परिचय
पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान : दोस्तों अगर आप कामला या पीलिया ,पित्त ,कफ , प्लीहारोग, पेट के रोग, सांस संबंधी समस्या, खांसी, कुष्ठ, वायु का गोला, गांठ, घाव, डायबिटीज, विषरोग, गलगण्ड , पेट फूलना, अपच,
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!एनीमिया , गठिया, पेट के कीड़े , गुर्दे की पथरी, ज्वर , फाइलेरिया ,सूजन , खून की गन्दगी , वात , भूख की कमी , लिवर की कमजोरी जैसे रोगों से परेशान हैं तो आप लोगो को घबड़ाने की जरुरत नहीं है।
आप अपनी इन समस्याओं से इन्द्रायण (colocynth ) के प्रयोग से मुक्ति पा सकते हैं या काम कर सकते हैं।
सम्पूर्ण भारत में यह साल भर पायी जाने वाली बालू मिटटी में उगती है | यह दिखने में तरबूज की बेल की तरह ही होती है।
इसके फूल पीले रंग के होते है , फल कच्चे रहने तक छोटे तरबूज की तरह हरे और पकने पर पीले रंग के हो जाते है |
इसका स्वाद बहुत ही कडवा होता है | इन्द्रायण के फल में एक कडवा तत्व कोलोसिन्धीन पाया जाता है | इसके आलावा एइलेत्रिन , हेंटियकोटेन, फाईटेस्टोरोल , वासा, पेक्टिन गोंद आदि तत्व पाए जाते है |
चरक व सुश्रुत-संहिता में इसका उल्लेख कई स्थानों पर किया गया है। इसमें बताया गया है की यह पित्त विकार और पेट के कीड़ों को समाप्त करने में विशेष उपयोगी है।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
इसकी दो प्रजातियां हैं :
1. छोटी या जंगली इन्द्रायण,
2. बड़ी इन्द्रायण ।

इन्द्रायण के अन्य दूसरे नाम
वानास्पतिक नाम : सिटुलस् कोलोसिन्थिस् (Citrullus colocynthis)
कुल: कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae)
अंग्रेजी : कोलोसिन्थ (Colocynth) , बिटर एपॅल (Bitter apple)
संस्कृत : इन्द्रवारुणी, चित्रा, गवाक्षी, गवादनी, वारुणी;
हिंदी : इन्द्रायण, कड़वा सेब ,इन्द्रायन, इन्द्रारुन, गोरूम्ब ;
उर्दू : इद्रायण (Indrayan);
गुजराती : इंद्रक (Indrak), इन्द्रावणा (Indravana) , त्रस (Tras) ;
कन्नडा : , पावामेक्केकायी (Pavamekkekayi) ,हामेक्के (Hamekke), तुम्तिकायी (Tumtiki) ;
तमिल- पेयक्कूमुट्टी (Peykkumutti), तुम्बा (Tumba) , पेदिकारिकौड (Paedikarikaud), वेरिकुमत्ती (Verikkummatti);
मराठी- इन्द्रावणा (Indravana), कडुवृन्दावन (Kadu Vrindavana), इन्द्रफल (Indraphal);
मलयालम- पेकोमुत्ती (Peykommutti)।
तेलुगु- एतिपुच्छा (Etipuchchha),एटेपुच्चकायी (Etouch Hkayi) , चित्तीपापरा (Chittipapara), वेरीपुच्चा (Veripuchchha), ;
बंगाली- राखालशा (Rakhalsha) इद्रायण (Indrayan), मकहल (Makhal);
पंजाबी- घोरुम्बा (Ghorumba), कौरतुम्बा (Kaur Tumba);
इन्द्रायण का औषधीय गुण
इंद्रायण के फायदों के बारे में जानने से पहले इसके औषधीय गुणों के बारे में बात करना ज़रूरी है।
बड़ी या लाल इन्द्रायण
बड़ी इन्द्रायण की प्रकृति रेचक, कड़वी और गर्म तथा पित्तकफ से आराम दिलाने वाली होती है।
इसके प्रयोग से कामला या पीलिया ,पित्त ,कफ , प्लीहारोग, पेट के रोग, सांस संबंधी समस्या, खांसी, कुष्ठ, वायु का गोला, गांठ, घाव, डायबिटीज, गलगण्ड , पेट फूलना, अपच, एनीमिया , गठिया, पेट के कीड़े , गुर्दे की पथरी, ज्वर, फाइलेरिया जैसे रोगों में लाभ होता है।
इसके जड़ एवं पत्ते कड़वे होते हैं। इसका फल सूजन को कम करने वाला, पेट साफ़ करने वाला , पेट के कीड़े निकालने वाला ,खून की अशुद्धियों वाला , डायबिटीज को नियंत्रित करने वाला गुण रखता है।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
छोटी या जंगली इंद्रायण
जंगली इन्द्रायण की प्रकृति कड़वी और वात को कम करने वाली होती है। यह पित्तकारक और भूख बढ़ाने वाला होता है।
