परिचय
नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान : दोस्तों अगर आप नींद न आना ( अनिद्रा ) , पागलपन , आंखों की परेशानी , पेशाब के रोग , गठिया , शुगर ,माहवारी ,योनि दर्द ,हिस्टीरिया ,सांस के रोग , लकवा , भ्रम रोग , घबराहट , मिर्गी ,हाथ- पैरों का कांपना जैसे रोगों से परेशान हैं तो आप लोगो को घबड़ाने की जरुरत नहीं है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आप अपनी इन समस्याओं से तगर (Indian Valerian) के प्रयोग से मुक्ति पा सकते हैं या कम कर सकते हैं।
तगर, जिसे सुगंधबाला भी कहा जाता है, एक प्राचीन जड़ी-बूटी है जो अपने सुगंधयुक्त तेल के लिए प्रसिद्ध है। इसकी लकड़ी से निकाले गए तेल का उपयोग विभिन्न प्रकार की औषधियों में होता है।
तगर के औषधीय गुणों का उपयोग आयुर्वेद में विभिन्न रोगों के उपचार में किया जाता रहा है। यह दर्द निवारक, भूख बढ़ाने वाला, सांस से संबंधी परेशानियों को ठीक करने वाला, पेशाब (मूत्र) के रोगों में लाभकारी, कफ के असंतुलन को दूर करने वाला, लिवर की सुरक्षा करने वाला, हृदय को मजबूत करने वाला होता है।
इसके अलावा, तगर का सबसे ज्यादा उपयोग नींद न आने की समस्या, तनाव और चिंता को कम करने में भी किया जाता है। तगर के इन गुणों के कारण, यह न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी एक बड़ी मांग वाली औषधि के रूप में जानी जाती है।
तगर का सुखाया हुआ तना या जड़ बाजार में सुगन्धबाला के नाम से उपलब्ध है
इसका उपयोग आयुर्वेदाचार्यों द्वारा सदियों से लोगों की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है। तगर के इन अद्भुत गुणों के कारण, यह आयुर्वेदिक अमृत के समान बन गया है।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]

अन्य भाषाओं में तगर के नाम
- वानस्पतिक नाम : वॅलेरिऐना जटामांसी (Valeriana jatamansi ), वैलेरिएनेसी (Valerianaceae)
- अंग्रेजी : इण्डियन वैलेरियन (Indian Valerian)
- हिंदी : तगर, सुगन्धबाला, मुश्क बाला
- संस्कृत : तगर, कालानुसार्य, पिण्डतगर, दण्डहस्ती, कुटिल, वक्र
- उर्दू : रिशावाला
- कन्नड़ : तगारा
- गुजराती : तगर ,गण्ठोडा
- तमिल : सदामानिगे , तकरम
- तेलगू : तगारा
- बंगाली : मुष्कवला , तगर पादुका , शुमियो
- पंजाबी : बालमुश्क , मुश्कवली
- मलयालम : तकरम
- मराठी : तगर ,गण्ठोडा , तगरमूल
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आइए अब हम जानते हैं कि तगर का औषधीय प्रयोग कैसे कर सकते हैं, औषधीय प्रयोग की मात्रा क्या होनी चाहिए और नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान क्या हैं –
तगर के फायदे
नींद ना आने की परेशानी को दूर करे तगर ( सुगन्धबाला )
नींद न आना एक आम समस्या है जिससे कई लोग परेशान होते हैं। तगर इस समस्या के लिए एक प्रभावी जड़ी-बूटी है। तगर का चूर्ण या काढ़ा नींद लाने में सहायता करता है।
यह शांतिदायक गुणों से भरपूर होता है जो मन को आराम देते हैं और अच्छी नींद की ओर ले जाते हैं।
तगर के 1 से 3 ग्राम चूर्ण का सेवन या 30 से 40 मिलीलीटर काढ़ा पीने से नींद न आने की समस्या में लाभ होता है। यह नींद की गुणवत्ता को बढ़ाता है और रात में अच्छी नींद लाता है।
इसके अलावा, तगर का उपयोग तनाव, चिंता, और अन्य मानसिक विकारों में भी लाभकारी होता है। यह न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी संतुलित करने में मदद करता है। तगर का सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना उचित होता है।
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दिमागी बीमारी में तगर के लाभ
मानसिक स्वास्थ्य के विकार, जिन्हें सामान्य भाषा में दिमागी बीमारी ( पागलपन ) कहा जाता है, इसमें सोचने, महसूस करने और व्यवहार करने की क्षमता प्रभावित हो जाती हैं।
