योगराज गुग्गुल के 21 महत्वपूर्ण फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

योगराज गुग्गुल के 21 महत्वपूर्ण फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

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परिचय

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि : गुग्गुल एक प्रकार का गोंद है जो कॉम्मीफोरा मुकुला नामक पौधे से प्राप्त होता है। यह पौधा मुख्य रूप से भारत के राजस्थान, कर्नाटक, गुजरात, आसाम तथा उत्तर प्रदेश में पाया जाता है। 

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दोस्तों अगर आप गठिया, इंफ्लेमेटरी डिजीज, प्रोस्टेटाइटिस, बवासीर,गाउट,आँखों के रोग, कान के बदबू, खट्टी डकार,भगन्दर ,एनीमिय,मोटापा,अल्सर, गर्भाशय की समस्या ,त्वचा के रोग , डायबिटीज , कब्ज ,गंजापन, बुखार, जोड़ों में दर्द जैसे रोगो से परेशान हैं तो  घबराने की जरुरत नहीं है। क्योंकि इस तरह के रोगों में योगराज गुग्गुल आयुर्वेद का बहुत ही शानदार तोहफा है। 

योगराज गुग्गुल एक बहुत ही लाभकारी आयुर्वेदिक औषधि है। जिसका मुख्य घटक गुग्गुल का गोंद है। इसमें गुग्गुल के अलावा कई अन्य जड़ी-बूटियाँ भी शामिल होती हैं। जिनका संयुक्त प्रभाव रोगों के उपचार में सहायक होता है।

 योगराज गुग्गुल के घटक

●      मुख्य घटक : गुग्गुल का गोंद 

●      अन्य घटक: चित्रक ,पिप्पली , अजवाइन, काला जीरा ,विडंग ,अजमोदा, देवदारु, छोटी इलायची ,सेंधा नमक, रासना ,गोखरू, धनिया, त्रिफला, त्रिकटु, दालचीनी, जौ का पौधा ,तेज पत्ता और हिमालयन फर 

इन जड़ी-बूटियों को एक विशिष्ट फर्मेंटेशन आयुर्वेदिक प्रक्रिया के अनुसार मिलाकर योगराज गुग्गुल तैयार किया जाता है।

योगराज गुग्गुल के फायदे

योगराज गुग्गुल  त्वचा के लिए है लाभकारी

योगराज गुग्गुल के अंदर एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं जो  विभिन्न त्वचा से सम्बंधित समस्याओं को ठीक करने में मददगार हो सकते हैं।

हालांकि इन लाभों को लेकर कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। इसीलिए योगराज गुग्गुल का उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं में करने से पहले किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श जरूर करना चाहिए।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि
  • मुँहासे (Acne): योगराज गुग्गुल के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुँहासों की सूजन को कम करने में मदद करतें हैं। इसमें बैक्टीरिया के विकास को रोकने की क्षमता होती है जो मुँहासे का कारण बनते हैं। यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि इसके प्रभाव सीमित अध्ययनों पर आधारित है और यह सभी के लिए कारगर हो ,ऐसा नहीं है ।
  • त्वचा की सूजन (Skin Inflammation): योगराज गुग्गुल विभिन्न प्रकार की त्वचा की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है, जिसमें एक्जिमा और सोरायसिस जैसी समस्याएं शामिल हैं।
  •  त्वचा की रूखापन (Dry Skin): आयुर्वेद के नजरिए से योगराज गुग्गुल त्वचा को हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है।  लेकिन इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
  • निशान (Scars): योगराज गुग्गुल निशान को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन इस दावे को और शोध की आवश्यकता है।

किसी भी त्वचा समस्या के लिए योगराज गुग्गुल का उपयोग करने से पहले हमेशा किसी त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।

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 योगराज गुग्गुल भगन्दर(फिस्टुला) से दिलाये राहत

भगंदर, जिसे अंग्रेजी में फिस्टुला कहते हैं। जिसमें शरीर के दो अंगों के बीच एक असामान्य रास्ता बन जाता है। यह रास्ता  आमतौर पर संक्रमण, सूजन, चोट या सर्जरी के बाद हो सकती है। 

भगंदर  कई कारणों से हो सकता है।  जैसे कि बवासीर या फिर मलद्वार का संक्रमण। क्रोहन रोग सूजन वाली आंत की बीमारी है जो भगंदर का कारण बन सकती है। 

डायवर्टिकुलर बीमारी जिसमे बड़ी आंत की दीवार में छोटे-छोटे थैलीनुमा उभार होते हैं, इनमें संक्रमण होने पर भगंदर हो सकता है।

भगन्दर हो जाने पर मलद्वार के आसपास लगातार दर्द बना रहता है और मलद्वार के आसपास सूजन हो जाता है। इसमें मलद्वार के आसपास से पस या मवाद निकल सकता है। मल त्याग के समय खून भी आ सकता है।

