परिचय
अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान : आजकल के परिवेश में जिस तरीके का हमारा खान-पान और जीवनशैली है , हार्ट की समस्या होना एक आम बात हो गई है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लेकिन कोई भी व्यक्ति इसके पीछे के मूल कारण को नहीं जानना चाहता है जबकि अगर मूल कारण को देखें तो उसको जड़ से खत्म करने अथवा कम करने का उपाय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति मेंआसानी से मिल जायेगा।
किसी ने सही कहा है कि पुराना हथियार हमेशा आजमाया हुआ होता है ,नए हथियार का कुछ पता नहीं होता है। यह कहावत बीमारियों से लड़ने के मामले में हमारी पुराना चिकित्सा पद्धति के ऊपर भी लागू होती है।
हमने अपने पूर्वजों के और ऋषि-मुनियों के शास्त्रों द्वारा दिए गए ज्ञान के ऊपर भरोसा ना करके केवल एलोपैथी पद्धति के ऊपर आंख बंद करके भरोसा किया।
जिसके रूप में हमें एक बीमारी को ठीक करने के ऐवज में दो और बीमारियां उपहार के रूप में मिल जाती हैं।
जबकि जिस रोग को दूर करने के लिए हम इस पद्धति की कोई एक दवाई खाते हैं तो उसे हमारा रोग ठीक भी नहीं होता है, वह केवल दब जाता है और फिर धीरे-धीरे और गंभीर समस्या भी उत्पन्न करता है।
जबकि हमारे पूर्वजों द्वारा बताई गयी आयुर्वेदिक पद्दति बहुत ही कारगर है। इसका प्रयोग करके हमारे रोग जड़ से समाप्त भी हो जाते हैं
और उसके साथ में उस रोग के कारण उत्पन्न होने वाले और दूसरे रोग भी समाप्त हो सकते हैं ,ऐसा कई जगह पर वर्णन भी मिला हुआ है।
दोस्तों अगर आप भी कोलेस्ट्रॉल की समस्या और हृदय के रोग से परेशान है तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है
क्योंकि हम यहां पर जिस औषधि के बारे में बात कर रहे हैं वह अर्जुन की छाल से बनने वाली औषधि है जिसका नाम अर्जुनारिष्ट है। [अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
अर्जुन का उपयोग एनजाइना (हृदय से संबंधित सीने में दर्द) और अन्य हृदय संबंधी स्थितियों को कम करने के लिए किया जाता है।
अर्जुनारिष्ट कार्डियो प्रोटेक्टिव गुणों से भरपूर एक आयुर्वेदिक सिरप है। अर्जुनारिष्ट उच्च कोटि की एंटी इन्फ्लेमेटरी ,एनाल्जेसिक और कफ-पित्त नाशक दवा है।

बागभट्ट के अनुसार प्रकृति के द्वारा अर्जुन ही एक ऐसी औषधि है जो हमारे हृदय संबंधित रोगों की सबसे कारगर दवा है।
अगर इसका सही विधि से नियम पूर्वक चिकित्सक के परामर्श के अनुसार प्रयोग किया जाए तो हम बढ़ते हुए कोलेस्ट्रॉल की समस्या और हृदय रोगों की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
वैसे देखा जाए तो हमारे शरीर में तीन चीजों का संतुलन बेहद जरूरी है वह है कफ , वात और पित्त। अगर इन तीनों में से किसी का भी संतुलन बिगड़ता है तो हमें गंभीर रोगों के रूप में परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
कोलेस्ट्रॉल अथवा हृदय से संबंधित दूसरे रोग और शुगर वात के असंतुलित होने का परिणाम होता है।
बागभट्ट जी कहते हैं कि अगर हमारे शरीर में वात असंतुलित होता है तो यह रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
अगर हम वात को ही संतुलित कर दें तो यह रोग भी हमें परेशान नहीं करते हैं और धीरे-धीरे ठीक हो जाते हैं।[अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