इनमें अनेक प्रकार की लक्षण होते हैं, जैसे कि चिंता, अवसाद, बायपोलर डिसऑर्डर और शिज़ोफ्रेनिया । आयुर्वेद में, तगर का उपयोग इन विकारों के उपचार में किया जाता है।
तगर के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार प्रयोग करना चाहिए जिससे मानसिक संतुलन ठीक हो सके ।
500 मिलीग्राम तगर के चूर्ण का सेवन शहद के साथ करने से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में सुधार हो सकता है और यह दिमागी बीमारी के लक्षणों को भी कम कर सकता है।
यह बहुत जरुरी है कि ऐसे उपचार को आयुर्वेदिक चिकित्सक की देखरेख में ही किया जाए। आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ, मानसिक स्वास्थ्य के लिए आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की सलाह और उपचार भी अत्यंत जरुरी हैं।
तगर के उपयोग से पहले एक योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना और उनकी सलाह का पालन करना जरुरी है।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]

गले के रोग में फायदेमंद तगर का प्रयोग
1 ग्राम तगर के चूर्ण में 65 मिग्रा यशद भस्म मिलाकर लेने से गले के रोगों में लाभ होता है।
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आंखों की बीमारी में तगर का उपयोग है फायदेमंद
आंखों के दर्द और अन्य रोगों में तगर का प्रयोग किया जाता है। तगर के पत्तों को पीसकर लेप बनाया जाता है और आंखों के चारों ओर लगाया जाता है जिससे आंखों के दर्द में राहत मिलता है।
इसी तरह, तगर को हरीतकी (हरड़) के रस में पीसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से भी आंखों के रोगों में लाभ होता है।
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तगर के प्रयोग से मूत्र रोग का इलाज
पेशाब से सम्बंधित बिमारियों में 1-2 ग्राम तगर के चूर्ण को चीनी के साथ मिलाकर प्रयोग करने से फायदा होता है।
मासिक धर्म विकार में करें तगर का प्रयोग
मासिक धर्म की अनियमितता और ल्यूकोरिया जैसी परेशानियाँ महिलाओं के लिए समस्या का कारण बन सकते हैं। आयुर्वेद में, तगर का उपयोग इन समस्याओं के प्राकृतिक उपचार के रूप में किया जाता है।
तगर के चूर्ण या काढ़े का रोज प्रयोग करने से मासिक चक्र को संतुलित किया जा सकता है और ल्यूकोरिया के लक्षणों को भी कम किया जा सकता है।
तगर के 1 से 3 ग्राम चूर्ण या 30 से 40 मिलीलीटर काढ़ा, जब नियमित रूप से लिया जाता है, तो यह मासिक धर्म के चक्र को ठीक कर देता है और स्त्री रोग संबंधी अन्य समस्याओं को भी दूर करने में सहायता मिलती है।
तगर का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित होता है।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]

योनि रोग (योनी का दर्द) में फायदा पहुंचाता है तगर
तगर, बड़ी कटेरी, सेंधा नमक, और देवदारु का काढ़ा बनाकर, उसमें तिल का तेल मिलाने और पकाने से एक विशेष तेल तैयार होता है। इस तेल को रूई के फाहे में भिगोकर योनि के दर्द में लगाने से राहत मिलती है।
यह प्राचीन विधि योनि संबंधी दर्द और सूजन को कम करने में सहायक मानी जाती है।
किसी भी औषधीय उपचार को आरंभ करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
डायबिटीज में फायदेमंद तगर का सेवन
तगर के 1-3 ग्राम चूर्ण या 30-40 मिली काढ़ा प्रयोग करने से मधुमेह में भी लाभ मिलता है।
गठिया में लाभ पहुंचाता है तगर
गठिया और जोड़ों के दर्द जैसी समस्याएं अक्सर लोगों को परेशान करती हैं। आयुर्वेद में, तगर के चूर्ण और यशद भस्म का मिश्रण इन रोगों में लाभकारी माना जाता है।
1 ग्राम तगर के चूर्ण में 65 मिलीग्राम यशद भस्म मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है।
इसी तरह, तगर की जड़ की छाल को पीसकर छाछ के साथ पीने से भी गठिया के दर्द में फायदा होता है। ये दोनों विधियां प्राकृतिक और पारंपरिक उपचार के रूप में सदियों से प्रयोग की जा रही हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
