परिचय
लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान : दोस्तों आज के समय में लोग अगर किसी रोग से सबसे ज्यादा परेशान है तो वह है लीवर और किडनी समस्या । एक शोध से पता चला है कि हर 5 में से 4 लोग या तो लीवर की समस्या से परेशान है या फिर किडनी की समस्या से।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इन सब समस्याओं की जड़ सिर्फ और सिर्फ हमारा गलत तरीके का खान-पान और रहन-सहन है। हालांकि आयुर्वेद के दृष्टिकोण से ये समस्याएं कोई बहुत बड़ी गंभीर समस्याएं नहीं है। इनका इलाज जड़ी-बूटियों से आसानी से किया जा सकता है।
यहां पर हम आपको जिस जड़ी- बूटी के बारे में बताने जा रहे हैं उसको “ पुनर्नवा ” के नाम से जाना जाता है। पुनर्नवा आयुर्वेद की एक ऐसी जड़ी -बूटी है जिसका प्रयोग सबसे ज्यादा लीवर और किडनी की समस्याओं के समाधान में किया जाता है।
“पुनर्नवा” दो शब्दों से मिलकर बना है “ पुनः + नवा “ जिसमे “पुनः” का मतलब “ दुबारा या फिर से “ और “नवा” का मतलब है “ नया “ अर्थात एक ऐसी जड़ी-बूटी जो हमारे शरीर का कायाकल्प करके उसको फिर से नया जीवन देकर नया बना दे।
पुनर्नवा दो प्रकार का होता है। श्वेत तथा रक्त पुनर्नवा। श्वेत तथा रक्त पुनर्नवा का निर्धारण फूल के रंग के आधार पर नही बल्कि जड़ के रंग के आधार पर किया जाता है। रक्त पुनर्नवा की जड़ लाल रंग की तथा सफेद पुनर्नवा की जड़ सफ़ेद रंग की होती है।
अधिकतर लोग फूल के रंग के आधार पर “ वर्षाभू” को ही श्वेत पुनर्नवा मानते हैं तथा बाजार में भी श्वेत पुनर्नवा के नाम पर वर्षाभू पञ्चाङ्ग तथा जड़ मिलता है। जब की श्वेत पुनर्नवा व वर्षाभू दो अलग – अलग प्रकार के पौधे हैं।
वैसे तो पुनर्नवा का उपयोग भारत में सदियों से कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है, खासकर लीवर और किडनी को प्रभावित करने वाली बीमारियों के लिए।
यहाँ पर इस विशेष जड़ी-बूटी के 60 लाभों और 4 नुकसानों के बारे में वर्णन किया गया है , जो आयुर्वेदिक उपचारों में रुचि रखने वालों के लिए एक व्यापक जानकारी देगा ।[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]

विभिन्न भाषाओँ में पुनर्नवा के नाम
वानस्पतिक नाम : बोरहाविया डिफ्यूजा (Boerhavia diffusa)
कुल : निक्टैजिनेसी
अंग्रेज़ी नाम : होगवीड
संस्कृत : कठिल्लक, शशिवाटिका, क्षुद्रवर्षाभू, दीर्घपत्र,पुनर्नवा, शोथघ्नी, विशाख, श्वेतमूला, दीर्घपत्रिका, चिराटिका, वर्षाङ्गी, वर्षाही, धनपत्र;
हिन्दी : पुनर्नवा, सांठ,गदपुरना ;
उर्दू : बाषखीरा ;
कन्नड़ : सनाडिका
गुजराती : राती साटोडी , वसेडो ;
तमिल : मुकत्तै , मुकारातै ;
तेलुगु : अतिकामामिदि ;
बंगाली : पुनर्नोबा , श्वेत पुनर्नबा ;
नेपाली : औंले साग ;
पंजाबी : खट्टन ;
मराठी : पुनर्नवा , घेंटुली ;
मलयालम : थाजूथमा , ताविलमा ।
पुनर्नवा में पाए जाने वाले रासायनिक तत्व
पुनर्नवा में एल्कलॉइड, फ्लेवोनोइड और स्टेरॉयड जैसे कई बायोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं। ये रासायनिक तत्व लीवर, किडनी और पुरे शारीरिक कार्य के लिए कई प्रकार से लाभ देते हैं।
तत्व मात्रा
विटामिन E 0.16 mg
विटामिन B1 0.24 mg
विटामिन C 0.20 mg
फेनॉल्स 0.024 mg
फ्लवोनोइड्स 0.056 mg
एल्कलॉइड्स 0.002 mg
पोटैशियम 0.427 mg
कार्बोहायड्रेट 10.56 mg
प्रोटीन 5.76 mg
फाइबर 2.4 %
वसा 1.61 mg
कैल्शियम 142 mg
आयरन 0.012 mg
मैग्नीशियम 1.429 mg
कॉपर 0.039 mg
सोडियम 162 mg

पुनर्नवा के फायदे और उपयोग
1. लीवर के लिए फायदेमंद है
पुनर्नवा लीवर की रक्षा करने वाले गुणों के लिए जाना जाता है। यह लीवर को फिर से नया करता है और हानिकारक तत्वों से बचाने में सहायता करता है।