इसकी जड़ उल्टी और दस्त कराने वाली होती है। इसक फल पेट के कीड़ो का नाश करने वाला ,बुखार को खत्म करने वाला , कफ निकालने वाला , लिवर को मजबूती देने वाला होता है। इसके बीज की प्रकृति ठंडी होते हैं।

पीलिया होने का क्या कारण है
- लीवर में हीमोग्लोबिन के टूटने से बिलिरुबिन बनता है। यह बिलिरुबिन लीवर से पित्त थैली में जाता है और फिर वहाँ से आँतों से होते हुए मल के साथ बाहर निकल जाता है। पीलिया तब होता है, जब शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और लिवर की कमजोरी के कारण ये बिलिरुबिन शरीर में इकठ्ठा होने लगता है और मल के साथ बाहर नहीं निकल पाता है। जिसकी वजह से शरीर पीला पड़ने लगता है।
- ज्यादा शराब पीने से सिरोसिस हो सकता है, जो पीलिया का कारण बन सकता है।
- इसके अलावा एसिटामिनोफेन, स्टेरॉयड और बर्थ कंट्रोल पिल्स से भी लीवर को नुकसान होने का खतरा रहता है जिसकी वजह से पीलिया बन सकती हैं।
आयुर्वेदिक दवा लेने के साथ आहार में क्या लें
- पीलिया से पीड़ित रोगी को गन्ने का रस, फलों का रस, सूखे अंगूर का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इन चीजों से मूत्र के जरिए बिलीरूबिन की निकासी होती है।
- पानी खूब पिएं और छाछ का भी सेवन करें। इसके अलावा खूब फल-सब्जियां खाएं।
- पीलिया में नींबू, टमाटर और मूली भी काफी फायदेमंद हैं।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
इन्द्रायण के फायदे और उपयोग

इंद्रायण कौन-कौन से बीमारियों के लिए फायदेमंद है,चलिये इसके बारे में आगे जानते हैं-
पीलिया रोग लाभदायक
इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण को गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है |
गठिया के दर्द से आराम दिलाये इंद्रायण
इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण और पीपल छाल के चूर्ण को समान मात्रा में गुड़ में मिलाकर 2-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से गठिया से आराम मिल जाता है।
इन्द्रायण फल के 100 ग्राम गूदे में 10 ग्राम हल्दी तथा स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर पीस लें। अब 250 मिग्रा की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ देने से गठिया में आराम मिल जाता है। यह बहुत ही कारगर विधि है।
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मधुमेह में लाभदायक
शुगर लेवल बढ़ने पर इन्द्रायण के कुछ फलों को लेकर पैरो से रोज 10 मिनट तक कुचलने मात्र से ही बढ़ी हुई शुगर अपने स्तर पर आ सकती है |
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आँतों के कीड़े मारने में प्रयोग
इसके फल के गुदे को गरम करके पेट पर किसी सूती कपडे से बाँधने से आँतों के कीड़े मर जाते है |[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
बालों को काला करने में इंद्रायण है लाभकारी
अगर समय से पहले ही बाल सफेद हो जाते हैं तो इन्द्रायण बीज के तेल को नारियल के तेल में मिलाकर सिर पर लगाने से बाल प्राकृतिक रूप से काले हो सकते हैं।
अगर 3-5 ग्राम इन्द्रायण बीज के चूर्ण को गाय के दूध के साथ पिया जाये तो इससे बाल काले हो जाते हैं।
सिरदर्द से राहत दिलाये इन्द्रायण
अगर आप सिरदर्द से बहुत ज्यादा परेशान हैं तो इसके लिए इन्द्रायण फल के रस या जड़ की छाल को तिल के तेल में पका ले और जब ये ठंडा हो जाये तो इसको कांच की शीशी में भरकर रख ले।
अब दर्द होने की स्थिति में माथे पर लगाएं। आप को सिरदर्द में आराम मिल जायेगा है।
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बहरेपन के इलाज में मददगार