 संक्रमण होने पर बुखार भी हो सकता है। भगंदर से होने वाले संक्रमण से बचने में योगराज गुग्गुल मदद कर सकता है। योगराज गुग्गुल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो संक्रमण(बैक्टीरिया या वायरस) से लड़ने में मदद करता हैं। 

योगराज गुग्गुल में सूजन कम करने वाले गुण होते हैं जिससे भगंदर के कारण होने वाली सूजन को कम करने में भी मदद मिलती है। 

यह दवा भगन्दर से होने वाले दर्द को कम करने में भी सहायक होती है। योगराज गुग्गुल भगंदर से जुड़ी पाचन समस्याओं को कम करने में सहायक होता है। 

योगराज गुग्गुल का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए क्योंकि भगंदर एक गंभीर बीमारी है और इसका इलाज केवल योगराज गुग्गुल से नहीं किया जाना चाहिए।

योगराज गुग्गुल को अन्य चिकित्सा उपचारों के साथ जोड़कर या डॉक्टर की देखरेख में इसका इस्तेमाल करना चाहिए।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

और पढ़ें : खूनी और बादी बवासीर के लक्षण और उपचार

योगराज गुग्गुल डायबिटीज(मधुमेह) को कंट्रोल करने में सहायक

डायबिटीज जिसे हम मधुमेह और शुगर के नाम से भी जानते हैं , यह एक ऐसी  बीमारी है जिसमें खून में शर्करा या ग्लूकोज़ का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है। 

 मधुमेह में शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन (एक तरह का हार्मोन) नहीं बना पाता है या इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पता है जिससे ग्लूकोज़  खून में ही रह जाता है। 

मधुमेह कई कारणो से हो सकता है। जैसे कि  हमारे गलत खानपान , बढ़ती उम्र  या हमारे घर परिवार में किसी को पहले से रहा हो जिसे हम कहते है कि पीढ़ी दर पीढ़ी चल रहा है , उसकी वजह से भी डायबिटीज (शुगर ) हो सकता है। 

अगर हमें डायबिटीज या शुगर को कंट्रोल कराना है तो हम योगराज गूगल का उपयोग कर सकते हैं। जो कि हमारे शुगर को कंट्रोल करने में बहुत ही असरदार साबित होगा। 

योगराज गूगल एक श्रेष्ठ रसायनिक औषधि है जो शरीर में श्रेष्ठ रस और धातुओं की पूर्ति में मदद करती है। जिस वजह से डायबिटीज या शुगर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

 योगराज गुग्गुल इम्युनिटी  को बढ़ाने में करे मदद

 जी हाँ आप ने सही पढ़ा , योगराज गुग्गुल को इम्युनिटी को मजबूत बनाने के लिए जाना जाता है। आयुर्वेद में इसे एक शक्तिशाली औषधि माना जाता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।

योगराज गुग्गुल प्रतिरक्षा तंत्र को कैसे मजबूत करता है ?

●   गुण:  योगराज गुग्गुल में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर में सूजन को कम करने में मदद करते हैं। जब शरीर में सूजन कम होती है, तो इम्युनिटी बेहतर ढंग से काम कर पाती है।

●  बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता:  यह विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया से लड़ने में मदद करता है और शरीर को संक्रमण से बचाता है।

●  पाचन तंत्र को स्वस्थ रखना:  स्वस्थ पाचन तंत्र एक मजबूत रोगप्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है। योगराज गुग्गुल पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है, जिससे इम्युनिटी को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

●  खून का शुद्धिकरण:  यह खून को साफ़ करता है और विशैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। जिससे रोगप्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद मिलती है।

●  बार-बार होने वाले संक्रमण:  यदि बार-बार बीमार पड़ते हैं तो योगराज गुग्गुल का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद है। क्योंकि ये इम्युनिटी को मजबूत करने में मदद करता है।

 [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

और पढ़ें : इम्युनिटी को मजबूत बनाने में अभ्रक भस्म के फायदे

योगराज गुग्गुल कब्ज से राहत दिलाने में है लाभकारी

आज के समय में कब्ज हर  किसी की समस्या बन गयी है। ये कब्ज की समस्या हमारे गलत खान-पान और गलत रहन-सहन की वजह से होता है। इस समस्या को दूर करने में योगराज गुग्गुल बहुत ही फायदेमंद साबित होता है।

योगराज गुग्गुल की प्रकृति गर्म होती है जो जठराग्नि को तेज करने में सहायक होता है। इस वजह से योगराज गुग्गुल कब्ज से छुटकारा दिलाने में सहायता करता है