वात रोग की समस्या उत्पन्न होने का मतलब है कि जब हमारे शरीर में पेट में वात रोग की समस्या उत्पन्न होती है तो हमारा पाचन तंत्र प्रभावित होता है।
लेकिन जब यही वात हमारे खून में मिल जाता है अर्थात हमारे खून में अम्ल मिल जाता है तब हमें कोलेस्ट्रॉल की समस्या उत्पन्न होती है
और जब कोलेस्ट्रॉल की समस्या उत्पन्न होती है तो अपने आप शुगर और हृदय संबंधी रोग उत्पन्न हो जाते हैं।
तो अर्जुनारिष्ट का प्रयोग कर हम अपने खून को साफ कर सकते हैं और अपने खून से अम्लता को खत्म कर सकते हैं अर्थात वात रोग को खत्म कर सकते हैं।
और जब यह खत्म हो जाता है तो हमारा कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होने लगता है और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित होने से हृदय रोग नियंत्रित होने लगता है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अर्जुनारिष्ट विशेष रूप से हृदय के स्वास्थ्य के रखरखाव का काम कर लम्बी उम्र का वरदान देता है।
इसके अतिरिक्त यह दवा अन्य रोगों जैसे कमजोरी, थकान, गले की समस्या, सांस की परेशानी, खाँसी, अस्थमा, वीर्य विकार ,बलगम के कारण छाती में जकड़न, अत्यधिक पसीना, बेचैनी आदि के उपचार में भी सहायक है।

तो आशा करते हैं कि इस लेख में जो आपको जानकारी देने जा रहे हैं वह आपके लिए उपयोगी साबित हो। अतः आप इसको ध्यान पूर्वक पढ़ें और इसका लाभ उठाएं। [अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
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अर्जुनारिष्ट किससे बना है?
अर्जुन की छाल , किशमिश , महुआ के फूल , पानी , गुङ , धाय के फूल
अर्जुनारिष्ट का स्रोत क्या है?
वनस्पति
अर्जुनारिष्ट कैसे काम करती है?

- अर्जुन की छाल – कार्डियक आउटपुट में सुधार करने का काम करती है और हाई ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रण में लाती है।
- धाय के फूल – त्वचा के रोमछिद्रों को बिना कारण खुलने से रोकने और खुले हुए रोमछिद्रों को जल्दी भरने का काम करती है क्योंकि इससे त्वचा की आंतरिक परत पर सूर्य की विकिरण का बुरा प्रभाव नहीं होता है और त्वचा में चमक बनी रहती है।
- किशमिश – फ्री रेडिकल्स (मुक्त कणों) को कम करती है जिससे ऑक्सीडेटिव तनाव कम रहता है। यह एक प्रकार का एंटीऑक्सीडेंट है, जो चोट या संक्रमणों के कारण होने वाली सूजन को कम करने का काम करता है।
- महुए के फूल – ब्रोंकाइटिस जैसी गंभीर समस्या को ठीक करने में मदद करता है। क्योंकि इसके कारण खांसी शुरू हो जाती है और फिर धीरे-धीरे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है जिसके कारण घबराहट महसूस होने लगती है।
- गुड़ – खून में हीमोग्लोबिन के लेवल को ठीक रखने में सहायता करता है। इससे नसों में खून का प्रवाह भी ठीक रहता है।
- अर्जुनारिष्ट मांसपेशियों की ऐंठन, दर्द और सूजन को कम करता है। जिससे मांसपेशियों को आराम मिलता है।[अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
अर्जुनारिष्ट सिरप के लाभ
लाभ
- धमनियों को मजबूत बनाने में
- रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करने में
- हृदय स्वास्थ्य में
- शारीरिक तंदुरुस्ती को बढ़ाने में
अर्जुनारिष्ट के उपयोग
1. हृदय रोग
हृदय रोग खून कि नसों के अंदरूनी परत के अंदर मोमी पदार्थ (चिपचिपा ख़राब कोलेस्ट्रॉल) के निर्माण के कारण होते हैं। अर्जुनारिष्ट हृदय रोग के लक्षणों को कम करने और हृदय की कार्यप्रणाली को ठीक करने में मदद करता है।