पुनर्नवा जड़ को गोमूत्र के साथ देने से लिवर की समस्याओं से आराम मिल जाता है।
पुनर्नवा जड़ के 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ खाने से भूख बढ़ती है।
पुनर्नवा जड़ के चूर्ण को दिन में दो बार एक-एक चम्मच की मात्रा में लेने से पेट साफ होता है।[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]
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2. किडनी के लिए फायदेमंद है
यह एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक के रूप में कार्य करता है, जो पेशाब बढ़ाने में मदद करता है और किडनी से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में सहायता करता है। यह इसे गुर्दे की पथरी के उपचार और उनके बार बार बनने से रोकने के लिए एक प्रभावी जड़ी बूटी है।
10-20 मिली पुनर्नवा पञ्चाङ्ग क्वाथ को पिलाने से किडनी के विकारों को दूर करता है।
पुनर्नवा के 5-7 पत्तों को 2-3 काली मिर्च के साथ पीसकर पिलाने से पेशाब की धार और मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेशाब त्यागने में होने वाली परेशानी में आराम होता है।
5-10 मिली पुनर्नवा के पत्तों के रस को दूध में मिलाकर पिलाने से पेशाब त्यागने में होने वाली परेशानी में आराम होता है।
3 ग्राम पुनर्नवा मूल चूर्ण को शहद या गुनगुने पानी के साथ खाने से हर प्रकार के सूजन , पेशाब में जलन तथा पेशाब त्यागने में होने वाली परेशानी में आराम होता है।
3. पीलिया को ठीक करता है
जब खून में बिलीरुबिन का लेवल बढ़ता है तो पीलिया रोग बनता है। पुनर्नवा खून में बिलीरुबिन के लेवल को कम करता है, जिससे पीलिया को ठीक करने में मदद मिलती है।
यह लीवर के कार्य करने की क्षमता को दुबारा से ठीक करता है और त्वचा और आँखों के पीलेपन को रोकता है।
10-20 मिली पुनर्नवा पञ्चाङ्ग रस में हरड़ का 2-4 ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से पीलिया (कामला) में लाभ होता है।[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]
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4. शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकाले
यह जड़ी -बूटी पेशाब के माध्यम से अपशिष्ट और हानिकारक पदार्थों को समाप्त करके शरीर की सुरक्षा करती है।
यह सभी प्रकार के सांपों के जहर का एंटीडोट है। श्वेत पुनर्नवा की जड़ को पीसकर चावल को धोने से निकले पानी के साथ पीने से सर्पदंश से होने वाले विष के प्रभावों का अंत होता है।
पुनर्नवा के पत्ते और अपामार्ग की टहनियों को पीसकर बिच्छू के डंक मारने वाली जगह पर लगाने से उसके जहर का असर ख़त्म होता है।
श्वेत पुनर्नवा की जड़ तथा धतूरे के बीज के चूर्ण में तिल का चूर्ण , तिल का तेल , गाय के दूध की भाप (अर्क दुग्ध ) तथा गुड़ मिलाकर सेवन करने से कुत्ते के काटने से होने वाले प्रभावों ( रेबीज ) का अंत होता है।
सफ़ेद पुनर्नवा जड़ के चूर्ण को शहद के साथ रोजाना सेवन करने से चूहे के विष प्रभावों का अंत होता है।
5. सूजनरोधी गुण
इसके सूजनरोधी प्रभाव लीवर और किडनी में सूजन को कम करने के लिए फायदेमंद हैं। यह हेपेटाइटिस और नेफ्राइटिस जैसी परेशानियों को दूर करने में मदद करता है।
पुनर्नवा की जड़ तथा नागरमोथा को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना लें। इसे 640 मिली गाय के दूध में पकाकर सुबह और शाम पीने से गठिया के सूजन में लाभ होता है।
