आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान : वैसे तो एक उम्र के बाद आंख की रोशनी का कम होना एक आम समस्या है। लेकिन जिस तरीके का आज का परिवेश है और हमारी जीवन शैली है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!उसमें कम उम्र में ही आंखों की रोशनी का कम होना एक बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आ रही है। इस समस्या के कारण के पीछे अगर हम जाएं तो यह पाएंगे कि हमारे द्वारा जंक फूड का ज्यादा सेवन करना ,अपने खान-पान में सही डाईट का प्रयोग न करना और गैजेट्स का ज्यादा इस्तेमाल करना इसके प्रमुख कारण है।
जिसकी वजह से आंखों की रोशनी जाना एक आम समस्या बनकर उभर रही है। अगर आंखों की रोशनी बढ़ाने की बात की जाए तो पश्चिमी चिकित्सा पद्धति में इसका एक ही उपाय है कि हमारे आंखों पर चश्मा लगा दिया जाए।
लेकिन अगर भारतीय चिकित्सा पद्धति का प्रयोग किया जाए तो बहुत सारी ऐसी जड़ी-बूटियाँ हैं जिनके प्रयोग से प्राकृतिक तरीके से आंख की रोशनी को दोबारा से बढ़ाया जा सकता है। जिसमें से एक औषधि का नाम है नीम।
नीम के बारे में बहुत से लोगों की धारणा होती है कि यह दांतों के लिए प्रयोग की जाती है या फिर शुगर में इसका प्रयोग किया जाता है।
लेकिन ऐसा नहीं है इसके अलावा भी नीम के बहुत सारे ऐसे प्रयोग हैं जिसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। और अगर है भी तो उसकी अधूरी जानकारी है।
तो यहां पर हम आपको नीम के उन सभी गुण और प्रयोग के बारे में बताएंगे जो केवल दांत के रोग और शुगर के रोग से ही संबंधित नहीं होगी। बल्कि उसके बहुत सारे रोगों में प्रयोग होने के बारे में हम यहां वर्णन करने जा रहे हैं।
जिसमें मुख्य रूप से हम यहां आंखों की रोशनी बढ़ाने के प्रयोग के बारे में भी बताएंगे। आप इस लेखक को ध्यानपूर्वक अच्छे से पढ़ें और इसका सही तरीके से एक चिकित्सक की देखरेख में प्रयोग करें तो आपको निश्चित ही लाभ होने की संभावना अधिक रहेगी।
नीम की तीन प्रजातियां होती हैं जिसमें पहले प्रजाति कड़वी नीम , दूसरी मीठी नीम (कड़ी पत्ता ) और तीसरी प्रजाति होती है महानीम ( आमतौर पर बकायन भी बोला जाता है) .
हम यहां पर जिस नीम का वर्णन करने जा रहे हैं वह कड़वी नियम है। यह भारत में लगभग सभी जगह पाई जाती है। इसका पेड़ काफी बड़ा होता है लगभग 15 से 20 मीटर तक ऊंचा हो जाता है।
[ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]

अन्य भाषाओं में नीम के नाम
वानस्पतिक नाम : एजाडिरैक्टा इण्डिका (Azadirachta indica)
- हिंदी(Hindi) – नीम, निम्ब
- अंग्रेजी(English) – मार्गोसा ट्री (Margosa tree), नीम (Neem)
- संस्कृत(Sanskrit) – निम्ब, पिचुमर्द, पिचुमन्द, तिक्तक, अरिष्ट, हिङ्गुनिर्यास, सर्वतोभद्र, मालक, अर्कपादप, छर्दन, हिजु, काकुल, निम्बक, प्रभद्र, पूकमालक, पीतसारक, गजभद्रक, सुमना, सुभद्र, शुकप्रिय, शीर्षपर्ण, शीत, धमन, अग्निधमन
- उड़िया(Oriya) – नीमो (Nimo), निम्ब (Nimb)
- उर्दू(Urdu) – नीम (Neem)
- कन्नड़(Kannada) – निम्ब (Nimb), बेवू (Bevu)
- गुजराती(Gujarati) – लिम्बा(Limba), कोहुम्बा (Kohumba)
- तेलुगू(Telugu) – वेमू (Vemu), वेपा (Vepa)
- तमिल(Tamil) – बेम्मू (Bemmu), वेप्पु (Veppu)
- बंगाली(Bangali) – निम (Nim), निमगाछ (Nimgachh)
- पंजाबी(Punjabi) – निम्ब (Nimb), निप (Nip), बकम (Bakam)
- मराठी(Marathi) – बलन्तनिंब (Balantnimba)
- मलयालम(Malayalam) – वेप्पु (Veppu), निम्बम (Nimbam)
नीम के औषधीय उपयोग
नीम एक औषधीय जड़ी-बूटी है, जिसका भारत में हजारों सालों से उपयोग किया जाता है। नीम के पेड़ के सभी हिस्सों में 130 से अधिक जैविक रूप से सक्रिय यौगिक होते हैं,
जो इसे एक बहुमुखी प्राकृतिक उत्पाद बनाते हैं। नीम के निम्नलिखित विशेष उपयोग हैं:
- दांत और मसूड़ों को स्वस्थ रखने के लिए: सुबह उठकर नीम की दातुन से दांत मजबूत और साफ करें और नीम के फूलों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करें। इससे दांत और मसूड़ों में बैक्टीरिया और संक्रमण नहीं होते हैं।
- शरीर को ताजगी देने के लिए: दोपहर को नीम के पेड़ की ठंडी छाया में आराम करें। इससे शरीर को शांति और शीतलता मिलती है।
- मच्छरों से बचने के लिए: शाम को नीम की सूखी पत्तियां जलाकर धुआं करें। इससे मच्छर दूर भाग जाते हैं। नीम में मौजूद तेल और अन्य यौगिक मच्छरों को नष्ट करने वाले होते हैं।
- पाचन को सुधारने के लिए: नीम की कोमल कोंपलें चबाकर खाएं। इससे पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और कब्ज दूर होते हैं। नीम में मौजूद तन्निन और अन्य यौगिक पाचन क्रिया को बढ़ावा देते हैं।