इसके सही प्रयोग से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) और हृदय गति (हार्ट बीट) को सामान्य रखने में मदद मिलती है। अर्जुनारिष्ट के प्रयोग से हृदय की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। यह हृदय के लिए टॉनिक का काम करता है।

2. उच्च कोलेस्ट्रॉल
जब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है तो खून की नसों में वसा (फैट) जमा होने लगता है। जिसके कारण हृदय संबंधी समस्याएं पैदा होने लगती है। आयुर्वेद के अनुसार, उच्च कोलेस्ट्रॉल पाचन अग्नि ( जठराग्नि )के असंतुलन के कारण होता है
अर्थात जब पाचन तंत्र असंतुलित होता है। जिसके परिणाम स्वरुप ख़राब कोलेस्ट्रॉल बनने लगता है और ये खून की नसों के अंदरूनी परत पर जमा हो जाता है
और खून की नसों में रुकावट आ जाती है। अर्जुनारिष्ट पाचन अग्नि को बेहतर बनाने मदद करता है। जिससे खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर सामान्य होने लगता हैं।[अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
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3. अस्थमा
अर्जुनारिष्ट अस्थमा में सांस फूलने के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद करता है। आयुर्वेद के अनुसार, अस्थमा होने का मुख्य कारण वात और कफ दोष का असंतुलन हैं।
दूषित ‘वात’ फेफड़ों में दूषित ‘कफ’ के साथ मिलकर सांस की नली में रुकावट पैदा करता है। इससे सांस लेने में समस्या उत्पन्न होने लगती है। इस स्थिति को ही अस्थमा कहते है।
अर्जुनारिष्ट के सही प्रयोग से कफ को संतुलित करने और फेफड़ों से बलगम निकालने में मदद मिलती है, जिससे अस्थमा के लक्षणों में कमी आने लगती है।
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4. हार्ट अटैक (पक्षाघात )
अर्जुन की छाल में खून को पतला करने की क्षमता होती है। पक्षाघात का मुख्य कारण शरीर में खून का गाढ़ा पड़ना होता है। शरीर में खून गाढ़ा होने के कारण नसों में अवरोध पैदा होता है
जिससे हृदय में खून का प्रवाह बाधित हो जाता है और अटैक आ जाता है। क्योंकि अर्जुनारिष्ट खून को पतला बनाए रखता है जिससे हार्टअटैक का लक्षण बहुत हद तक कम हो सकता है।
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5. उम्र को बढ़ने से रोकता है
अर्जुनारिष्ट फ्री रेडिकल्स को कम करता है जिससे यौवनावस्था को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

अर्जुनारिष्ट सिरप की मात्रा और सेवन विधि
20 से 30 मिलीलीटर दिन में दो बार बराबर मात्रा में गुनगुना पानी मिलकर भोजन के 15 मिनट बाद उपयोग करना चाहिए ।या चिकित्सक के निर्देशानुसार
– 3-4 चम्मच अर्जुनारिष्ट
– इसे बराबर मात्रा में गुनगुना पानी
– इसे दिन में एक या दो बार भोजन के बाद लें। [अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]
अर्जुनारिष्ट के दुष्प्रभाव और सावधानियां
दुष्प्रभाव
- मुंह में छाले
- पेट में जलन
- अपच
- चक्कर आना
- बार-बार प्यास लगना
सावधानियां
- गर्भावस्था के दौरान चिकित्सक के निर्देशानुसार
- अलर्जी की समस्या होने पर तुरंत प्रयोग रोक दें
- इसमें गुड़ होने के कारण मधुमेह के रोगी को प्रयोग से बचना चाहिए। [अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान]

अर्जुनारिष्ट के फायदे और नुकसान-FAQ
अर्जुनारिष्ट का क्या कार्य है?