पुनर्नवा, नीम की छाल, परवल की पत्ती ( पटोल पत्र ) , सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारुहल्दी तथा हरड़ को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाएं, जब एक चौथाई शेष रह जाए तो इसे छानकर 20 से 30 मिली मात्रा में लेकर सुबह-शाम पीने से शरीर के सभी अंगों की सूजन , पेट के रोग, साँस के रोग तथा एनीमिया रोग में लाभ होता है।[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]
6. पेशाब मार्ग के संक्रमण (यूटीआई) को दूर करता है
पुनर्नवा का पेशाब बढ़ाने वाला गुण बैक्टीरिया को बाहर निकालकर और संक्रमण को रोककर यूटीआई के ईलाज में मदद करता हैं।
7. एडिमा को रोकता है
जब कोई किसी कारण से पेशाब को देर तक रोकता तो उसको एडिमा की शिकायत हो जाती है। इस अवस्था में पेशाब की धार को बढ़ाकर, पुनर्नवा पानी के जमाव और सूजन को कम करता है, जो एडिमा (पेशाब इकट्ठा होने के कारण सूजन) से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद है।
पुनर्नवा के 5-7 पत्तों को 2-3 काली मिर्च के साथ पीसकर पिलाने से पेशाब की धार और मात्रा बढ़ जाती है जिससे पेशाब त्यागने में होने वाली परेशानी में आराम होता है।
8. जलोदर का इलाज करता है
पेट में बहुत अधिक पानी के जमाव के कारण पेट का आकार बहुत अधिक बढ़ जाता है जिसे जलोदर रोग कहते हैं।
यह इस बात की पहचान है कि आपकें लीवर में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है और आपका लीवर ढंग से काम नहीं कर रहा है। पुनर्नवा अपने मूत्रवर्धक गुण के द्वारा इस अतिरिक्त तरल पदार्थ को कम करने में मदद करता है।
पुनर्नवा के 40-60 मिली काढ़े में 1-2 ग्राम शोरा डालकर पिलाने से जलोदर में आराम मिलता है।
9. पाचन में सुधार करता है
पुनर्नवा पाचन एंजाइमों के स्राव को बढ़ाता है जिससे आंत की कार्य क्षमता में सुधार होता है।
पुनर्नवा जड़ के 3 ग्राम चूर्ण को पीसकर शहद के साथ खाने से भोजन ठीक से पचता है जिससे भूख बढ़ती है।
[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]

10. इम्युनिटी पावर को बढ़ाता है
पुनर्नवा के अंदर एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो संक्रमण के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर इम्युनिटी पावर को मजबूत करता है।
5 ग्राम पुनर्नवा चूर्ण को रोज दूध के साथ 6 महीनें तक लगातार पीने से इम्युनिटी पावर बढ़ जाती है जिससे शरीर में ताकत (बल) की वृद्धि होती है तथा शरीर का पोषण होता है।
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11. ब्लड शुगर कम करता है
पुनर्नवा ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करके मधुमेह को ठीक करने में मदद कर सकता है।
पुनर्नवा, नीम, गिलोय, सोंठ, दारू हल्दी तथा हरड़ को समान मात्रा में मिलाकर पीसकर 1-2 ग्राम चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेने से ब्लड शुगर लेवल ठीक होने लगता हैं।
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12. वजन घटाने में सहायक
इसके मूत्रवर्धक गुण शरीर में जमा अतिरिक्त पानी को शरीर से कम करने में मदद करते हैं, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।
13. गठिया से राहत देता है
पुनर्नवा के सूजनरोधी गुण इसे गठिया के उपचार और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में प्रभावी बनाते हैं।
पुनर्नवा की जड़ तथा नागरमोथा को 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर इसका चूर्ण बना लें। इसे 640 मिली गाय के दूध में पकाकर सुबह और शाम पीने से गठिया के सूजन और दर्द में लाभ होता है।
14. बुखार कम करता है
पुनर्नवा अपने ज्वरनाशक गुणों के लिए जानी जाती है। यह बुखार के दौरान शरीर के तापमान को कम करने में मदद कर सकती है।
2 ग्राम सफ़ेद पुर्ननवा की जड़ के चूर्ण को दूध के साथ सुबह-शाम पीने से ज्वर ( बुखार ) में लाभ होता है।
