आरोग्यवर्धिनी वटी के 15 महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि 

आरोग्यवर्धिनी वटी के 15 महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि 

Table of Contents

परिचय 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि : आरोग्यवर्धिनी वटी  जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट होता है, “आरोग्य” यानी अच्छा स्वास्थ्य और “वर्धिनी” यानी सुधार या बढ़ाने वाली , एक मत्वपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि है जो पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है।

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इसे “सर्वरोग प्रशमनी” भी कहा जाता है, जो इसे विभिन्न बीमारियों के लिए उपयोगी बनाता है। यह दवा अपने विशेष गुणों के कारण शरीर के तीनों दोषों – वात, पित्त और कफ – को संतुलित करने में मदद करती है और इस प्रकार शरीर की अनेक समस्याओं के समाधान में उपयोगी सिद्ध होती है। 

आरोग्यवर्धिनी वटी विशेष रूप से अपने पाचन गुणों के कारण पाचन(हाजमा) से सम्बंधित  परेशानियों को दूर करने में प्रभावी है। साथ ही इसकी विषहरण प्रकृति शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है। यह मेटाबॉलिज़्म को सुधारकर शरीर के वजन को संतुलित करने और पाचन से जुड़ी अन्य समस्याओं को नियंत्रित करने में भी सहायक है। 

इसके अतिरिक्त आरोग्यवर्धिनी वटी का उपयोग त्वचा से सम्बंधित बीमारीयों के लिए भी व्यापक रूप से किया जाता है।  जो इसके पित्त संतुलन गुण की वजह से संभव है। हालाँकि यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इस औषधि पर किए गए वैज्ञानिक शोध बहुत ज्यादा नहीं हैं, इसलिए इसका उपयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। 

इसके अंदर  चित्रक, गुग्गुल, हरीतकी (हरड़), अरण्डी, शिलाजीत, अभ्रक भस्म, पारा, लौह भस्म, शुद्ध गंधक और ताम्र भस्म होता है । इन तत्वों की प्रकृति और उनके गुण इसे विभिन्न रोगों के इलाज में उपयोगी बनाते हैं।  

यहाँ पर सावधानी रखने वाली बात यह है कि इस आयुर्वेदिक औषधियों में पारा और गंधक जैसी भारी धातुएँ हैं, जिसका निर्धारित मात्रा से ज्यादा उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है ।

विशेष रूप से गर्भवती महिलाएँ, स्तनपान कराने वाली माताएँ, बच्चे और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति इस औषधि का उपयोग चिकित्सक के परामर्श के बिना न करें । जिन्हें आरोग्यवर्धिनी वटी दी जाती है उन्हें किसी भी स्थिति में ओवरडोज़ से बचना चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं। 

आरोग्यवर्धिनी वटी की उचित खुराक व्यक्ति की आयु, लिंग और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। इस औषधि का उपयोग करते समय किसी भी प्रकार की समस्या से बचने के लिए आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

आयुर्वेद का यह अनमोल खजाना सही तरीके से उपयोग करने पर न केवल स्वास्थ्य को सुधार सकता है बल्कि कई रोगों से बचाव में भी सहायक हो सकता है।

आरोग्यवर्धिनी वटी के मुख्य घटक 

पारा (mercury), हरीतकी , विभीतकी , आँवला , तांब्र भस्म , लौह भस्म , अभ्रक भस्म , गंधक , शिलाजीत , कुटकी , चित्रक , गुग्गुल , नीम पत्ते का रस 

आरोग्यवर्धिनी वटी के अन्य नाम 

आरोग्यवर्धिनी गुटिका 

सर्वोघर वटी 

आरोग्यवर्धिनी रस 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण फायदे 

आरोग्यवर्धिनी वटी एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है, जिसका उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता है। यह आयुर्वेदिक वटी विभिन्न जड़ी-बूटियों और खनिजों के मिश्रण से बनाई जाती है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने और कई बीमारियों को दूर करने में सहायक होती है। आइए, इसके विभिन्न फायदों को विस्तार से समझते हैं।

