक रोग है। इसके अलावा, जौ में फाइबर की अधिकता होती है, इसलिए पेट की समस्याओं वाले व्यक्तियों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। 

चेतावनी

इस लेख में दी गई समस्त जानकारी केवल ज्ञानवर्धन और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार से प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है। 

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