- अनाज को सुरक्षित रखने के लिए: नीम की सूखी पत्तियां अनाज के साथ रखें। इससे अनाज में कीड़े नहीं लगते हैं। नीम के पत्तों में मौजूद निम्बिन और अन्य यौगिक कीड़ों को मारने वाले होते हैं।
- त्वचा रोगों से छुटकारा पाने के लिए: नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से स्नान करें। इससे त्वचा के रोग, फोड़े-फुंसी, खुजली, एलर्जी, दाद-खाज आदि दूर होते हैं। नीम में मौजूद निम्बिडीन और अन्य यौगिक त्वचा के लिए वरदान होते हैं। सिर से नीम के पानी से स्नान करने से बालों में जुएं और रूसी नहीं होती हैं।[आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
- चेहरे को निखारने के लिए: नीम की जड़ को पानी में घिसकर उसका लेप बनाकर चेहरे पर लगाएं। इससे चेहरे के कील-मुंहासे, दाग-धब्बे, झाइयां आदि दूर होते हैं और चेहरा गोरा और सुंदर होता है। नीम में मौजूद क्वेरसेटिन और अन्य यौगिक चेहरे को निखारने वाले होते हैं। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
नीम के उपयोग और फायदे
ग्रंथो में इस बात का विशेष रूप से वर्णन किया गया है कि अगर 15 मार्च से 15 मई के बीच नीम के नए पत्तों को खाया जाता है
तो खून साफ हो जाता है ,चर्म रोग या बुखार इस तरीके का कोई रोग नहीं होता है। और यह हमें साल भर तक प्रोटेक्ट करता है।
नीम का प्रयोग आँखोंं के रोगों के लिए फायदा देगा अगर
प्रयोग 1 .
थोड़ा सरसों का तेल ले और उसके अंदर नीम के पत्तों की 50 ग्राम मात्रा को लेकर उसकी चटनी बना ले और उसको उसे सरसों के तेल में पकाएं।
जब वह पूरा जलकर काला हो जाए तब उसके अंदर उस मात्रा का दसवां भाग कपूर और कलमी शोरा मिला ले। और उसको अच्छे से खूब फेंट कर एक गाढ़ा पेस्ट बना ले।
फिर उसे पेस्ट को ठंडा कर कांच की सीसी में भरकर रख ले और रात को सोते समय इसका आंख में काजल की तरह प्रयोग करें।
इससे आंख की रोशनी बढ़ने लगती है। और आंखों में होने वाली खुजली या जलन या आंखों का लाल होना इस तरह की समस्या भी दूर हो जाती है। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग 2 .
नीम के पत्तों का प्रयोग करके हम प्राकृतिक सुरमा भी बना सकते हैं।
इसके लिए हमें पहले 20 ग्राम मिश्री , 6 छोटी इलायची , 6 लौंग , 20 ग्राम जस्ता भस्म और 20 नीम की नई कोपल लेना है।
इनको खूब अच्छे से कूट पीसकर बारीक से भी बारीक चूर्ण बना लेना है और एक महीन कपड़े की सहायता से इनको छान लेना है।
इस चूर्ण को कांच की शीशी में भरकर रख लेना है और इसका प्रयोग सुबह और शाम आंखों में करना है।
इससे हमारे आंख की रोशनी बढ़ने लगती है और आंख की सभी प्रकार की समस्या भी खत्म होने लगती है।
प्रयोग 3 .
नीम के पत्तों का प्रयोग करके प्राकृतिक काजल भी बनाया जाता है।
इसके लिए सबसे पहले 10 ग्राम शुद्ध सफेद रुई लेकर उसको फैला लिया जाता है। और उसके ऊपर नीम के लगभग 20 सूखे हुए पत्तों को बिछाकर 1 ग्राम कपूर को पीसकर उसे पत्तों के ऊपर छिड़क कर रुई को लपेटकर एक बत्ती बना लेते हैं।
फिर इस बत्ती को गाय के घी में भिगोया जाता है। यहां पर यह ध्यान देना है कि गाय का घी 10 ग्राम की मात्रा में लेना है।
फिर इस बत्ती को हमें जला देना है। जलाने के बाद जो राख बचती है उसको अच्छे से हाथों से मसल कर या किसी लकड़ी की सहायता से रगड़कर एक पेस्ट सा बना लेते हैं।
फिर उसको किसी बर्तन में रख लेते हैं। और उसका प्रयोग आंखों में काजल की तरह करते हैं।
इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और आंखों में यदि लालपन की शिकायत रहती है या आंखों से पानी गिरता है तो वह समस्या भी दूर हो जाती है। यह काजल इतना गुणकारी होता है कि यह इसका प्रयोग बच्चों में भी किया जाता है।[ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग ४.
अगर आंखों में मोतियाबिंद की शिकायत हो गई हो तो। नीम के बीज की मींगी का चूर्ण बना लें। और उसको सुबह-शाम आंखों में काजल की तरह लगाते हैं तो इससे मोतियाबिंद कट जाती है।
प्रयोग ५.
नीम के फूल ले लें और उसको छाया में सुखा लें। अब उसका वजन करके देखें कि कितनी मात्रा है। उतनी ही मात्रा में कलमी शोरा मिलाकर उसको खूब अच्छे से कूट पीसकर एक महीन कपड़े की सहायता से छाने।
अब उस चूर्ण को आंखों में काजल की तरह प्रयोग में लें। इससे आंखों की रोशनी बढ़ने लगती है और मोतियाबिंद भी कट जाता है।
इसके अलावा यदि आंखों में धुंध या जाला लगने की शिकायत है तो वह भी दूर हो जाती है।
प्रयोग ६.