मोटापा कम करने में 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि

आरोग्यवर्धिनी वटी मेटाबॉलिज्म को तेज करती है, जिससे शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद मिलती है। यह पाचन तंत्र को सुधारकर वसा के उचित पाचन में मदद करती है। इसके नियमित सेवन से शरीर का वजन धीरे-धीरे संतुलित होता है।

कील-मुँहासे दूर करने में 

कफ-पित्तज त्वचा वाले व्यक्तियों में आमतौर पर मुंहासों की समस्या अधिक देखने को मिलती है। आयुर्वेद के अनुसार जब कफ दोष बढ़ जाता है तो त्वचा में सीबम (तेल) अत्यधिक उत्पादन होने लगता है।  जिससे रोम छिद्र बंद हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप, सफेद और काले धब्बे (व्हाइटहेड्स और ब्लैकहेड्स) बनने लगते हैं। वहीं  जब पित्त दोष असंतुलित होता है  तो त्वचा पर लाल दाने और सूजन नजर आती है  जो कभी-कभी मवाद से भी भरे होते हैं।

ऐसी स्थितियों में यह औषधि खून को साफ करने में सक्षम है  जिससे त्वचा की समस्याएं जैसे कील-मुँहासे दूर होते हैं। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण त्वचा को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।[आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि ]

पाचन तंत्र  ठीक करे 

आरोग्यवर्धिनी वटी पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करती है  जिससे गैस, अपच और कब्ज जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह भूख बढ़ाने और भोजन के बेहतर पाचन में सहायक है।

त्वचा रोग दूर करे

यह औषधि त्वचा से संबंधित रोगों जैसे खुजली, सोरायसिस  और एक्जिमा में फायदेमंद है। यह त्वचा को भीतर से पोषण प्रदान करती है और उसमें निखार लाती है।

पोषण ग्रन्थियों को स्वस्थ्य करे 

आरोग्यवर्धिनी वटी शरीर की पोषण ग्रंथियों को सक्रिय करती है  जिससे हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यह शरीर के अंगों को सही पोषण देने में सहायक है।

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मूत्र सम्बन्धित रोगों को ठीक करे 

पेशाब में संक्रमण और अन्य पेशाब संबंधी समस्याओं को ठीक करने में यह वटी अत्यंत उपयोगी है। यह मूत्राशय को साफ करती है और संक्रमण के खतरे को कम करती है।

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मन्दाग्नि को ठीक करे 

मन्दाग्नि यानी धीमी पाचन अग्नि के कारण पाचन संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। आरोग्यवर्धिनी वटी पाचन अग्नि को तेज करने और पाचन क्रिया को मजबूत बनाने में सहायक है।

आँत के रोगों को ठीक करे 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि

यह वटी आँतों की सूजन, संक्रमण और अल्सर जैसे रोगों में फायदेमंद है। यह आँतों की सफाई करके उन्हें स्वस्थ रखती है।

  • जब शरीर में सूजन और जलोदर जैसे रोग हों तो इसका सेवन केवल गाय के दूध के साथ करना चाहिए।[आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि]

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खून को साफ करे 

आरोग्यवर्धिनी वटी खून को साफ करने में विशेष रूप से प्रभावी है। यह शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालती है, जिससे त्वचा और अन्य अंग स्वस्थ रहते हैं।

जब शरीर पर खुजली और एक्जिमा के कारण लाल चकत्ते पड़ जाते हैं तो ऐसे में आरोग्यवद्धिनी वटी को महामंजिष्ठादि अर्क के साथ सेवन करने से लाभ होता है। 

इसके अतिरिक्त इसे नीम की छाल के काढ़े के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं। इससे भी  लाभ मिलता  है।