 योगराज गुग्गुल गंजेपन को दूर करने में है फायदेमंद

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

सिर के बालों का झड़ना आज के समय की बहुत ही बड़ी समस्या बन गई है। जिसकी वजह से गंजापन हो  जाता है।  गंजापन कई कारणों से हो सकता है।

जिसमे तरह -तरह के शैम्पू का प्रयोग , केमिकल युक्त तेल , साबुन का प्रयोग , बालो को डाई करवाना शामिल है। इनमे बालों के लिए हानिकारक केमिकल की मात्रा अधिक होने के कारण बालो की जड़े कमजोर हो जाती है। जिससे बाल झड़ने की समस्या होने लगती है। 

इसके अतिरिक्त डिप्रेशन , बालो में पोषण की कमी , विटामिन की कमी , त्वचा से जुडी समस्या ,गलत दवाइयां  या सप्लीमेंट लेने से भी बाल झड़ने लगते है।

अमेरिका हेयर लॉस रिसर्च के मुताबिक, 50 साल की उम्र तक करीब 85% प्रतिशत पुरुष  गंजे हो जाते है। 

अगर आप गंजेपन से छुटकारा पाना चाहते है तो योगराज गुग्गुल आपकी इस समस्या को दूर करने में आपकी मदद कर सकता है। 

क्योंकि ये बालो की जड़ो तक पोषण तत्व पहुँचता और बालो की जड़ों को मजबूत बनाने में सहायता करता है।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]  

योगराज गुग्गुल गठिया रोग से राहत दिलाने में है फायदेमंद

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

गठिया (अर्थराइटिस्ट) में सूजन और शरीर के किसी भी जोड़ में दर्द हो सकता है। गठिया के लक्षण समय के साथ -साथ बढ़ता रहता है। ज्यादातर गठिया 65 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगो में देखने को मिलता है।

लेकिन आज का जो परिवेश है उसमे यह बच्चों तथा नौजवानों में भी देखने को मिलता है। ये आदमियों के मुकाबले औरतो में ज्यादा देखने को मिलता है।  ज्यादातर मोटे लोगो में होता है।

योगराज गुग्गुल का परम्परागत रूप से गठिया के इलाज में उपयोग किया जाता है। इसमें सूजन को कम करने और दर्द से राहत दिलाने वाले गुण होते हैं जो गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद करते हैं।

योगराज गुग्गुल में मौजूद जड़ी-बूटियाँ सूजन और गठिया के दर्द को कम करने में लाभदायक होती  हैं। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

 योगराज गुग्गुल घाव को भरने में है प्रभावकारी 

किसी भी घाव का संक्रमण आमतौर पर बैक्टीरिया के कारण होता है। कभी-कभी संक्रमण , फंगस या अन्य सूक्ष्मजीवों के कारण भी हो सकता हैं। फोड़ा हो जाने पर सूजन , लालिमा , दर्द , मवाद , बुखार , थकान होने लगता है।

यदि कोई घाव ठीक से साफ नहीं किया जाता है तो वह संक्रमित हो जाता है और वह फोड़ा बन जाता है। संक्रमण के बढ़ने पर मवाद (पस ) बन जाता  है। कभी-कभी मवाद बाहर भी निकलता है।

फोड़ा अनेको कारणों से हो सकता है जैसे त्वचा में चोट, कट, खरोंच जिनसे  बैक्टीरिया को त्वचा के अंदर जाने का मौका मिल सके। 

ऐसे में फोड़ा होने की संभावना बढ़ जाती है। फोड़े में संक्रमण हो जाने पर योगराज गुग्गुल का उपयोग किया जा सकता है।

 इसके लिए योगराज गुग्गुल की 125-250 mg मात्रा गोमूत्र के साथ सेवन करने पर फोड़े में लाभ मिलता है।

 इसके अतिरिक्त यदि योगराज गुग्गुल की 125 mg मात्रा को 250 mg सोंठ (सूखा अदरक)और देवदारू चूर्ण के साथ मिश्रण बनाकर यदि नियनित रूप से  लिया जाये तो घाव जल्दी भर कर सूख जाता है।  

योगराज गुग्गुल अल्सर से दिलाये राहत

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

अल्सर (पेप्टिक अल्सर) पेट या आंत की परत में बना घाव होता है। अल्सर तब बनता है जब पाचन क्रिया प्रभावित होने के कारण खाना पचता नहीं है और पेट की अंदरूनी परत की रक्षा करने वाले कारकों में संतुलन बिगड़ जाता है।

पेट में जलन के साथ होने वाला दर्द अल्सर का सबसे बड़ा लक्षण है। पेट के अल्सर का सबसे बड़ा कारण एक प्रकार का बैक्टीरिया जिसे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी कहते हैं , होता है। यही बैक्टीरिया हमारे पेट को संक्रमित करता है।