अगर आंखों में दर्द हो रहा हो तो नीम के कोमल पत्तों को ले ले। और उसका रस निकाले और उस रस को गुनगुना करके दो-दो बूंद कान में टपकाएं।
तो इससे आंख के दर्द में राहत मिलती है। यदि किसी एक आंख में दर्द हो रहा हो तो उसके विपरीत वाले कान में नीम के पत्ते के रस को गुनगुना कर 2 बूँद टपकाएं तो उस आंख के दर्द में आराम हो जाएगा। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग ७.
नीम के कच्चे फल को अगर तोड़ेंगे तो आप देखेंगे कि उसे थोड़ा सा दूध निकलता है। वह निकलने वाला दूध अत्यंत ही गुणकारी होता है।
अगर किसी को रतौंधी की शिकायत हो गई है तो उस दूध को आंख में काजल की तरह प्रयोग करें। निश्चित ही उससे लाभ मिल जाएगा।
प्रयोग ८.
अगर आंखों में जलन और खुजली हो रही हो तो उसके लिए लगभग आधा किलो नीम के पत्तों को किसी मिट्टी के बर्तन में अर्थात मिट्टी के छोटे से मटके में रखकर उसका मुंह बंद करके आग में रख दें।
अब उसको पकने दे। इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना है कि उस मटके का मुंह अर्थात मिट्टी के बर्तन का मुंह अच्छी तरीके से बंद किया गया हो।
जब मिट्टी के बर्तन के अंदर रखा हुआ नीम का पत्ता जलकर पूरी तरीके से राख हो जाए। तब उस बर्तन को आग से हटा लें।
फिर उसे ठंडा होने दे। अब उस राख को अच्छी तरीके से कूट पीसकर खूब बारीक चूर्ण बना ले और उसे कपड़े से छान कर किसी कांच के बर्तन में अच्छी तरीके से सुरक्षित रख लें।
उसका प्रयोग आंख में काजल की तरह करें। आपकी आंख में होने वाली जलन या खुजली ,कुछ भी हो रहा हो उसमें निश्चित ही लाभ मिलने लगेगा।

नीम के प्रयोग से पीलिया में राहत पायें
प्रयोग 1 .
अगर पीलिया रोग से पीड़ित है तो उसके लिए आप 5-6 नीम के कोमल पत्ते ले ले और उसको पीसकर उसकी चटनी बना दें।
अब उस चटनी को शहद के साथ में उपयोग करीये। इससे पीलिया में राहत मिलेगी और इसके अलावा पेशाब से संबंधित कोई समस्या है या पेट से संबंधित कोई समस्या है तो उसमें भी राहत मिलती है। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग २.
अगर 10 ग्राम शहद के साथ 10 ml नीम के पत्ते के रस को 5-6 दिन तक लगातार प्रयोग में लिया जाए तो पीलिया में बहुत लाभ मिलता है।
प्रयोग 3.
6 ग्राम गिलोय पत्ता, 6 ग्राम नीम पत्ता ,6 ग्राम द्रोण पुष्पी पत्ता ,और 6 ग्राम छोटी हरड़ ,इन सबको एक साथ लेकर खूब अच्छे से कूट पीसकर चूर्ण बना ले।
अब इस चूर्ण को 200 ml पानी के साथ पकाएं। जब पानी की मात्रा 50 ml के आसपास शेष रह जाए ,तब इसको छान कर ठंडा कर लें।
अब इसके अंदर 10 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह और शाम के समय प्रयोग करें। इससे पीलिया में विशेष लाभ मिलता है।
इस औषधि का प्रयोग करने से पहले इस बात का ध्यान देना है कि 200 मिलीग्राम शिलाजीत को 6 ग्राम शहद के साथ चाट लेना है।
प्रयोग ४.
नीम के जड़ की छाल ,तने की छाल ,फूल ,पत्ती और उसके फल को एक साथ लेकर उसका महीन चूर्ण बना लें अर्थात नीम के पंचांग का महीन चूर्ण बना लो।
अब इस चारो को 5 ग्राम घी और 10 ग्राम शहद के साथ मिलाकर प्रयोग में लाएं। ऐसा करने से पीलिया तो ठीक होता ही है ,इससे शरीर में खून की कमी भी दूर होती है।
जो लोग शहद और घी के साथ इसका प्रयोग नहीं करना चाहते हैं वह पानी के साथ अथवा गाय के दूध के साथ भी इसको ले सकते हैं। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग ५.
6 ग्राम पुनर्नवा की जड़ के साथ 6 ग्राम नीम के पत्तों की सीक को पानी के साथ खरड़ में पीस लें और फिर इसको छाने।
अब इसको कुछ दिनों तक लगातार रोगी को पिलाते रहते हैं तो उसका पीलिया ठीक हो जाता है।
प्रयोग ६.
20 ml नीम के पत्ते के रस में लगभग 5 ग्राम चीनी मिलाकर उसको थोड़ा सा गर्म कर ले। अब इसको सुबह-सुबह खाली पेट दिन में एक बार सेवन करते हैं तो पीलिया में राहत मिलती है।

प्राकृतिक गर्भ-निरोधक की तरह नीम का उपयोग
प्रयोग १.
रुई की सहायता से शुद्ध नीम के तेल को योनि के अंदर सहवास से पहले लगा ले। उसके बाद सहवास करें तो गर्भ नहीं ठहरेगा।
प्रयोग २.