तिल्ली और लिवर रोगों में फायदेमंद 

यह औषधि तिल्ली और लिवर की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। यह यकृत को साफ करती है और इसे सामान्य रूप से कार्य करने में मदद करती है।

लिवर बढ़ जाने के कारण जब  दर्द हो तो आरोग्यवर्धिनी वटी को पुनर्नवाष्टक काढ़े में रोहिड़ा (टेकोमेला उण्डुलता) की छाल का  एक भाग और शरपुंखामूल का एक भाग मिलाकर पीने से दर्द में लाभ होता है।

एनीमिया को दूर करे 

आरोग्यवर्धिनी वटी में लौह भस्म होने के कारण यह रक्त में आयरन के स्तर को बढ़ाकर एनीमिया को दूर करने में सहायक है। यह शरीर को ऊर्जा और ताकत प्रदान करती है।

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कुष्ठ रोग में फायदेमंद 

कुष्ठ रोग के उपचार में आरोग्यवर्धिनी वटी का उपयोग सहायक होता है। यह त्वचा और रक्त की शुद्धि में मदद करती है और रोग को धीरे-धीरे ठीक करती है।

ज्वर(बुखार ) को ठीक करे

यह वटी बुखार के इलाज में फायदेमंद है। यह शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है और बुखार के कारण होने वाली कमजोरी को दूर करती है।[आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि]

हृदय रोग में फायदेमंद 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि

आरोग्यवर्धिनी वटी हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। यह कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करती है और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।

आरोग्यवर्धिनी वटी के साथ एक रत्ती डिजिटेलिस (हृदपर्णी ,तिल पुष्पी ,धूम्रपुष्पी) के पत्ते का चूर्ण और एक रत्ती जंगली प्याज का चूर्ण  मिलाकर इसे पुनर्नवादि या दशमूल काढ़े के साथ प्रयोग करने से ह्रदय रोग ठीक होता है।

हेपेटाईटिस में है फायदेमंद 

हेपेटाइटिस जैसे गंभीर रोगों में आरोग्यवर्धिनी वटी का उपयोग लिवर को ठीक करने और उसकी कार्यक्षमता को बढ़ाने में किया जाता है। यह लिवर की सफाई और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायक है।

आरोग्यवर्धिनी वटी को लेने की विधि और मात्रा 

  • अधिकतम मात्रा : 250 – 500 mg
  • खाने के बाद या पहले : खाने के बाद 
  • लेने का तरीका : शहद के साथ (रोग के अनुसार )
  • दवा कितनी बार लेनी है : सुबह-शाम 
  • दवा लेने की अवधि : चिक्तिसक के परामर्श से अधिकतम 6 माह 

आरोग्यवर्धिनी वटी के नुकसान 

पेट में दर्द ,गैस की परेशानी ,चक्कर आना और मुँह में छाले जैसी समस्या हो सकती है। 

आरोग्यवर्धिनी वटी के महत्वपूर्ण  फायदे , नुकसान और लेने की विधि FAQ –

आरोग्यवर्धिनी वटी के क्या-क्या फायदे हैं?

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आरोग्यवर्धिनी रस लम्बे समय तक ले सकते हैं क्या?

नहीं , क्योंकि इसमें भारी तत्व जैसे पारा , गंधक आदि मिले होते हैं। इसीलिए इसका लम्बे समय तक सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलह जरुरी है। 

क्या आरोग्यवर्धिनी वटी लीवर के लिए अच्छी है?

आयुर्वेद में लिवर से सम्बंधित रोगों में प्राचीन समय से आरोग्यवर्धिनी वटी  प्रयोग किया जाता रहा है। 

क्या इसे गर्भवती महिलाएं ले सकती हैं?

गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन चिकित्सक की देख रेख में करना चाहिए।

क्या यह बच्चों के लिए सुरक्षित है?

आयु और रोग के अनुसार चिकित्सक से सलाह लें। 

चेतावनी 

इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी आयुर्वेद  प्रति जागरूक करने के लिए हैं। प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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