अगर अल्सर का इलाज सही समय पर नहीं किया जाय तो ये एक गंभीर बीमारी का रूप ले सकता हैं। ऐसे में अगर वैद्य के परामर्श से आयुर्वेदिक दवा योगराज गुग्गुल का  प्रयोग किया जाये तो अल्सर जैसी गंभीर बीमारी से छुटकारा पाया जा सकता  है। 

इसके लिए योगराज गुग्गुल की 125 mg की मात्रा को , त्रिफला को उबालकर बनाये गए काढ़े की 20 ml की मात्रा के साथ सुबह-शाम आवश्यक निर्देशों के अनुसार पीने से अल्सर से राहत मिलता है। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

और पढ़ें : लिवर की समस्याओं में पुनर्नवा वटी के प्रयोग

योगराज गूगूल मोटापा कम करने में है फायदेमंद 

अगर आप मोटापे से परेशान हैं और इससे छुटकारा पाना चाहते हैं तो आयुर्वेदिक दवा योगराज गुग्गुल का सहारा ले सकते है।  इसके लिए अग्निमंथ (हेडेक ट्री) की छाल का काढ़ा बनाकर उसकी 20 ml की मात्रा के साथ योगराज गुग्गुल की 125 mg  की मात्रा प्रतिदिन प्रयोग करने से मोटापे में लाभ मिलता है। 

यदि योगराज गुग्गुल की  125 mg की मात्रा को रोज सुबह और शाम शहद के साथ भोजन करने से 30 मिनट पहले नियमित रूप से प्रयोग करने से 15 से 20 दिनों में ही शरीर से फैट धीरे-धीरे पसीने और मल के रूप में बहार निकलने लगता है। 

योगराज गुग्गुल के उपयोग के साथ-साथ अपनी दिनचर्या में भी बदलाव करना होगा और स्वस्थ्य जीवनशैली अपनानी होगी।  इसमें शारीरिक परिश्रम करना जैसे मॉर्निग वाक, व्याम करना और पौष्टिक भोजन करना शामिल है। 

योगराज गुग्गुल आपके समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है

योगराज गुग्गुल हमारे सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।

सूजन कम करता है: योगराज गुग्गुल शरीर में सूजन को कम करने में मदद करता हैं। यह सूजन संबंधी बीमारियों के लिए फायदेमंद होता है।

जोड़ों के दर्द में राहत: यह औषधि गठिया के कारण जोड़ों में होने वाले दर्द को कम करके जोड़ों की गतिशीलता को ठीक  करती है।

मांसपेशियों की जकड़न और दर्द: योगराज गुग्गुल मांसपेशियों की जकड़न और दर्द को कम करने में मदद करता है।

पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है: यह औषधि पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है। जिससे अपच, कब्ज और अन्य पाचन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाती है: यह औषधि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर संक्रमण से लड़ने में मदद करती है।

कोलेस्ट्रॉल को कम करता है: योगराज गुग्गुल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य करने में मदद करता है।

त्वचा के लिए फायदेमंद: यह औषधि त्वचा संबंधी समस्याओं में लाभकारी होती है।

विषैले पदार्थों को बाहर निकालता है: यह औषधि शरीर में जमा विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करती है।

खून के प्रवाह को बेहतर बनाता है: यह औषधि खून के प्रवाह को बेहतर बनाकर शरीर के सभी अंगों तक पोषक तत्वों और ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ाती है।

 [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

हड्डी टूट (फ्रैक्चर) जाने पर योगराज गुग्गुल का उपयोग

अगर शरीर की कोई भी हड्डी टूट जाये तो तुरंत ही हड्डी के डाक्टर से इलाज करवाना चाहिए। इसके अतिरिक्त वैद्य के परामर्श से आयुर्वेदि औषधि योगराज गुग्गुल का भी सेवन करें।

क्योंकि योगराज गुग्गुल में भरपूर मात्रा में कैल्शियम पाया जाता है जो हड्डियों में फ्रैक्चर हो जाने पर उनको तेजी से जोड़ने में मदद करता है और हड्डियों पर भरपूर मात्रा में कैल्शियम को एकत्रित करता है। 

योगराज गुग्गुल बुखार ठीक करने में है फायदेमंद

बुखार एक लक्षण है ना की कोई बीमारी।  बुखार कई कारणों से हो सकता है मौसम में बदलाव के कारण, वायरल , बैक्टीरियल या फ़न्गल संक्रमण से बुखार आ सकता है। इसमें योगराज गुग्गुल आपकी मदद कर सकता है।

योगराज गुग्गुल एक महत्वपूर्ण आयुर्वेद औषधि है जिसे कई स्वास्थ्य सम्बंधित समस्याओं के लिए प्रयोग किया जाता है। जिनमे से बुखार भी एक है। 

किन्तु यहाँ समझने वाली महत्वपूर्ण बात यह है कि योगराज गुग्गुल सीधे बुखार को कम नहीं करता  है बल्कि यह शरीर के  इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत  करके बुखार से लड़ने में सहायता  करता है। 