घाव को सुखाने के लिए करें तगर का इस्तेमाल
पुराने घावों और फोड़ों पर तगर को पीसकर लगाने से घाव जल्दी भर जाता है और बढ़ता नहीं है।

तगर से हिस्टीरिया में फायदा
हिस्टीरिया, जो एक मानसिक विकार है, उसमें तगर का उपयोग आयुर्वेद में सुझाया जाता है। तगर का काढ़ा बनाकर उसे 15-20 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से इस विकार में लाभ होता है।
इसी प्रकार, 500 मिलीग्राम तगर के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भी हिस्टीरिया के लक्षणों में कमी आती है। यह उपचार विधि मानसिक शांति प्रदान करने और तनाव को कम करने में सहायक होती है।
किसी भी औषधीय उपचार को आरंभ करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
प्रलाप (डलीरियम) रोग में तगर के इस्तेमाल से लाभ
प्रलाप, जिसे आमतौर पर डिलीरियम कहा जाता है, एक मानसिक विकार है जिसमें व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने आस-पास की घटनाओं को सही ढंग से समझ नहीं पाता और मानसिक उलझनों में फंस जाता है।
आयुर्वेद में, तगर का उपयोग इस तरह के मानसिक विकारों में लाभकारी माना जाता है।
तगर के साथ अश्वगंधा, पित्तपापड़ा, शंखपुष्पी, देवदारु, कुटकी, ब्राह्मी, निर्गुण्डी, नागरमोथा, अमलतास, छोटी हरड़, और मुनक्का को बराबर मात्रा में लेकर कूटकर काढ़ा बनाया जाता है।
इस काढ़े को 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से प्रलाप या डिलीरियम में लाभ हो सकता है। यह उपचार विधि मानसिक संतुलन और शांति प्रदान करने में सहायक होती है।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
तंत्रिकातंत्र विकार में तगर का प्रयोग फायदेमंद
तगर की जड़ का उपयोग आयुर्वेद में तंत्रिका तंत्र संबंधी विकारों और नसों की कमजोरी के उपचार में किया जाता है। तगर की जड़ को कूटकर, उसमें चार भाग पानी और समान मात्रा में तिल का तेल मिलाकर धीमी आँच पर पकाते है।
जब केवल तेल शेष रह जाये तो इस तेल को छानकर रखने के बाद, इसका प्रयोग नसों की कमजोरी और तंत्रिका तंत्र से जुड़े रोगों में लाभकारी होता है।
इसके अलावा, काली मिर्च, तगर, सोंठ और नागकेसर को पीसकर बनाया गया लेप भी इन रोगों में फायदेमंद होता है। यह लेप त्वचा पर लगाने से दर्द और सूजन में राहत मिलती है।

लकवा में तगर का सेवन लाभदायक
लकवा, जिसे पैरालिसिस के नाम से भी जाना जाता है, एक गंभीर स्थिति है जिसमें शरीर के किसी हिस्से में संवेदना और गतिशीलता का नुकसान होता है।
आयुर्वेद में, तगर के चूर्ण को यशद भस्म के साथ मिलाकर देने लकवा में लाभकारी माना जाता है। 1 ग्राम तगर के चूर्ण में 65 मिलीग्राम यशद भस्म मिलाकर देने से नसों की कमजोरी और तंत्रिका तंत्र के विकारों में सुधार हो सकता है।
यह उपचार विधि शरीर के उन हिस्सों में रक्त संचार और ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए की जाती है जो लकवा के कारण प्रभावित होते हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
ह्रदय रोग में तगर का प्रयोग
आयुर्वेद में तगर को उसके शांतिदायक और ह्रदय को बल प्रदान करने वाले गुणों के लिए सराहा गया है। इसका उपयोग ह्रदय की शक्ति बढ़ाने में किया जाता है।
तगर की 2 से 3 ग्राम की मात्रा को एक गिलास पानी के साथ उबाल कर उसका काढ़ा बनाकर नियमित रूप से सेवन करने से ह्रदय की शक्ति में वृद्धि होती है और यह ह्रदय को शक्ति प्रदान करता है।
यह नसों की शक्ति में भी वृद्धि करता है, जिससे ह्रदय संबंधी विकारों में लाभ होता है। हालांकि, इससे अधिक मात्रा में इसका सेवन हानिकारक भी हो सकता है, इसलिए इसका सेवन संयमित मात्रा में और विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।