250 ml पानी में 10 ग्राम नीम के गोंद को अच्छी तरीके से मिलकर एक घोल तैयार कर लें।
अब इस घोल में आधा मीटर लंबे और आधा मीटर चौड़े सूती कपड़े को लेकर भिगो दें। फिर इसको छाया में सुखा लें।
अब जब यह कपड़ा सूख जाए तो उसके छोटे-छोटे टुकड़े काट ले और इसको एक सीसी में भरकर रख ले।
जब भी सहवास करना हो तो उससे एक घंटा पहले योनी के अंदर कपड़े के एक टुकड़े को रख ले और उसको फिर निकल कर फेंक दें। उसके बाद सहवास करने से गर्भ नहीं ठहरेगा। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
योनि का दर्द (इंफेक्शन के कारण ) को ठीक करता है नीम
अरंडी के बीच की गिरी और नीम के बीज की गिरी को लेकर नीम के पत्ते के रस में बराबर मात्रा में लेकर पीसकर मिला लें।
अब इसके अंदर रुई की बत्ती को भिगोकर योनि के अंदर डालने से इन्फेक्शन के कारण होने वाले योनि का दर्द ठीक हो लगता है।
मासिक धर्म विकार में लाभदायक नीम का सेवन
20 ग्राम नीम की छाल का दरदरा पाउडर ,6 ग्राम ढाक के बीज , 6 ग्राम गाजर के बीज ,20 ग्राम काला तिल और 20 ग्राम गुड़ लें और इसके अंदर 300 ml पानी मिलाकर मिट्टी के बर्तन में रखकर पकाए।
जब 100 ml पानी शेष रह जाए तो उसको छानकर अलग रख ले। यह काढ़ा प्रतिदिन बनाएं और 7 दिन तक पिलाएं।
इससे मासिक धर्म में होने वाली हर प्रकार की समस्या समाप्त हो जाती है। इसके अंदर इस बात का विशेष सावधानी रखना है कि इस काढ़े को गर्भवती स्त्रियों को नहीं देना है।

प्रसव के बाद होने वाले रोग में नीम का प्रयोग है फायदेमंद
प्रयोग १.
प्रसव के बाद महिलाएं कई रोगों से पीड़ित हो जाती हैं। इसको दूर करने के लिए नीम का प्रयोग अत्यंत लाभकारी है।
इसके लिए 6 ग्राम नीम की छाल को पीसकर उसमें पानी मिला लेते हैं और उसके अंदर 20 ग्राम गाय का शुद्ध की भी मिल लेते हैं और कांजी ( पानी, काली गाजर, चुकंदर, सरसों के बीज और काली मिर्च से बनाया जाता है। )
के साथ इसको महिलाओं को पिलाया जाता है जिससे उनको तुरंत ही लाभ मिलने लगता है। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग २.
प्रसव के बाद महिलाओं के अंदर गंदा खून रुक रह जाता है। इसको निकालने के लिए 10 से 20 ml नीम की छाल के काढ़े को प्रतिदिन
सुबह और शाम 6 दिन तक पिलाया जाए तो इससे गंदा खून बाहर निकल जाता है।
प्रयोग ३.
प्रसव के बाद यदि ज्यादा दर्द हो रहा हो तो 3 से 6 ग्राम नीम के बीच का चूर्ण खाएं। इससे लाभ पहुंचेगा।
बवासीर में नीम का करें प्रयोग
प्रयोग १.
50 ml तिल का तेल ले और उसके अंदर 100 ग्राम नीम की सूखी हुई निंबोली को लेकर तल दें। अब इस निबोली को छानकर अलग रख ले और उसको पीसकर उसका चूर्ण बना दे।
और जो तेल बचा हुआ है उसके अंदर 6 ग्राम मोम ,1 ग्राम नीला थोथा और जो चूर्ण तैयार किया है उसको, सभी को बचे हुए तेल में मिलाकर मलहम बना लीजिए।
अब इस मलहम का प्रयोग बवासीर के ऊपर लगाने में करते हैं। इसको दिन में 2 से 3 बार लगाते हैं तो इससे बवासीर में आराम मिलने लग जाता है और बवासीर का दर्द भी खत्म होने लगता है।
प्रयोग २.
अगर बवासीर से खून आ रहा हो और मस्सों में बहुत दर्द हो रहा हो तो उसके लिए एक प्राकृतिक मलहम तैयार करते हैं।
इसके लिए जो सामग्री चाहिए होती है वह इस प्रकार है। 3 ग्राम सोना गेरू ,2 ग्राम फिटकरी , 2 ग्राम कपूर और 20 ग्राम नीम के बीज की गिरी।
इन सबको एक साथ लेकर पीस लेते हैं और उसमें थोड़ा गाय का घी और अरंडी का तेल मिला लेते हैं। फिर इसकी खूब अच्छी तरीके से घोटाई करते हैं।
ऐसा करने से एक मलहम तैयार हो जाता है। उस मलहम को बवासीर के ऊपर लगाते हैं तो बवासीर के दर्द में तत्काल आराम मिलने लगता है खून आना भी बंद हो जाता है।[आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग 3 .
50 ml नीम के बीज का तेल और उसके अंदर 50 ग्राम कपूर को मिला ले। फिर उस तेल को बवासीर के मस्सो पर लगाए तो बवासीर में आराम मिलता है।
प्रयोग ४.
3 ग्राम सुहागे का चूर्ण और 3 ग्राम कच्ची फिटकरी का पूर्ण लेकर आपस में मिला ले और फिर उस मिश्रित चूर्ण को 50 ml नीम के तेल में मिला दे।
शौच करने के बाद उसको अच्छे से धो लें और उसके बाद इस तेल को उंगली की सहायता से गुदा भीतर तक अच्छी तरहप्रयोग करें। इससे कुछ ही दिनों के प्रयोग से बवासीर ठीक हो जाती है।
प्रयोग ५.