योगराज गुग्गुल में मौजूद जड़ी-बूटियाँ शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने में सहायक होती हैं जिससे शरीर संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ सके और बुखार को कम कर सके । 

बुखार के लिए योगराज गुग्गुल का उपयोग करने से पहले हमेशा अपने चिकित्सक से सलाह लें।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

 गर्भाशय में होने वाली समस्याओं में योगराज गुग्गुल के लाभ

गर्भाशय महिलाओं का एक महत्वपूर्ण अंग है। जिसका स्वस्थ्य रहना बहुत जरुरी है। जब गर्भाशय स्वस्थ्य होगा तभी कोई महिला गर्भ धारण कर सकती है। लेकिन कई बार महिलाओं की असावधानी के कारण गर्भाशय से जुड़ी विभिन्न समस्याएं हो जाती हैं।

गर्भाशय में संक्रमण विभिन्न कारणों से हो सकता है जैसे कि यौन रोग।  यह रोग एक संक्रामक रोग है। ये बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलती है। 

संक्रमण हो जाने पर इसके लक्षणों के रूप में बुखार , पेट में दर्द , योनि से बदबूदार स्राव , बार-बार पेशाब आना , गर्भाशय में होने वाले फॉयब्रॉइड्स (जो की गैर-कैंसरयुक्त ट्यूमर होते हैं) दिखाई देते हैं ।

गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं में योगराज गुग्गुल का उपयोग प्राचीन समय से किया जाता रहा है। गर्भाशय में होने वाली कई समस्याओं में सूजन और संक्रमण प्रमुख कारण हैं । 

योगराज गुग्गुल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो सूजन और संक्रमण को कम करने में मदद करते हैं। योगराज गुग्गुल फॉयब्रॉइड्स के आकार को कम करने और इससे जुड़े लक्षणों को कम करने में बहुत कारगर होता है ।

असामान्य मासिक धर्म या योनि से अत्यधिक रक्तस्राव जैसी समस्याओं में योगराज गुग्गुल बहुत लाभदायक साबित हो सकता है।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

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प्रोस्टेटाइटिस में योगराज गुग्गुल के लाभ

प्रोस्टेट ग्रंथि में होने वाली सूजन या संक्रमण की स्थिति को प्रोस्टेटाइटिस कहते हैं। प्रोस्टेट एक छोटी सी ग्रंथि है जो केवल पुरुषों में पाई जाती है और ये पेशाब नली के ठीक नीचे रहती है। इस ग्रंथि  का काम शुक्राणुओं के साथ मिलने वाले द्रव को बनाना है। प्रोस्टेटाइटिस के कुछ संभावित कारण तनाव ,बैक्टीरियल संक्रमण , पेशाब नली में संक्रमण और शारीरिक चोट को मन जाता है। 

प्रोस्टेटाइटिस के चार रूप होते है –

  1. तीक्ष्ण जीवाणु प्रोस्टेटाइटिस – ये वाला रूप सबसे गंभीर होता है। इसमें प्रोस्टेट में बैक्टीरिया के कारण बहुत तेज संक्रमण होता है।
  2. दीर्घकालिक जीवाणु प्रोस्टेटाइटिस – इस वाले रूप में प्रोस्टेट में बैक्टीरिया का लगातार संक्रमण तो होता है लेकिन इसके लक्षण तेज नहीं होते हैं।
  3. दीर्घकालिक गैर-जीवाणु प्रोस्टेटाइटिस – इस वाले रूप में प्रोस्टेट में कोई बैक्टीरिया तो नहीं पाया जाता है  लेकिन फिर भी सूजन और दर्द रहता है।
  4. असिम्त प्रोस्टेटाइटिस – इस वाले रूप में किसी भी प्रकार के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। जब तक कि इसका लैब टेस्ट न किया जाये।

प्रोस्टेटाइटिस के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग होते हैं।  जैसे कि  बार-बार पेशाब का आना , पेशाब करते समय जलन होना , पेशाब में खून आना , पेशाब रुक-रुक कर आना , पेशाब पूरी तरह से खुल कर न होना , पेशाब करने में परेशानी होना , बुखार आना  , ठंड का लगना आदि। 

ऐसे में योगराज गुग्गुल का प्रयोग इस रोग से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

योगराज गुग्गुल अम्लपित्त (कच्ची पक्की डकार आना) से दिलाये राहत

किसी को भी अम्लपित्त(खट्टी डकार आना) हो जाना एक आम समस्या है। यह तब होता है जब पेट में पाया जाने वाला एसिड ग्रासनली(भोजन नली) से ऊपर की ओर बढ़ता है।