भ्रम रोग को दूर करे तगर
तगर, जिसे सुगंधबाला भी कहते हैं, एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो मनोविकारों और विशेष रूप से भ्रम रोग में उपयोगी मानी जाती है। भ्रम रोग में व्यक्ति वास्तविकता और कल्पना के बीच का अंतर नहीं समझ पाता और अवास्तविक विचारों या धारणाओं पर दृढ़ विश्वास कर बैठता है।
तगर के शांतिदायक गुण इसे मानसिक शांति प्रदान करने और भ्रम की स्थिति को कम करने में सहायक बनाते हैं। इसके लिए 500 मिलीग्राम तगर के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भ्रम रोग के लक्षणों में कमी आती है।
इसके उपयोग से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है, क्योंकि अनुचित मात्रा में सेवन से दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]

बेचैनी या घबराहट में प्रयोग करें तगर
तगर एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग बेचैनी और घबराहट को दूर करने में किया जाता है। इसके शांतिदायक गुण तंत्रिका तंत्र पर एक सुखदायक प्रभाव डालते हैं, जिससे मन को शांति मिलती है और घबराहट कम होती है ।
तगर का 500 मिलीग्राम चूर्ण शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक अशांति और बेचैनी में राहत मिलती है।
पैरों में होने वाले ऐंठन में लाभ पहुँचाये तगर
तगर, जिसे वैलेरियन के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग पैरों में होने वाले ऐंठन के उपचार में किया जाता है।
यह जड़ी-बूटी अपने दर्द निवारक गुणों के लिए प्रसिद्ध है, जो तंत्रिका तंत्र पर एक सकारात्मक प्रभाव डालते हैं और ऐंठन को कम करने में सहायक होते हैं ।
पैरों की ऐंठन अक्सर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, निर्जलीकरण या मांसपेशियों में अत्यधिक तनाव के कारण होती है। तगर का सेवन करने से मांसपेशियों को आराम मिलता है और ऐंठन की समस्या में कमी आती है।
इसके लिए 150 मिलीग्राम तगर को शहद के साथ दिन में दो बार लेने की सलाह वैद्य के द्वारा दी जाती है।
आयुर्वेद में तगर का उपयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है, जैसे कि चूर्ण, काढ़ा, या अर्क के रूप में। इसे उचित मात्रा में और आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से लेना चाहिए, क्योंकि अनुचित मात्रा में सेवन से दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
बेहोशी की स्थिति में प्रयोग करायें तगर
तगर आयुर्वेद में एक प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है जिसका उपयोग बेहोशी की स्थिति में भी किया जाता है। इसके अवसादक और शांतिदायक गुण तंत्रिका तंत्र पर एक सकारात्मक प्रभाव डालते हैं, जिससे चेतना की स्थिति में सुधार हो होता है।
तगर का उपयोग विशेष रूप से उन रोगियों में किया जाता है जो बेहोशी या अचेतन अवस्था में होते हैं, ताकि उन्हें चेतना प्रदान की जा सके।
इसके लिए तगर की जड़ों का चूर्ण या इसके तेल का प्रयोग बेहोशी की स्थिति में लाभकारी होता है।
इसके तेल की दो से चार बूंद को खाने वाले गोद में मिलाकर दालचीनी के काढ़े के साथ दिन में दो बार सेवन करने से लाभ मिलता है।
इसके तेल की मालिश से भी रोगी को होश में लाने में मदद मिलती है।
तगर के इस्तेमाल से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और यह तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है, जिससे बेहोशी की स्थिति में सुधार हो जाता है।
मिर्गी रोग में फायदा पहुंचाए तगर
तगर एक प्राचीन जड़ी-बूटी है जो मिर्गी रोग में लाभकारी मानी जाती है। मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है जिसमें रोगी को अचानक दौरे पड़ते हैं।