इन्द्रायण के पके हुए फल को या उसके छिलके को तिल अथवा नारियल के तेल में पकाकर ,ठंडा करके छानकर 2-2 बूँद कान में डालने से बहरेपन की शिकायत कम होने लगती है।
इसके अलावा इन्द्रायण के फल को पीसकर नारियल तेल के साथ गर्म करके कान के घाव पर लगाने से घाव जल्दी ठीक होने लगता है।
दाँत के कीड़े को मारने में लाभकारी है इंद्रायण
जब दांत में कीड़ा लग जाये तो इस परेशानी से मुक्ति पाने के लिए इन्द्रायण के पके हुए फल की धूनी (धुआं) को दाँतों में देने से दाँतों के कीड़े मर जाते हैं।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
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खांसी से छुटकारा दिलाने में लाभकारी है इंद्रायण
इन्द्रायण के फल में छेद करके उसमें लगभग 20 ग्राम काली मिर्च भरकर छेद बंद करके उसे धूप में सूखने दें या गर्म राख में 7 दिन तक पड़ा रहने दें।
उसके बाद उस फल में से काली मिर्च निकाल दें। अब खांसी होने पर काली मिर्च के 5 दाने रोज शहद और पीपल के साथ प्रयोग करते हैं तो उससे खाँसी में आराम मिलता है।
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सांस से सम्बंधित बीमारियों में लाभकारी है इंद्रायण
अगर सांस की समस्या से परेशान हैं तो इन्द्रायण फल को सुखाकर उसका चिलम बनाकर पीने से सांस लेने में आसानी होती है।
पेट की बीमारियों के इलाज में लाभकारी इंद्रायण
- इन्द्रायण का मुरब्बा खाने से पेट के बीमारियों समाप्त होती है।
- इन्द्रायण के फल छेद करके उसमे सेंधानमक और अजवायन भर कर धूप में सुखा लें। जब फल सूख जाये तो उसमे से अजवायन को बाहर निकल लें। अब उसको गर्म पानी के साथ सेवन करते हैं तो पेचिश तथा पेटदर्द से आराम मिलता है।
कब्ज तोड़ने का काम करता है इंद्रायण
इन्द्रायण के फल को पानी में उबालकर उसको छानकर गाढ़ा पेस्ट बना लें और उसकी छोटी-छोटी चने के बराबर गोलियां बना कर रख लें ।
1 या 2 गोली को ठंडे दूध के साथ रात में भोजन के बाद लेने से सुबह पेट खाली हो जाता है। और धीरे-धीरे कब्ज टूट जाती है। [पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]

पेशाब की रुकावट के कष्ट के निदान में फायदेमंद है इंद्रायण
पेशाब की रुकावट को दूर करने के लिए इन्द्रायण की जड़ को पानी के साथ पीस लें। फिर उसको छानकर, 5-10 मिली की मात्रा में दिन बार रोगी को दें।
बड़ी इन्द्रायण की जड़, हल्दी, हरड़ की छाल, बहेड़ा और आंवला सभी को मिलाकर काढ़ा बना लें। अब 10-20 मिली काढ़े में शहद मिलाकर सुबह-शाम पीने से पेशाब करते समय होने वाले दर्द में लाभ मिलता है।
स्तन के सूजन के इलाज में फायदेमंद इंद्रायण
अगर किसी बीमारी के साइड इफेक्ट के कारण पुरुष या महिला के स्तन में सूजन आ गई है तो इन्द्रायण की जड़ को पीसकर स्तनों पर लेप करने से स्तन के सूजन से आराम मिल जाता है।
मासिक धर्म की समस्या के उपचार में फायदा देती है इंद्रायण
इन्द्रायण के बीज 3 ग्राम तथा 5 काली मिर्च दोनों को पीसकर 200 मिली पानी में उबालकर काढ़ा बना लें। जब एक चौथाई पानी बच जाए तब उसको छानकर पिलाने से मासिक विकारों में आराम मिलता है।
योनि के दर्द के उपचार में फायदेमंद है इंद्रायण
अगर इन्द्रायण की जड़ को पीसकर योनि में लेप किया जाये तो योनि के दर्द से जल्दी आराम पाने में मदद मिलती है।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
गर्भधारण की समस्या में लाभकारी
जिन महिलाओं में गर्भधारण की समस्या होती है तो वो अगर इन्द्रायण की जड़ को बेलपत्र के साथ पीसकर 5 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ प्रतिदिन सेवन करें तो गर्भ जल्दी ठहरने में मदद मिलती है |