खट्टी डकार की समस्या गलत खान-पान या गलत समय पर भोजन करने अथवा एक बार में भूख से ज्यादा खाना खाने से होती है क्योंकि इससे पेट में दबाव बढ़ जाता है और एसिड ग्रासनली(भोजन नली) से ऊपर की ओर बढ़ने लगता है।

बहुत अधिक तला -भुना और मसालेदार भोजन करने से भी पेट में एसिड बढ़ता हैं । अल्सर, हर्निया और गर्भावस्था जैसे कुछ कारणों से भी खट्टी डकार की समस्या हो सकती है। 

योगराज गुग्गुल अम्लपित्त(खट्टी डकार) से राहत दिलाने में मदद करता है। क्योंकि इस आयुर्वेदिक औषधि में कई जड़ी-बूटियों का एक मिश्रण है जो अम्लपित्त जैसी समस्याओं से आराम दिलाने में बहुत ही कारगर होता है। 

योगराज गुग्गुल डायजेस्टिव सिस्टम (पाचन क्रिया) को ठीक करने में मदद करता है। क्योंकि जब पाचन ठीक होगा तो भोजन ठीक इस पचेगा। जिससे एसिड का बनना कम होगा ।

पित्त दोष ही अम्लपित्त की मूल वजह होती है। योगराज गुग्गुल पित्तदोष को समाप्त करके अम्लपित्त को बनने से रोकता है।  त्रिफला तथा गुडूची का काढ़ा पीने के साथ-साथ योगराज गुग्गुल का प्रतिदिन सेवन करने से खट्टी डकार से राहत मिल जाती है। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

बवासीर से योगराज गुग्गुल दिलाये राहत

बवासीर(पाइल्स) एक गंभीर समस्या है जिसमें मलद्वार में मौजूद नसों में सूजन आ जाता हैं। यह सूजी हुई नसें मलद्वार के अंदर या बाहर बन सकती हैं।

बवासीर के लक्षणों में  मल त्याग के समय या बाद में मलद्वार से खून आना , मलद्वार में खुजली होना ,  मलद्वार के आसपास गांठें(मस्से ) महसूस होना , मलद्वार में दर्द होना या मल त्याग के दौरान दर्द होना है। 

बवासीर होने के कई कारण होते हैं- 

कब्ज – जब कब्ज हो जाती है तो पेट साफ़ नहीं होता है। ऐसे में अगर मल त्याग के लिए बहुत जोर लगाते हैं तो मलद्वार में दबाव बढ़ जाता है जिससे बवासीर हो सकता हैं।

गर्भावस्था – गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का पेट बढ़ने लगता है जिससे मलद्वार और मलाशय पर दबाव पड़ता है जिससे बवासीर होने का खतरा बढ़ जाता हैं।

भारी वस्तु उठाना – बार -बार या लगातार भारी वस्तुओं को उठाने वाले लोगों के मलद्वार पर बहुत ज्यादा बिना वजह का दबाव पड़ता रहता है । जिससे मलद्वार की नसों में सूजन आ जाता है और बवासीर होने का खतरा बाद जाता है। 

लंबे समय तक बैठना – ज्यादा देर तक लगातार बैठने वाले लोगों को बवासीर हो सकता है क्योंकि इससे मलद्वार की नसों पर दवाब बढ़ने से सूजन आ जाता है। खासकर उन लोगों को जो शौचालय में बहुत देर तक बैठते हैं। क्यों कि आज कल लोग मलत्याग के समय भी देर तक बैठकर मोबाइल देखते रहते हैं। 

मोटापा – मोटापा भी बवासीर के जोखिम को बढ़ाता है।

दस्त – बार-बार दस्त लगने से भी मलद्वार में जलन और सूजन हो जाती है जिससे बवासीर होने का खतरा बढ़ जाता है ।

बढ़ती उम्र – बढ़ती उम्र के साथ मलद्वार की नसें कमजोर हो जाती हैं जिससे बवासीर होने की संभावना बढ़ जाती है।                   

योगराज गुग्गुल बवासीर जैसी समस्या से राहत दिलाने में मदद करता है । यह बहुत ही चमत्कारिक औषधि है जो शरीर में सूजन को कम करने और खून के प्रवाह को ठीक करने में मदद करती है।

बवासीर में योगराज गुग्गुल कैसे काम करता है –

सूजन कम करता है – योगराज गुग्गुल में मौजूद सूजनरोधी गुण सूजन को कम करने में मदद करता हैं। जिससे बवासीर में आराम मिलता है। 

खून के प्रवाह को ठीक करता है – योगराज गुग्गुल खून के प्रवाह को ठीक करके प्रभावित हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति को बढ़ाता है जिससे बवासीर के उपचार में मदद मिलता है।

दर्द और जलन को कम करता है – योगराज गुग्गुल में दर्द को कम करने का गुण होता है जो बवासीर से होने वाले दर्द और जलन को कम करने में मदद करता हैं।