तगर के अंदर एंटीकॉन्वेलसेंट गुण होता है जो इसे मिर्गी के उपचार में उपयोगी बनता हैं। यह तंत्रिका तंत्र को स्थिर करने और दौरों की आवृत्ति को कम करने में मदद कर सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, तगर की जड़ का चूर्ण या इसके तेल का उपयोग मिर्गी के रोगियों के लिए किया जाता है। इसके तेल की दो से चार बूंद को खाने वाले गोद में मिलाकर दालचीनी के काढ़े के साथ दिन में दो बार सेवन करने से लाभ मिलता है।
इसका नियमित रूप से उपयोग करने से मिर्गी के दौरे कम हो सकते हैं और रोगी की सामान्य स्थिति में सुधार हो सकता है।
हालांकि, तगर का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसकी अनुचित मात्रा या गलत तरीके से उपयोग से स्वस्थ्य को नुकसान भी हो सकते हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
शरीर का कांपना ( कम्पवात रोग ) में प्रयोग करें तगर
तगर कम्पवात रोग या शरीर के कांपने की स्थिति में उपयोगी होता है। कम्पवात रोग में व्यक्ति के शरीर के कुछ हिस्से अनियंत्रित रूप से कांपते हैं, जिससे उन्हें रोज के काम करने में कठिनाई होती है।
तगर के शांतिदायक और नसों को आराम देने वाले गुण इसे इस रोग में लाभकारी बनाते हैं। यह जड़ी-बूटी तंत्रिका तंत्र को स्थिर करने और मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने में मदद करती है।
आयुर्वेद में तगर का चूर्ण या इसके तेल का प्रयोग कम्पवात रोग में सुझाया जाता है। इसका सेवन या इसके तेल की मालिश से रोगी को आराम मिल सकता है।
चिकित्सक के परामर्श के अनुसार यदि तगर की जड़ की 400 मिलीग्राम से 500 मिलीग्राम चूर्ण की मात्रा को यशद भस्म ( जिंक का भस्म ) के साथ दिन में दो बार प्रयोग में लाया जाए तो लाभदायक सिद्ध होता है।
तगर का उपयोग करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इसकी अनुचित मात्रा या गलत तरीके से उपयोग से दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।[नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान ]
तगर के इस्तेमाल की मात्रा
तगर का चूर्ण – 1-3 ग्राम
तगर का काढ़ा – 15-30 मिली
इसके अतिरिक्त चिकित्सक के परामर्श के अनुसार
तगर के उपयोगी भाग
जड़
कन्द
तगर के नुकसान
इसको अत्यधिक या सही मात्रा में न लेने से निम्न परेशानियां होती है –
पेट में दर्द
चक्कर आना
सीने में जलन
जी मचलना
उल्टी होना
शरीर पर खुजली या लाल चकत्ते होना
नींद न आने की समस्या को दूर करने की दवा तगर के फायदे और नुकसान -FAQ –
तगर के क्या नुकसान हैं ?
तगर अनेक लाभ होते हैं, परंतु अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से नुकसान भी हो सकते हैं। इसके अधिक सेवन से पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेष रूप से, गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। तगर का सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।
तगर की तासीर कैसी होती है ?
तगर की तासीर ठंडी मानी जाती है। यह शरीर को शांति प्रदान करता है और तनाव को कम करने में सहायक होता है। इसका उपयोग नींद न आने, चिंता, और अन्य मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं के लिए किया जाता है। तगर शरीर और मन को आराम देने वाला एक प्राकृतिक उपचार है।
तगर गांठ के क्या फायदे हैं ?
तगर गांठ के अनेक लाभ हैं, जैसे कि नींद न आने की समस्या में लाभ, तनाव और चिंता को कम करना, मूत्र विकारों का उपचार, और आंखों की रोशनी बढ़ाने में सहायक। तगर गांठ का उपयोग श्वसनतंत्र विकार, कफ विकार, लिवर और हृदय संबंधी समस्याओं में भी किया जाता है1। यह शरीर को आराम देने और मानसिक शांति प्रदान करने में भी उपयोगी है।
चेतावनी
इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी केवल ज्ञानवर्धन और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता के लिए है। किसी भी प्रकार से इसका सेवन करने से पहले आयुर्वेदिक चिकित्सक के परामर्श जरुरी है।