50 ग्राम शुद्ध रसौत , 50 ग्राम छोटी हरड़ ,50 ग्राम महानीम(बकायन ) के सूखे हुए बीज की गिरी और 50 ग्राम नीम के सूखे बीज की गिरी लेकर
इन सबको आपस में मिलाकर एक महीन चूर्ण बना ले और इसके अंदर 5 ग्राम घी में भुनी हुई हींग को भी मिला ले। इस चूर्ण के अंदर 50 ग्राम बीज निकले हुए मुनक्का को पीसकर भी मिला लें।
अब इन सब की आधे – आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख ले। प्रतिदिन एक से दो गोली दिन में दो बार अर्थात सुबह और शाम को ताजा पानी के साथ लें।
इससे बवासीर का खून गिरना बंद हो जाएगा और दर्द भी कम हो जाएगा और बवासीर ठीक होने लगेगा।

गुर्दे की पथरी को बाहर करें नीम के प्रयोग से
प्रयोग १.
8 से 10 हरे नीम के पत्तों की चटनी बनाकर 100 ml पानी में मिलाकर लगभग 45 दिनों तक सुबह, दोपहर और शाम को पीने से गुर्दे की पथरी टूट कर बाहर निकल जाती है। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग २.
नीम के सूखे पत्तों को जलाकर उसकी राख बना ले। अब उसकी राख की ½ ग्राम की मात्रा प्रतिदिन सुबह ,दोपहर, शाम तीनों टाइम पानी के साथ प्रयोग करें। इससे गुर्दे की पथरी टूट कर बाहर निकल जाती है।
शुगर (डायबिटीज) को ठीक करिए नीम का उपयोग से
प्रयोग १.
अगर प्रतिदिन सुबह में 10 ml नीम के पत्ते के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर सेवन करते हैं तो इससे डायबिटीज कंट्रोल होने लगती है।
प्रयोग २.
200 ग्राम नीम के हरे पत्तों को दरदरा कूट लें और उसको 500 ग्राम घी के साथ पकाएं। जब नीम के पत्ते जलकर काले पड़ जाए तो फिर घी को आग से उतार लें
और नीम के पत्तों को छानकर घी से अलग कर दें। अब उस घी का यदि प्रतिदिन सेवन करें तो शुगर कंट्रोल होने लगती है।
प्रयोग ३.
अगर सुबह-सुबह प्रतिदिन ब्रश करने के बाद खाली पेट नीम के कोमल 8 -10 पत्ते लेकर चबाकर खाया जाए तो उससे भी शुगर में फायदा पहुंचता है।
कान का बहना रोके नीम
प्रयोग १.
40 ml नीम का तेल लेकर उसको गर्म करें और उस गर्म तेल में 5 ग्राम मोम को डाल दें। जब मोम पिघल जाए
तब उसके अंदर 750 मिलीग्राम फिटकरी का चूर्ण मिलकर अच्छे से घोल लें। उसके बाद उसको एक कांच की सीसी में भरकर रख लें।
अब इस मिश्रण की तीन से चार बूंद प्रतिदिन सुबह-शाम कान में डाला जाए तो कान का बहाना रुक जाता है। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग २.
अगर कान से बदबूदार पीला पीव निकल रहा हो तो नीम के तेल में थोड़ा सा शहद मिलाकर उसे रुई की बत्ती बनाकर भिगोकर कान में रखा जाए तो इससे पीव आना बंद हो जाता है।
इस प्रयोग को कुछ दिनों तक करना है, तभी लाभ मिलेगा।
प्रयोग 3 .
30 ग्राम नीम के ताजे पत्तों की चटनी बनाकर उसे 50 ग्राम तिल के तेल में पकाए। उसे इतना पकाए कीउसकी चटनी तेल के अंदर काली पड़ने लगे।
अब उस तेल को आग से उतार कर अलग रख दें और उसको ठंडा होने दें। जब तेल ठंडा हो जाए तो उसको छान कर अलग करके एक सीसी में बंद करके रख लें।
अब उस तेल की तीन-चार बूंद कान में प्रतिदिन डाली जाए तो कान का बहाना बंद हो जाता है।
बालों की समस्याओं में लाभकारी है नीम का प्रयोग
अगर आज समय बाल पक रहे हो या बाल झड़ रहे हो तो इस समस्या को दूर करने के लिए नीम का प्रयोग किया जाता है
प्रयोग १.
असना (असन ,विजय साल ) के पेड़ की छाल को लेकर सबसे पहले उसका काढ़ा बनाना है। अब उस काढ़े के अंदर भांगरा के रस को मिला लें। अब इस मिश्रण के अंदर नीम के बीज को भिगोकर रख दें
और उसको कुछ समय बाद निकाल कर अब छाया में सुखाएं। ऐसा नीम के बीज के साथ कई बार करना है। अब उसके बाद इस नीम के बीज का तेल निकलें।
जो तेल निकलेगा उसकी प्रतिदिन दो-दो बूंद नाक में डालें। इससे असमय पकने वाले बाल काले पड़ने लगते हैं।
लेकिन इस विधि का प्रयोग करने में इस बात का विशेष ध्यान रखना है कि हमें भोजन के रूप में केवल गाय का दूध और पके हुए चावल ही खाने हैं। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग २.
बराबर बराबर मात्रा में नीम के पत्ते और बेर के पत्ते को लेकर उसकी चटनी बना लें। इस चटनी को अर्थात इस लेप को सिर के बालों के ऊपर प्रयोग करें।
लगभग 1 से 2 घंटे बाद अपने बालों को अच्छी तरीके से धो लें। ऐसा एक-एक दिन का गैप देकर करें। इससे बाल काले और लंबे होने लगते हैं।
प्रयोग 3 .
नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा होने दें और उसे पानी से अपने बालों को धोएं। इससे बालों का झड़ना रुक जाता है
और बाल मजबूत होने लगते हैं। इसके अलावा सिर में होने वाली और भी समस्याएं दूर होने लगते हैं।
दांतों के रोगों में नीम का इस्तेमाल है लाभदायक
प्रयोग १.
यदि प्रतिदिन नीम की दातून से दांतों को साफ किया जाए तो दांतों के होने वाले रोग समाप्त हो जाते हैं।
प्रयोग २.
10 ग्राम लाहौरी नमक, 50 ग्राम सोना गेरू, और 50 ग्राम नीम के जड़ की छाल ,इन तीनों को एक साथ लेकर खूब-कूट पीसकर महीन चूर्ण बना ले।
अब इस चूर्ण को नीम के पत्ते के रस में भिगोकर छाया में सुखाएं। ऐसा इस चूर्ण के साथ तीन बार करें। अब इस चूर्ण को सीसी में भरकर रख लें
और इसका मंजन की तरह प्रयोग करें। तो इससे दांतों में होने वाला पायरिया रोग या दांतों से आने वाले दुर्गंध या दांतों से पीव निकलना या इस तरीके की और भी समस्त समस्याएं सब समाप्त होने लगती हैं। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
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अधकपारी अथवा माइग्रेन का दर्द भगाए नीम का उपयोग से
10 ग्राम कच्चा चावल, 10 ग्राम काली मिर्च ,और 10 ग्राम नीम के सूखे हुए पत्ते ,इन तीनों को एक साथ कूट पीसकर बारीक पाउडर बना लें।
अब सूर्योदय से पहले सिर के जिस हिस्से में दर्द होता हो उसी तरफ की नाक में इस चूर्ण को चुटकी के साथ लेकर अच्छी तरीके से सूंघ ले।
इससे अधकपारी या माइग्रेन का दर्द कम होने लगता है। और समय के साथ ठीक होने लगता है। यहां पर यह ध्यान देना है कि
जब इस चूर्ण को नाक से सूंघते हैं तो यह चूर्ण नाक के अंदर तक अच्छी तरीके से चले जाना चाहिए।
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नाक से खून आने पर नीम का प्रयोग है फायदेमंद
गर्मी के महीने में नाक से खून आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। इस अवस्था में नीम की पत्तियां और अजवाइन दोनों को बराबर बराबर मात्रा में लेकर एक साथ कूटकर उसका पाउडर बना ले।
और इसको पानी में मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं। इस लेप को कान के पीछे कनपटी पर लगाते हैं तो नाक से खून आना बंद हो जाता है।
दमा रोग में फायदेमंद नीम का प्रयोग
दमा रोग हो जाने पर हमारी सांस बहुत ज्यादा फूलती है। इस अवस्था में पान के पत्ते में 3-5 बूंद शुद्ध नीम के बीज का तेल डालकर खाने से लाभ मिलता है। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
एसिडिटी में फायदा पहुंचाता है नीम का सेवन
6 ग्राम धनिया ,6 ग्राम सोंठ, 6 ग्राम चीनी अथवा गुड़ और 6 ग्राम नीम की सींक को मिलाकर काढ़ा बना लें। इसका सेवन प्रतिदिन सुबह-शाम करें। इससे एसिडिटी बनाना बंद हो जाता है
और कच्ची पक्की डकार आती हो तो वह भी नहीं आती हैं तथा खाना भी ठीक से पचने लगता है।
पेट के कीड़ों को खत्म करने के लिए करें नीम का सेवन
5 ml नीम के पत्ते का रस 2 से 3 दिन पीने पर पेट के कीड़े मर जाते हैं।
इसके अतिरिक्त यदि 8 से 10 नीम के पत्ते लेकर उसका छौंक लगाकर उसके अंदर सब्जी बनाकर खाई जाए तो उससे भी पेट के कीड़े मर जाते हैं।
नीम का इस्तेमाल दस्त में है लाभदायक
प्रयोग १.
अगर पेचिश की शिकायत हो गई हो तो उसको ठीक करने के लिए रोज सुबह में 3 से 4 पकी हुई नीम की निबोलियां खाने से यह ठीक हो जाती है और खुलकर भूख भी लगने लगती है।
प्रयोग २.
अगर हैजा हो गया हो तो इसके लिए 1.5 ग्राम कपूर के साथ 10 ग्राम नीम के पत्ते को मिलाकर पीसकर सेवन करें। इससे हैज़ा में लाभ मिलता है। [ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
स्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) में फायदेमंद है नीम का सेवन
50 ग्राम नीम की छाल और 50 ग्राम बबूल की छाल को लेकर दो गिलास पानी मिलाकर पकाएं। जब एक गिलास पानी बच जाए
तो पानी को छान कर अलग कर ले। अब उस काढ़े की 10- 20 ml मात्रा प्रतिदिन सुबह- शाम सेवन करें ,तो इससे लिकोरिया में आराम मिलता है।
गठिया में फायदेमंद है नीम
प्रयोग १.
नीम के पेड़ के तने के अंदरूनी हिस्से की छाल की 20 ग्राम मात्रा को लेकर उसे खूब महीन पीसकर उसको एक गाढ़ा लेप बना ले और दर्द वाले स्थान पर उस लेप को लगा लें।
जब वह सूख जाए तो उसको हटाकर दोबारा से दर्द वाले स्थान पर फिर उस लेप को लगाए। ऐसा दिन में तीन-चार बार करें। इससे जोड़ों के दर्द में अर्थात गठिया के दर्द में तुरंत आराम मिल जाता है।
प्रयोग २.
नीम के छाल के अर्क की 10-10 बूंद की मात्रा दिन में दो बार तीन से चार दिन तक सेवन करें।
इसके सेवन के 2 घंटे के उपरांत ताजी रोटी पर गाय का घी लगाकर खाएं। इससे गठिया के दर्द में लाभ होने लगता है।
प्रयोग 3 .
नीम के निंबौली के तेल की 5-5 बूंद पान के पत्ते पर लगाकर खाने से गठिया के दर्द में आराम पहुंचता है। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
चेचक के रोग में नीम के उपयोग
चेचक एक ऐसा रोग है जिसमें शरीर पर लाल-लाल दाने निकलते हैं और बहुत खुजली होती है। इस रोग को ठीक करने के लिए नीम का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नीम की पत्तियां, बीज, छाल और तेल सभी में ऐसे गुण होते हैं जो चेचक के विष को नष्ट करते हैं और रोगी को आराम दिलाते हैं।
प्रयोग १.
नीम की 7 कोमल पत्तियां और 7 दाने काली मिर्च को मिलाकर खाने से चेचक का खतरा कम होता है। इसे एक महीने तक रोजाना खाना चाहिए।
प्रयोग २.
नीम के बीज, बहेड़े के बीज और हल्दी को समान मात्रा में लेकर ठंडे पानी में पीस लें। इस पानी को कुछ दिनों तक पीने से चेचक से बचाव होता है।
प्रयोग 3 .
नीम की कोंपलों को 3 ग्राम लेकर 15 दिन तक नियमित रूप से खाने से 6 महीने तक चेचक नहीं होती। यदि हो भी जाए तो आँखों को कोई नुकसान नहीं होता।
प्रयोग ४.
नीम के बीजों की 5-10 गिरी को पानी में पीसकर उसका लेप बना लें। इस लेप को दानों पर लगाने से उनमें जलन कम होती है।[ आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग ५.
अगर चेचक के रोगी को प्यास लगे तो 1 लीटर पानी में 10 ग्राम नीम की कोमल पत्तियां डालकर उबाल लें। जब पानी आधा रह जाए तो
उसे छानकर पिलाएं। इसके अलावा यह पानी चेचक के विष और बुखार को भी कम करता है। इससे चेचक के दाने जल्दी सूख जाते हैं।
प्रयोग ६.
जब चेचक खुलकर न निकले और रोगी परेशान हो, तब नीम की हरी पत्तियों का रस 10 मिली दिन में 3 बार पिलाना चाहिए।
प्रयोग ७.
जब चेचक ठीक हो जाए तो नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसमें नहाना चाहिए।
प्रयोग ८.
जब चेचक के दानों के खुंड सूखकर गिर जाएं तो उनकी जगह पर गड्ढे बन जाते हैं और त्वचा का स्वरुप बिगड़ जाता है।
इन गड्ढों पर नीम का तेल या नीम के बीजों की गिरी पानी में घिसकर लगाने से दाग दूर हो जाते हैं।
प्रयोग ९.
चेचक के रोगी के बाल अगर झड़ जाएं तो उन्हें फिर से उगाने के लिए सिर में नीम का तेल लगाना चाहिए।
नीम के उपयोग से चर्म रोगों में लाभ
नीम एक ऐसा पौधा है, जिसमें त्वचा के लिए कई गुण होते हैं। नीम की जड़, छाल, पत्ते, बीज और तेल सभी त्वचा के विभिन्न रोगों का उपचार कर सकते हैं।
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ और सुंदर बनाते हैं।[आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग १.
नीम की 10 ग्राम जड़ और10 ग्राम बीज को नीम के पत्तों के रस में पीसकर एक पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को त्वचा पर लगाने से खुजली, दाद, फुन्सी, शीतपित्त और बदबू जैसी समस्याओं से राहत मिलती है।
प्रयोग २.
अत्यन्त पुराने नीम के पेड़ की सूखी छाल को पीसकर पाउडर बना लें । इस पाउडर को रात को पानी में भिगो दें और
सुबह इसे छानकर शहद के साथ पीएं। इससे आपको छाजन, दाद, खुजली, फोड़ा आदि चर्म रोगों से छुटकारा मिलेगा।
प्रयोग ३.
नीम के पत्तों का रस निकालें। इस रस में कपड़े की पट्टी को भिगोएं और उसे एक्जिमा वाले हिस्से पर बांधें। इसे रोजाना बदलते रहें।
आप नीम के पत्तों को भी पीसकर एक्जिमा पर लगा सकते हैं। इससे आपको एक्जिमा से आराम मिलेगा।
प्रयोग ४.
10 ग्राम नीम की छाल को 10 ग्राम मंजिष्ठादि काढ़े के साथ मिलाकर एक काढ़ा तैयार करें। इसमें10 ग्राम पीपल की छाल और 10 ग्राम गिलोय भी शामिल करें।
इस काढ़े को रोजाना सुबह और शाम 10-20 मिली पीएं। इससे आपको असाध्य छाजन से निजात मिलेगी।
प्रयोग ५.
नीम के पत्तों को दही और शहद के साथ मिलाकर एक लेप बनाएं। इस लेप को दाद या घाव पर लगाएं। इससे आपको दाद और घाव दोनों में फायदा होगा।
प्रयोग ६.
नीम के पत्तों के रस में कत्था, गन्धक, सुहागा, पित्त-पापड़ा, नीलाथोथा और कलौंजी को बराबर मात्रा में मिलाएं। इस मिश्रण को अच्छे से घोंटें
और इससे गोली बनाएं। इस गोली को पानी में घिसकर दाद पर लगाएं। इससे आपको चर्म रोगों से लाभ होगा।[आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग ७.