लाल पुनर्नवा, परवल की पत्ती, परवल का फल, करेला, पाठा, ककोड़ा इन सब की सब्जी बुखार में लाभदायक होती है।
पुनर्नवा का काढ़ा पेशाब की जलन तथा पेशाब नली में संक्रमण के कारण होने वाले बुखार में भी तुरन्त आराम पहुँचाता है।
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15. हृदय को स्वस्थ्य करता है
पुनर्नवा में कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण होते हैं, जो हृदय को स्वस्थ बनाए रखने और ब्लूडप्रेसर को कम करने में मदद करते हैं।
हृदय रोगों में पुनर्नवा के पत्तों का साग बहुत ही लाभकारी होता है।
16. कैंसर रोधी क्षमता
पुनर्नवा में कुछ कैंसर रोधी गुण होते हैं, जो कुछ प्रकार की कैंसर कोशिकाओं के प्रसार को रोकने में सहायक होते हैं ।
17. एनीमिया के लिए फायदेमंद है
पुनर्नवा हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में सहायता करता है और हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार करता है, जिससे एनीमिया के इलाज में मदद मिलती है।
पुनर्नवादि मण्डूर को गुड़ के साथ सेवन करने से खून की कमी दूर होती है।
10-20 मिली पुनर्नवा पञ्चाङ्ग रस में हरड़ का 2-4 ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से एनीमिया में लाभ होता है।
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18. लिवर सिरोसिस से बचाता है
पुनर्नवा हमारे लीवर में नए लीवर सेल्स को बनने में मदद देकर लीवर सिरोसिस की प्रगति को रोकने में मदद करता है।
19. त्वचा के स्वास्थ्य में सुधार करता है
इसकी जडों का काढ़ा बनाकर उसमे बराबर मात्रा में अश्वगंधा का चूर्ण मिलाकर 250 mg की गोलियां बना लें। 1-1 गोली सुबह और शाम मिश्री मिला दूध के साथ पीने से शरीर की झुर्रियां दूर हो जाती हैं।
पुनर्नवा पञ्चाङ्ग के चूर्ण को दूध और मिश्री के साथ सेवन करने से चहरे की झुर्रियां दूर हो जाती हैं ।
2 ग्राम पुनर्नवा जड़ के चूर्ण को गाय के दूध के साथ सेवन करने से त्वचा का रंग साफ़ होता है।
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20. श्वसन संबंधी समस्याओं का इलाज करता है
पुनर्नवा फेफड़ों से कफ को खांसी द्वारा बाहर निकालकर फेफड़ों की सफाई का काम करता है जिससे फेफड़ों की कार्यक्षमता में सुधार होता है। और अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसी सांस की परेशानियों के इलाज में मदद करता है।
1-2 ग्राम पुनर्नवा जड़ चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री या चीनी मिलाकर दिन में दो बार खाने से सूखी खांसी से राहत मिलता है।
पुनर्नवा जड़ के 3 ग्राम चूर्ण में 5 ग्राम हल्दी मिलाकर सुबह और शाम खिलाने से दमा रोग में आराम पहुँचता है।

21. आंखों को स्वस्थ्य रखता है
इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट गुण आंखों को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं
ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करता है और आँखों की रोशनी में सुधार करता है।
बराबर मात्रा में सफ़ेद अपराजिता जड़ , सफ़ेद पुनर्नवा जड़ तथा जौ के चूर्ण से आँखों में काजल करने से आँख की सूजन (ऑप्थाल्मिया)में लाभ होता है।
पुनर्नवा जड़ को औरत के दूध में घिसकर आँखों में लगाने से आँख की सूजन (ऑप्थाल्मिया) , गुलाबी आंख (कंजंक्टिवाइटिस) जैसे रोगों में लाभ होता है।
पुनर्नवा जड़ को पानी में घिसकर लगाने से रतौंधी रोग (रात में कम दिखना) व मोतियाबिंद में लाभ होता है।
श्वेत पुनर्नवा जड़ के चूर्ण को घी और शहद में मिलाकर आँखों में लगाने से आँखों से पानी निकलना धीरे धीरे बंद हो जाता है और आंख की सूजन व लालिमा दूर होती है।।