अर्जुनारिष्ट का प्रयोग कर हम अपने खून को साफ कर सकते हैं और अपने खून से अम्लता को खत्म कर सकते हैं अर्थात वात रोग को खत्म कर सकते हैं।
और जब यह खत्म हो जाता है तो हमारा कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होने लगता है और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित होने से हृदय रोग नियंत्रित होने लगता है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि अर्जुनारिष्ट विशेष रूप से हृदय के स्वास्थ्य के रखरखाव का काम कर लम्बी उम्र का वरदान देता है।
इसके अतिरिक्त यह दवा अन्य रोगों जैसे कमजोरी, थकान, गले की समस्या, सांस की परेशानी, खाँसी, अस्थमा, वीर्य विकार ,बलगम के कारण छाती में जकड़न, अत्यधिक पसीना, बेचैनी आदि के उपचार में भी सहायक है।
क्या अर्जुनारिष्ट लेते समय किसी आहार नियम का पालन किया जाना चाहिए?
जब तक कि डॉक्टर द्वारा सलाह न दी जाए तब तक नहीं।
क्या अर्जुनारिष्ट कोलेस्ट्रॉल कम करता है?
अर्जुनारिष्ट का प्रयोग कर हम अपने खून को साफ कर सकते हैं और अपने खून से अम्लता को खत्म कर सकते हैं अर्थात वात रोग को खत्म कर सकते हैं।
और जब यह खत्म हो जाता है तो हमारा कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होने लगता है और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित होने से हृदय रोग नियंत्रित होने लगता है।
अगर मुझे कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं है तो क्या मैं अर्जुनारिष्ट ले सकता हूं?
इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए।
क्या अर्जुनारिष्ट रक्तचाप को कम करता है?
अर्जुनारिष्ट हृदय रोग के लक्षणों को कम करने और हृदय की कार्यप्रणाली को ठीक करने में मदद करता है। इसके सही प्रयोग से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) और हृदय गति (हार्ट बीट)
को सामान्य रखने में मदद मिलती है। अर्जुनारिष्ट के प्रयोग से हृदय की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। यह हृदय के लिए टॉनिक का काम करता है।
क्या अर्जुनारिष्ट हृदय के लिए अच्छा है?
अर्जुनारिष्ट हृदय रोग के लक्षणों को कम करने और हृदय की कार्यप्रणाली को ठीक करने में मदद करता है। इसके सही प्रयोग से उच्च रक्तचाप (हाई ब्लडप्रेशर) और हृदय गति (हार्ट बीट)
को सामान्य रखने में मदद मिलती है। अर्जुनारिष्ट के प्रयोग से हृदय की मांसपेशियों को ताकत मिलती है। यह हृदय के लिए टॉनिक का काम करता है।
क्या अर्जुनारिष्ट से एसिडिटी होती है?
कभी-कभी पित्त दोष को बढ़ा सकता है और एसिडिटी का कारण बन सकता है।
क्या अर्जुनारिष्ट ब्लॉकेज के लिए फायदेमंद है?
अर्जुनारिष्ट का प्रयोग कर हम अपने खून को साफ कर सकते हैं और अपने खून से अम्लता को खत्म कर सकते हैं अर्थात वात रोग को खत्म कर सकते हैं।
और जब यह खत्म हो जाता है तो हमारा कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित होने लगता है और कोलेस्ट्रॉल के नियंत्रित होने से हृदय रोग नियंत्रित होने लगता है।
क्या अर्जुनारिष्ट मधुमेह के लिए अच्छा है?
इसका मुख्य घटक अर्जुन है जो की मधुमेह के लिए बहुत फायदेमंद है। लेकिन क्योकि इसमें गुड़ भी होता है। इसीलिए चिकित्सक का परामर्श जरुरी है।
चेतावनी
इस लेख में दी गयी समस्त जानकारी केवल ज्ञानवर्धन और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता के लिए है। इसके प्रयोग के लिए चिकित्सक की सलाह जरुरी है।