नार्मल डिलीवरी के लिए फायदेमंद है इंद्रायण
इन्द्रायण की जड़ों को पीसकर गाय के घी में मिलाकर योनि में लगाने से आराम से प्रसव हो जाता है।
इन्द्रायण के फल के रस में रुई भिगोकर योनि में रखने से आराम से प्रसव हो जाता है।
इन्द्रायण की जड़ों को पीसकर प्रसूता के बढ़े हुए पेट पर लगाने से पेट अपनी जगह पर आ जाता है।
उपदंश (सिलफिस) में फायदेमंद है इंद्रायण
100 ग्राम इन्द्रायण की जड़ + 500 मिली अरंडी तेल
इनको एक साथ पका लें ।अब इस तेल की 15 मिली मात्रा को गाय के दूध के साथ दिन में दो बार सुबह-शाम पिलाने से उपदंश में लाभ होता हैं।
इसके अलावा इन्द्रायण की जड़ के टुकड़ों को अपने से पांच गुने पानी में उबालें। जब तीन हिस्सा पानी रह जाए तब छानकर उसमें बराबर मात्रा में चीनी का बूरा मिलाकर शर्बत बनाकर पीने से उपदंश में आराम मिलता है।
सूजाक के इलाज में लाभकारी इंद्रायण
बड़ी इन्द्रायण की जड़ ,त्रिफला और हल्दी तीनों का काढ़ा बनाकर 30 मिली की मात्रा में दिन में दो बार सुबह-शाम पीने से सूजाक रोग में आराम मिलता है।[पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
फोड़े के इलाज में लाभकारी इंद्रायण
छोटी इन्द्रायण और बड़ी इन्द्रायण की जड़ दोनों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर नारियल के तेल के साथ मिलाकर फोड़े पर लगाने से लाभ होता है।

खुजली या घमौरी की परेशानी को करे दूर इंद्रायण
इन्द्रायण फल का पेस्ट करके खुजली या घमौरी पर लगाने से लाभ होता है।
मिर्गी (अपस्मार) में लाभकारी है इंद्रायण
इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण को दिन में तीन बार सुबह-दोपहर-शाम नाक से लेने से मिर्गी में लाभ होता है।
सूजन को कम करने में फायदेमंद इंद्रायण
इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण को सिरके के साथ गर्म करके सूजन वाली जगह पर लगाने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है।
बुखार से छुटकारा दिलाये इंद्रायण
इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण में सरसों का तेल मिलाकर शरीर पर मालिश करने से बुखार कम होने लगता है और धीरे-धीरे उतर जाता है।
बिच्छू के डंक मारने से होने वाले दर्द से आराम दिलाये इंद्रायण
अगर किसी को बिच्छू डंक मार दे तो उसे 6 ग्राम इन्द्रायण फल खिलाने से आराम मिलता है।
इन्द्रायण का उपयोगी भाग
पत्ता ,जड़ , फल , बीज।
इन्द्रायण का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए
0.125-0.5 ग्राम फल का चूर्ण
1 ग्राम जड़ का चूर्ण
चिकित्सक की देख रेख में उसकी सलाह से ही प्रयोग करें। [पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान ]
इन्द्रायण सेवन के नुकसान
अगर सही विधि और मात्रा में इसका प्रयोग न किया जाये तो इसके गम्भीर परिणाम देखने को मिलते है। जैसे कि अत्यधिक दस्त होना , उल्टी होना।
पीलिया(कामला) की दवा इन्द्रायण के फायदे और नुकसान -FAQ
इन्द्रायण का चूर्ण कैसे बनाएं?
इन्द्रायण के फल और जड़ दोनों का ही चूर्ण बनाया जाता है। इसके लिए इनको धूप में सूखाकर बारीक कूट लिया जाता है। और फिर इसे छानकर रख लेते है। इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि दोनों को आपस में मिलाना नहीं है।
इन्द्रायण की जड़ का उपयोग कैसे करें ?
इसकी जड़ का प्रयोग काढ़ा बनाने में , चूर्ण बनाने में , गोली बनाने में किया जाता है। लेकिन ये सब वैद्य की सलाह पर निर्भर करता है।
चेतावनी
इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी केवल ज्ञानवर्द्धन और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता के लिए है। प्रयोग चिकित्सक की देखरेख में करें।