पुनर्नवा जड़ के रस में भाङ्गरा का रस मिलाकर लगाने से गुलाबी आंख (कंजंक्टिवाइटिस) में लाभ होता है
गौमूत्र में श्वेत पुनर्नवा के जड़ का चूर्ण तथा पिप्पली चूर्ण मिलाकर आँखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग (रात में कम दिखना) में लाभ होता है।[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]
22. फैटी लीवर को ठीक करता है
यह लीवर में जमा अतिरिक्त वसा को तोड़कर फैटी लीवर को कम करने में मदद करता है।
23. पित्त को नियंत्रित करता है
पुनर्नवा पित्त के उत्पादन को सक्रिय करता है, जो पाचन और वसा के टूटने में सहायता करता है।
24. भूख बढ़ाता है
पुनर्नवा जड़ के 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ खाने से भूख बढ़ती है।
25. थकान को दूर करता है
पुनर्नवा के कायाकल्प करने वाले गुण ऊर्जा के स्तर को पुनर्जीवित करके क्रोनिक थकान से लड़ने में मदद करते हैं।
26. घावों को ठीक करता है
पुनर्नवा अपने रोगाणुरोधी और सूजन-रोधी प्रभावों के कारण घाव भरने वाले गुणों के लिए जानी जाती है।
27. प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट
पुनर्नवा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो मुक्त कणों को बेअसर करने में मदद करता है। इस प्रकार शरीर को ऑक्सीडेटिव के नुकसान से बचाता है।
28. हार्मोन को संतुलित करता है
यह हार्मोन को संतुलित करने में मदद करता है विशेष रूप से महिलाओं में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) और रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) के लक्षणों को रोकने में सहायता करता है।
29. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है
यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने में मदद करता है जबकि अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बेहतर बनाता है।
और पढ़ें : कोलेस्ट्रॉल कम करता है सहजन
30. ब्लड सर्कुलेशन के लिए फायदेमंद
पुनर्नवा लीवर और किडनी के कार्य में सुधार करके रक्त शोधन (Blood purification) को बढ़ाता है और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है।
31. कब्ज का इलाज करता है
पुनर्नवा में हल्के रेचक के गुण होते है, जो कब्ज को कम करने और सहज मल त्याग में सहायता करता है।
[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]
32. गठिया का इलाज करता है
जब शरीर में यूरिक एसिड की मात्रा बढ़ने लगती है तो गठिया रोग बन जाता है। पुनर्नवा का मूत्रवर्धक गुण यूरिक एसिड को बाहर निकालने में मदद करता है, जो गठिया के इलाज में फायदेमंद है।
33. मांसपेशियों को ताकत देता है
पुनर्नवा सूजन को कम करके और ऊतकों को पोषक तत्व प्रदान करके मांसपेशियों को ताकत देता है।
34. हेपेटाइटिस का इलाज करता है
यह जड़ी -बूटी पेशाब के माध्यम से अपशिष्ट और हानिकारक पदार्थों को समाप्त करके लीवर की सुरक्षा करती है।
पुनर्नवा लिवर को पुनर्जीवन (Regeneration) और डेटोक्सिफिकेशन (विषहरण) को बढ़ावा देकर हेपेटाइटिस से उबरने में लिवर की सहायता करता है।
35. मासिक धर्म की ऐंठन को कम करता है
इसके सूजनरोधी गुण मासिक धर्म की ऐंठन को कम करने में मदद करते हैं।
36. सिर के बालों के लिए फायदेमंद
इसके डेटोक्सिफिकेशन (विषहरण) गुण खोपड़ी में रक्त संचार को बेहतर बनाकर सिर के बालों के झड़ने से रोकते हैं और बालों को स्वस्थ्य करते हैं।
37. हड्डियों को मजबूत बनता है
यह सूजन को कम करके और आवश्यक खनिज प्रदान करके हड्डियों और जोड़ों के स्वास्थ्य का समर्थन करता है।
38. नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है
पुनर्नवा तनाव और चिंता को कम करता है जिससे बेहतर नींद अच्छी आती है।