नीम के अन्दर की छाल को रात भर पानी में डाल दें। सुबह इस पानी को छान लें और इसमें आँवले का चूर्ण मिलाएं।
इस पानी को दिन में दो बार पीएं। इससे आपको पुराना शीतपित्त यानी पित्त निकलने की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
बुखार में नीम से लाभ
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीपायरेटिक गुण होते हैं, जो बुखार को कम करने और शरीर को शीतल करने में मदद करते हैं।
प्रयोग १.
नीम, तुलसी, हुरहुर, गिलोय और काली मिर्च को बराबर मात्रा (20-20 ग्राम) में लेकर अच्छे से पीसें। इस मिश्रण को पानी के साथ मिलाकर 2-2 ग्राम की छोटी-छोटी गोलियां बना लें।
हर दो घंटे में एक गोली गर्म पानी के साथ खाएं। इससे आपका बुखार जल्दी उतर जाएगा।
प्रयोग २.
5 ग्राम नीम की छाल, ½ ग्राम लौंग या दालचीनी को लेकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को सुबह और शाम 2-2 ग्राम पानी के साथ लें।
इससे आपको वायरल बुखार, टाइफाइड बुखार और खून की बीमारियों से राहत मिलेगी।[आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
प्रयोग 3 .
नीम के जड़ की 20 ग्राम छाल को दरदरा कूट लें। इसे 160 मिली पानी में डालकर रात भर भिगोएं। सुबह इसे उबालें और जब पानी 40 मिली रह जाए,
तो इसे छान लें। इस गर्म काढ़े को बुखार में पीएं। इससे आपका बुखार तेजी से कम होगा।
प्रयोग ४.
नीम की छाल, सोंठ, हरड, कुटकी ,अमलतास, पीपलामूल को बराबर मात्रा में लेकर एक लीटर पानी में उबालें। जब पानी 250 मिली रह जाए,
तो इसे छान लें। इस काढ़े को 10 से 20 मिली की मात्रा में दिन में दो बार पीएं। इससे आपका बुखार जल्दी खत्म हो जाएगा।
प्रयोग ५.
नीम की छाल, मुनक्का और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर 100 मिली पानी में उबालें। जब पानी 50 मिली रह जाए,
तो इसे छान लें। इस काढ़े को 20 मिली की मात्रा में दिन में तीन बार पीएं। इससे आपको बुखार से राहत मिलेगी।
प्रयोग ६.
नीम के कोमल पत्तों में फिटकरी की भस्म को मिलाकर अच्छे से पीसें। इस मिश्रण से छोटी-छोटी गोलियां बना लें।
हर गोली को मिश्री के शरबत के साथ खाएं। इससे आपको हर प्रकार के बुखार, खासकर तेज बुखार से आराम मिलेगा। [आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान]
और पढ़ें : खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु) के उपयोग
लू लग जाने पर प्रयोग करें नीम
अगर लू लग गई हो तो इसके लिए सबसे पहले नीम के जड़ की छाल ,उसके तने की छाल ,उसकी पत्ती , फूल और फल की गुठली का चूर्ण बना लें।
फिर उसे चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा के साथ 10 ग्राम मिश्री को मिला लें और उसे पानी के साथ सेवन करें। तो लू से होने वाली परेशानी समाप्त हो जाती है।
ज़हर का असर मिटाए नीम
चरक संहिता में इस बात का उल्लेख है कि जब सूर्य मेष राशि में हो तब नीम के पत्तों का साग बनाकर उसे मसूर की दाल के साथ खाया जाए तो
इसे पूरे 1 वर्ष तक विषैले जीव जंतुओं के जहर का कोई डर नहीं रहता है अर्थात उनके जहर का कोई प्रभाव नहीं होता है अगर वह काट लेते हैं तब।
नीम के उपयोगी हिस्से
नीम का पंचांग अर्थात जड़ की छाल ,तने की छाल ,फूल ,पत्ते और फल सभी कुछ प्रयोग में लिया जाता है।
नीम के सेवन की मात्रा
चूर्ण – 1-3 ग्राम
काढ़ा – 50-100 मिली
नीम के नुकसान
बिना चिकित्सक के सलाह के नीम के अत्यधिक प्रयोग से सेक्स पावर घटने लगती है। इसलिए इसका प्रयोग चिकित्सक के परामर्श के अनुसार उचित मात्रा में एवं सही विधि से करना चाहिए।
आंखों की रोशनी बढ़ाने की घरेलू दवा नीम के उपयोग फायदे और नुकसान FAQ –
नीम का पत्ता किसके लिए अच्छा है?
नीम का पत्ता विशेष रूप से शुगर ,बुखार, त्वचा रोग, और दांत के विकारों के लिए अच्छा होता है। इसका प्रयोग घावों के संक्रमण को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।
नीम की तासीर क्या होती है?
इसकी तासीर ठंडी होती है। इसी की वजह से इसको पेट के सभी प्रकार के विकारों के लिए उपयोगी माना गया है।
क्या नीम से लीवर खराब हो सकता है?
नीम का सही मात्रा में सही विधि से प्रयोग करने वालों का लीवर और भी अच्छा हो जाता है। खराब होने की संभावना न के बराबर हो जाती है।
नीम की पत्ती खाने से कौन सी बीमारी दूर होती है?
नीम का पत्ता विशेष रूप से शुगर ,बुखार, त्वचा रोग, और दांत के विकारों के लिए अच्छा होता है। इसका प्रयोग घावों के संक्रमण को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।
शरीर की इम्युनिटी पावर बढ़ जाती है। जिसकी वजह से मौसमी वायरस का खतरा कम हो जाता है और सर्दी जुखाम बुखार नहीं होता है।
चेतावनी
इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी शिक्षा देने के लिए और जड़ी- बूटी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए है। इसका सेवन करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।