मल को सामान्य करता है – योगराज गुग्गुल मल को सामान्य करके मल त्याग को आसान करता है जिससे बवासीर पर दबाव कम पड़ता है।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

जोड़ो में  दर्द के लिए योगराज गुग्गुल के फायदे

आज के समय में जोड़ों का दर्द लोगों लिए गंभीर समस्या बन चुकी है । जब जोड़ों का दर्द होता है तो इसके लक्षणों के रूप में जोड़ों में सूजन , जोड़ों का लाल पड़ जाना , जोड़ों के अंदर लिगामेंट के कम हो जाने के कारण जोड़ों का जाम पड़ना जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। 

शारीरिक बनावट के हिसाब से ये दर्द किसी को ज्यादा तो किसी को कम हो सकता है। इन सभी समस्याओं के हल के रूप में योगराज गुग्गुल बहुत प्रभावी माना जाता है।

योगराज गुग्गुल में सूजनरोधी गुण मौजूद होता है जिसके कारण ये जोड़ों में होने वाले सूजन को कम करने में मदद करता हैं। जब जोड़ों में सूजन कम हो जाती है तो दर्द भी कम हो जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार जोड़ों का दर्द  वातदोष के कारण होता है। योगराज गुग्गुल वात दोष को संतुलित करता है जिससे दर्द को कम करने में मदद मिलती है।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

एनीमिया(पांडूरोग) में योगराज गुग्गुल का उपयोग

एनीमिया(पांडूरोग)का अर्थ है शरीर में लाल खून या हीमोग्लोबिन का स्तर कम हो जाना । हीमोग्लोबिन एक प्रकार का प्रोटीन होता है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाया जाता है।

हीमोग्लोबिन का ही काम होता है शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का ।

जब शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है तो उस स्थिति में शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पाता है।

जिसके कारण शरीर में थकान , कमजोरी ,पीली त्वचा , चक्कर आना , सांस लेने में कठिनाई , दिल की धड़कन बढ़ना , ठंड लगना , सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं ।

ऐसे में एनीमिया की समस्या को दूर करने के लिए योगराज गुग्गुल का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि  एनीमिया जैसी खून सम्बंधित समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है।

योगराज गुग्गुल किस तरह एनीमिया से सम्बंधित समस्याओं में लाभ पहुंचाता है –

आयरन की कमी दूर करके – आयरन की कमी के कारण ही एनीमिया की समस्या उत्पन्न होती है । क्योकि आयरन ही  हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरुरी होता है।

खून को साफ़ करके – योगराज गुग्गुल खून को साफ करने में मदद करता है। यह खून में मौजूद विषाक्त पदार्थों जैसे  बैक्टीरिया या वायरस को खून से बाहर निकालकर हीमोग्लोबिन नाम के प्रोटीन को स्वस्थ बनाता है और इसकी मात्रा को बढ़ता है।

पाचन शक्ति में सुधार करके – योगराज गुग्गुल पाचन शक्ति को बेहतर बनाता है जिससे भोजन से पोषक तत्वों का अधिकतम अवशोषण होता है। इससे शरीर में खून बनाने की प्रक्रिया तेज होती है।

आयरन का उचित अवशोषण करके – योगराज गुग्गुल आयरन की कमी को दूर करने में सहायता करता है। ये सर्वविदित है कि  आयरन ही हीमोग्लोबिन का महत्वपूर्ण घटक होता है जो खून में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है।

अस्थि मज्जा को मजबूत बनाकर –अस्थि मज्जा का काम होता है खून कोशिकाओं का निर्माण करना । योगराज गुग्गुल अस्थि मज्जा को मजबूत बनाकर खून कोशिकाओं के उत्पादन को बढ़ाने का काम करता है।[योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

और पढ़ें : एनीमिया रोग में लोहासव के फायदे

 योगराज गुग्गुल यूरिक एसिड को करे नियंत्रित 

 योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि

जब शरीर में यूरिक एसिड अधिक मात्रा में बढ़ जाता है तब हमारी किडनी यूरिक एसिड को शरीर से बाहर निकालने में असमर्थ हो जाती है। जिसकी वजह से यह क्रिस्टल के रूप में जोड़ों में जम जाता है। 

 जिसके कारण जोड़ों में सूजन , दर्द और लालिमा होने लगती है और गठिया का दर्द शुरू है। जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ जाती है तो आमतौर पर पैर के अंगूठे में दर्द होता है लेकिन कभी -कभी घुटनों और हाथ के जोड़ों में दर्द होने लगता है।  

यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य कारण

●      खान-पन – रेड मीट(लाल मांस ) , ऑर्गन मीट (जिगर, किडनी), शराब,  सी फूड्स ,मछली , झींगा ,केकड़े , सोडा-जूस , चीनी  , मीठे ड्रिंक्स , शतावरी और कुछ सब्जियां जैसे कि पालक, गोभी आदि में यूरिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है जिनके सेवन से यूरिक एसिड का स्तर बढ़ सकता है।

●      यूरिक एसिड होने के कुछ और भी कारण है –कम मात्रा में पानी पीना , अल्कोहल का अधिक सेवन करना  , हाइपरटेंशन, मोटापा, मधुमेह ,बीपी ,कैंसर रोधी दवाएं और पेन किलर्स , इंसुलिन रेजिस्टेंस ,बॉडी में आयरन की मात्रा का बढ़ना , किडनी खराब होना , थायराइड कम या ज़्यादा होना , खराब जीवनशैली जैसे कुछ कारण हैं जिनकी वजह से यूरिक एसिड शरीर में बनता है। 

ऐसे में योगराज गुग्गुल का प्रयोग शरीर में यूरिक एसिड को नियंत्रित करने के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। क्योंकि योगराज गुग्गुल में ऐसे गुण होते हैं जो यूरिक एसिड को पेशाब के द्वारा शरीर से बाहर निकाल देता है । 

इसके अतिरिक्त ये अपने दर्दनिवारक गुणों के कारण जोड़ों के दर्द को भी खत्म करने में सहायता करता है और वातदोष को संतुलित करता है। [योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि ]

योगराज गुग्गुल आँखों के रोग में है फायदेमंद

आँखों के स्वास्थ्य के लिए योगराज गुग्गुल के बारे में कुछ दावे किए जाते हैं कि इसका उपयोग मोतियाबिंद के इलाज में किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसे आँखों की रोशनी बढ़ाने और उसकी सूजन को कम करने में भी किया जाता है। 

इस बात का ध्यान रखना जरुरी है कि आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से ही आँखों के किसी भी रोग के लिए योगराज गुग्गुल का उपयोग करें। 

योगराज गुग्गुल को लेने की विधि

2 वर्ष की आयु से लेकर बुजुर्ग वर्ग तक –

अधिकतम मात्रा – 2 टैबलेट

खाने के बाद या पहले – कभी भी ले सकते हैं। लेकिन भोजन के बाद ज्यादा उत्तम है। 

लेने का तरीका – शहद के साथ 

दवा कितनी बार लेनी है – दिन में 3 बार

दवा लेने की अवधि – 3 महीने तक या वैद्य के अनुसार 

2 वर्ष की आयु से काम वर्ग के लिए –

अधिकतम मात्रा – 1 टैबलेट

खाने के बाद या पहले – भोजन के बाद (बच्चे को दूध पिलाने के बाद ) 

लेने का तरीका – शहद के साथ 

दवा कितनी बार लेनी है – दिन में 2 बार

दवा लेने की अवधि – वैद्य के अनुसार 

योगराज गुग्गुल के नुकसान

किसी भी औषधि की तरह योगराज गुग्गुल के कुछ नुकसान हो सकते हैं। जैसे कि पेट ख़राब होना ,दस्त लग जाना ,सिरदर्द होना ,एलर्जी होना आदि।  

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से सलाह लेनी चाहिए। 

यदि किडनी की कोई समस्या है तो योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से परामर्श लें।

यदि दिल की बीमारी है तो योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से परामर्श लें।

योगराज गुग्गुल के फायदे ,नुकसान और लेने की विधि-FAQ –

 योगराज गुग्गुल का उपयोग किन -किन रोगो में करते हैं ?

योगराज गुग्गुल का उपयोग गठिया, इंफ्लेमेटरी डिजीज, प्रोस्टेटाइटिस, बवासीर,गाउट,आँखों के रोग, कान के बदबू, खट्टी डकार,भगन्दर ,एनीमिय,मोटापा,अल्सर, गर्भाशय की समस्या ,त्वचा के रोग , डायबिटीज , कब्ज ,गंजापन, बुखार, जोड़ों में दर्द जैसे रोगो में किया जाता है। 

 योगराज गुग्गुल का प्रयोग करते समय क्या सावधानी रखनी चाहिए ?

किसी भी औषधि की तरह योगराज गुग्गुल के कुछ नुकसान हो सकते हैं। जैसे कि पेट ख़राब होना ,दस्त लग जाना ,सिरदर्द होना ,एलर्जी होना आदि।  

गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से सलाह लेनी चाहिए। 

यदि किडनी की कोई समस्या है तो योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से परामर्श लें।

यदि दिल की बीमारी है तो योगराज गुग्गुल का सेवन करने से पहले वैद्य से परामर्श लें।

चेतावनी 

इस लेख में दी गयी जानकारी सिर्फ आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने और ज्ञानवर्धन के लिए है। इसका प्रयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकत्सक की सलाह अवश्य लें। 

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