20-40 मिली पुर्ननवा का काढ़ा पिलाने से रोगी को नींद अच्छी आती है।
39. यौन शक्ति को बढ़ाता है
पुनर्नवा जड़ के चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है और वीर्य की वृद्धि होती है ।
5 ग्राम पुनर्नवा चूर्ण को प्रतिदिन गाय के दूध के साथ 6 महीने तक लगातार पीने से बल की वृद्धि होती है तथा शरीर का पोषण होता है।
[लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान]

40. कोलाइटिस का इलाज करता है
पुनर्नवा बड़ी आंत की सूजन को कम करके कोलाइटिस को ठीक करने में मदद करता है।
पुनर्नवा, नीम की छाल, परवल की पत्ती ( पटोल पत्र ) , सोंठ, कटुकी, गिलोय, दारुहल्दी तथा हरड़ को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाएं, जब एक चौथाई शेष रह जाए तो इसे छानकर 20 से 30 मिली मात्रा में लेकर सुबह-शाम पीने से बड़ी आंत की सूजन में लाभ होता है।
41. माइग्रेन को कम करता है
पुनर्नवा लीवर और किडनी के कार्य में सुधार करके रक्त शोधन (Blood purification) को बढ़ाता है और ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करके और सूजन को कम करके माइग्रेन की आवृत्ति और गंभीरता को कम करने में मदद करता है।
पुनर्नवा के नुकसान
पुनर्नवा के कुछ नुकसान भी हैं जिनके बारे में पता होना चाहिए खासकर जब इसका गलत तरीके से या अत्यधिक मात्रा में उपयोग किया जाता है –
1. कमजोरी से चक्कर आ सकता है
पुनर्नवा का अधिक मात्रा में उपयोग करने से इसके मूत्रवर्धक गुण के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इससे इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है जिससे कमजोरी के कारण चक्कर आना और ऐंठन हो सकती है।
2. एलर्जी हो सकती है
कुछ व्यक्तियों को पुनर्नवा से एलर्जी हो सकती है, जो खुजली या लाल -लाल दाग के रूप में प्रकट होती है। इसीलिए वैद्य की देख रेख में लेना चाहिए।
3. गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कर सकता है नुकसान
पुनर्नवा को गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं को लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह गर्भाशय को उत्तेजित कर सकता है और गर्भावस्था के दौरान समस्या पैदा कर सकता है।
4. दवाओं के साथ सहभागिता
किसी भी दवा के साथ इसे मिलाने से पहले हमेशा बैद्य से सलाह लें।
लीवर और किडनी की समस्या को खत्म करने की आयुर्वेदिक दवा पुनर्नवा के फायदे और नुकसान -FAQ –
पुनर्नवा कौन-कौन सी बीमारी में काम आता है?
वैसे तो पुनर्नवा का उपयोग भारत में सदियों से कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है, खासकर लीवर और किडनी को प्रभावित करने वाली बीमारियों के लिए।
क्या पुनर्नवा के साइड इफेक्ट होते हैं?
कुछ व्यक्तियों को पुनर्नवा से एलर्जी हो सकती है, जो खुजली या लाल -लाल दाग के रूप में प्रकट होती है। इसीलिए वैद्य की देख रेख में लेना चाहिए।
पुनर्नवा गर्म है या ठंडा?
आयुर्वेद में पुनर्नवा को गर्म प्रकृति माना गया है।
पुनर्नवा में कौन सा विटामिन पाया जाता है?
विटामिन E ,विटामिन B1,विटामिन C ,फेनॉल्स, फ्लवोनोइड्स,
एल्कलॉइड्स ,पोटैशियम ,कार्बोहायड्रेट ,प्रोटीन
फाइबर ,वसा,कैल्शियम,आयरन ,मैग्नीशियम ,कॉपर ,सोडियम
चेतावनी
किसी भी जड़ी बूटी की तरह संभावित दुष्प्रभावों से बचने के लिए पुनर्नवा का सावधानी से और उचित मार्गदर्शन में उपयोग करना महत्वपूर्ण है। पुनर्नवा के 41 लाभ कुछ नुकसानों से कहीं अधिक हैं लेकिन जिम्मेदारी से उपयोग करना महत्वपूर्ण है। अपनी व्यक्तिगत ज़रूरतों के लिए सही खुराक और रूप निर्धारित करने के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें।