कड़वी लौकी का परिचय :
दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान : आप यहां पर कड़वी लौकी का नाम सुनकर थोड़ा अचंभित हो रहे होंगे कि यह कौन सी लौकी है जो कड़वी होती है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!लेकिन यहां पर आपको अचंभित होने की जरूरत नहीं है। यह भी लौकी की ही एक वैरायटी है।
अपने औषधीय गुणों के कारण लौकी की सब्जी खाना ज्यादातर लोगों को पसंद होता है। लेकिन जिस लौकी को आप खाते हैं वह लौकी की मीठी वैरायटी होती है।
लेकिन जिस लौकी की हम बात कर रहे हैं ,यह लौकी की कड़वी वैरायटी होती है। यह सब्जी के रूप में नहीं खाई जाती है। इसका प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है।
अगर आपके दांतों में कीड़े लग गए हैं या इसके अलावा और भी कई तरीके की समस्याएं हैं जो कड़वी लौकी से सही की जा सकती हैं उसका वर्णन हम इस लेख में करने जा रहे हैं।
क्योंकि लौकी की यह वैरायटी एक औषधि है इसलिए इसका प्रयोग औषधि की मात्रा के अनुसार और सावधानियो के हिसाब से किया जाता है।
जिसके बारे में हम विस्तृत रूप से नीचे वर्णन कर रहे हैं ,इसको आप ध्यान पूर्वक पढ़िए।
हो सकता है कि इससे आपका कुछ फायदा हो जाए। इसको बहुत सी बीमारियों में प्रयोग किए जाने के बारे में बताया गया है। कि
कड़वी लौकी से इन बीमारियों को सावधानी पूर्वक चिकित्सक की देखरेख में या उसकी सलाह से किस प्रकार सही किया जा सकता है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]

तो यहां पर सबसे बड़ा प्रश्न आपके मन में यही आता होगा कि आखिर यह कड़वी लौकी है क्या।
तो चलिए हम बताते हैं कड़वी लौकी क्या चीज होती है ? देखिए कड़वी लौकी की 2 प्रजातियां होती हैं। एक मीठी लौकी और दूसरी कड़वी लौकी।
मीठी लौकी को संस्कृत में तुम्भी या अलाबु बोलते हैं जबकि कड़वी लौकी को कटुतुम्भी या महाफला के नाम से भी हम जानते हैं।
मीठी लौकी तो सभी लोग सब्जी के रूप में खाते हैं ,लेकिन कड़वी लौकी को सब्जी के रूप में नहीं खाया जाता है।
बल्कि इसका दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है। यहां पर एक बात और स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि ऐसा नहीं है कि दोनों वैरियटयों के पौधे अलग-अलग होते हैं। दोनों वैरायटी के पौधे एक ही तरीके के होते हैं।
उनकी पत्तियां सब कुछ एक ही तरीके का होता है। फूल भी एक ही तरीके का होता है। लेकिन अंतर होता है तो केवल उनके स्वाद का। कोई लौकी मीठी होती है और कोई लौकी कड़वी होती है। किस कारण से कोई लौकिक कड़वी होती है यह एक शोध का विषय है।
लेकिन यहां पर यह जानना जरूरी है की कड़वी लौकी का इस्तेमाल कोई अपने मन से सब्जी या और किसी रूप में नहीं कर सकता है।
क्योंकि अगर कोई इसको असावधानीपूर्वक इस्तेमाल करता है तो इसके बहुत ही गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इसीलिए औषधि के रूप में भी इसका प्रयोग जब किया जाता है तो चिकित्सक के परामर्श के अनुसार ही किया जाता है
कड़वी लौकी के पौधे और उसके फल दोनों का प्रयोग औषधि के रूप में होता है। कड़वी लौकी की जड़ को पेट साफ करने के लिए तथा सूजन को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
दूसरी भाषाओं में लौकी के नाम :
वानस्पतिक नाम : लैजीनेरिया सिसेरेरिया (Lagenaria siceraria)
कुल : कुकुरबिटेसी( Cucurbitaceae)
अंग्रेजी नाम : बॉटल गुअर्ड(Bottle gourd),कैलाबस गुअर्ड (Calabash gourd), व्हाईट फ्लावर गुअर्ड (White flower gourd)
संस्कृत: महाफला, तुम्बी, कटुतुम्बी,अलाबू, तिक्तालाबू;
हिंदी: मीठी तोम्बी, घिया, लम्बाकद्दु, तुम्बी, लौआ, लौकी,तिक्त लौकी, कड़वी लौकी;
उर्दू: तुम्बरी (Tumbari)काडूगोल (Kadugal) ;
आसामी: बोगालाओ (Bogalao);
कन्नड़ : सोरेकाई (Sorekayi);
गुजराती: दुधियो (Dudio), दूधी (Dudhi), कड़वी तुम्बड़ी (Kadvitumbadi),तुंबड़ (Tumbada);
तमिल: शोरक्काई (Sorakkai);
तेलगु: गूब्बाकाया (Gubbakaya), आनपकाया (Anapakaya);
बंगाली: तिक्तालौ (Tiktalau), कोडूलौ (Kodulau),लाउ (Lau);
पंजाबी: घीया (Ghiya), तुम्बा (Tumba),केड्डी (Keddi);
मराठी: भोपला (Bhopla),दुध्या (Dudhya);
मलयालम: बेल्लाशोरा (Bellaschora),गाराडूडी (Garadudi)।

कड़वी लौकी का उपयोगी भाग
फल, पत्ता, बीज, जड़ का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है।[दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
कड़वी लौकी के फायदे :
दांत के कीड़ा के लिए कड़वी लौकी :
बड़े हो या छोटे , दांत में कीड़े की समस्या सभी को हो जाती है और अगर दांत में कीड़े लग गए हैं तो इसको हम कड़वी लौकी के प्रयोग से ठीक कर सकते हैं। इसके लिए इसके प्रयोग को थोड़ा सावधानी के साथ करें तो जरूर हमें लाभ मिलता है।
- पहला प्रयोग यह है कि कड़वी लौकी के जड़ को सुखा लें और फिर उसकी जड़ का पाउडर बना ले। उस पाउडर को कीड़े लगे हुए दांत में प्रयोग करें तो कीड़े के दर्द से लाभ पहुंचता है।
- दूसरा प्रयोग यह है कि कड़वी लौकी के फूल को सुखाकर उसका पाउडर बना लें और उसको दांत पर हल्का हल्का रगड़ें। इससे दांत का दर्द कम हो जाता है।
सिरदर्द में :
अगर सिर में दर्द हो रहा हो तो कड़वी लौकी के बीज के तेल को माथे पर लगाते हैं। इससे सिर का दर्द कम हो जाता है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
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खांसी से राहत के लिए :
बदलते मौसम के साथ बड़े और बूढ़े सभी को सर्दी खांसी और जुकाम की शिकायत हो जाती है। जिसकी वजह से हमारी नाक जाम हो जाती है और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
इस स्थिति से निपटने के लिए कड़वी लौकी के फल के अंदरूनी हिस्से को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं और उसे चूर्ण को नाक के सहारे थोड़ी मात्रा में सूँघे।
इससे हमारी नाक के अंदर जमा हुआ कफ बाहर आ जाता है और सांस लेने में कोई समस्या नहीं रहती है।

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कान की बीमारी में कड़वी लौकी :
कई बार कुछ विशेष परिस्थितियों के कारण किसी बीमारी के साइड इफेक्ट की वजह से कान में दर्द की समस्या उत्पन्न हो जाती है तो इसमें भी कड़वी लौकी का अगर सावधानी पूर्वक सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो हमें आराम मिल सकता है।
- इसके लिए कड़वी लौकी के कच्चे फल से पहले तो रस निकालते हैं। फिर उस रस की 1 से 2 बूंद की मात्रा कान के अंदर डालते हैं तो इसे कान के दर्द में फायदा मिल जाता है।
- इसका दूसरा प्रयोग यह है की कड़वी लौकी के रस को पहले निकले। फिर उसको किसी तेल के साथ पकाए। किसी तेल का मतलब यहां पर सरसों के तेल या किसी नेचुरल तेल से है जो की प्रयोग में लाया जा सके। फिर उस तेल को ठंडा करके उसकी 1 से 2 बूंद की मात्रा कान के अंदर डालते हैं तब भी साइड इफेक्ट के कारण होने वाले कान के दर्द से राहत मिल जाती है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
घेंघा में फायदा देती है कड़वी लौकी :
घेंघा रोग में कड़वी लौकी के प्रयोग की विधि इस प्रकार से है
- चिकित्सक की सलाह लेकर कड़वी लौकी के कच्चे फल के रस को सरसों के तेल में पकाकर उसे ठंडा करके रख लें। फिर उसके बाद उसकी 1 से 2 बूंद की मात्रा नाक के द्वारा ड्रॉप की सहायता से लेते हैं तो घेंघा रोग में फायदा होता है।
- कड़वी लौकी के पके हुए फल को गर्म पानी में पकाकर प्रतिदिन एक सप्ताह तक खाने से भी घेंघा रोग में फायदा हो सकता है।
हाथीपाँव (Filaria) से राहत के लिए कड़वी लौकी :
अगर किसी को फाइलेरिया(हांथीपाँव ) की शिकायत हो गई है तो उसमें कड़वी लौकी के बीजों का सेवन बहुत कारगर साबित हो सकता है।
इसके लिए सबसे पहले कड़वी लौकी के बीजों को लेकर उसका पाउडर बना लें फिर उसकी 1 से 2 ग्राम की मात्रा लेकर बकरी के दूध के साथ पिए। इससे फाइलेरिया की शिकायत प्रभावी तरीके से कम हो जाती है।[दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]

बवासीर से राहत कड़वी लौकी :
हम सभी को पता है कि आजकल के समय में हमारे गलत खान-पान की वजह से और गलत जीवन शैली की वजह से बवासीर की समस्या एक आम बात हो गई है।
लेकिन अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं तो कड़वी लौकी का प्रयोग चिकित्सक के परामर्श के अनुसार करें तो बवासीर से निश्चित ही राहत मिल सकती है। अगर इसकी सही मात्रा का इस्तेमाल किया जाता है तो बवासीर से बहुत जल्दी आराम मिल जाता है।
- इसके लिए कड़वी लौकी के पत्ते ,करंज के बीज और थूहर (सेहुण्ड ) के दूध को बकरे के पेशाब के साथ पीसकर यदि पाइल्स के मस्सों पर लगाया जाए तो इससे पाइल्स में फायदा पहुंचता है।
पीलिया रोग में लाभकारी है कड़वी लौकी :
कड़वी लौकी का सही विधि से उपयोग करने पर पीलिया रोग से मुक्ति मिल जाती हैइसके लिए
- सबसे पहले कड़वी लौकी के पत्ते का रस निकल फिर उसकी 10 मिली से लेकर 20 मिली तक की मात्रा लेने और उसमें गुड़ अथवा चीनी मिला दे और उसका सेवन करें। इससे पीलिया के रोग में रहता पहुंचती है।
- इसके अलावा कड़वी लौकी के कच्चे फल के रस को एक से दो बूंद नाक में डालने से भी पीलिया में लाभ हो जाता है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
किडनी स्टोन को निकालने में करे मदद कड़वी लौकी :
अगर किसी कोकिडनी के पथरी की शिकायत है तो उसे कड़वी लौकी का इस प्रकार से इस्तेमाल करना चाहिए
- 60 मिली जौ क्षार , 5 से 10 ग्राम मिश्री और उसके साथ 20 मिली से 50 मिली तक कड़वी लौकी के कच्चे फल के रस को आपस में मिलाकर पीने से किडनी की पथरी बाहर आ जाती है।
- 1 से 2 ग्राम कड़वी लौकी के बीज का पाउडर लें और उसको शहद अथवा बकरी के दूध के साथ एक हफ्ते तक पियें। तो किडनी की पथरी टूट कर पेशाब के साथ बाहर निकल जाती है।
शुगर( मधुमेह ) को कड़वी लौकी से नियंत्रित करें :
शुगर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन का स्वाभाविक रूप से बनना जरूरी होता है। अगर यह प्राकृतिक रूप से बनने लगे तो शुगर नियंत्रित होने लगती है।
इस तरह का रिजल्ट पाने के लिए कड़वी लौकी का सही मात्रा में सही तरीके से यदि सेवन किया जाए तो इंसुलिन बनना शुरू हो जाता है।
इसके लिए 10 मिली से 20 मिली तक कड़वी लौकी के फल के रस को एक बड़े चम्मच आंवला के रस में मिलाकर रोज कुछ महीनो तक पीना होता है।
ऐसा करने से इंसुलिन स्वाभाविक रूप से बनाना शुरू हो जाता है जिससे शुगर कंट्रोल होने लगता है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
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ल्यूकोरिया(श्वेतप्रदर ) के उपचार में फायदेमंद कड़वी लौकी :
अक्सर महिलाएं श्वेत प्रदर अर्थात ल्यूकोरिया से ग्रसित रहती हैं। इससे छुटकारा पाने के लिए कड़वी लौकी के फल के चूर्ण की 2-4 ग्राम मात्रा अथवा उसके पत्ते के चूर्ण की 1 -2 ग्राम मात्रा को मिश्री या शहद के साथ मिलाकर खाया जाए तो श्वेतप्रदर में लाभ होने लगता है।
एड़ियों का फटना करे कम कड़वी लौकी :
अगर किसी भी मौसम में पैर की एड़ियों के फटने से परेशान है। तब मदन फल को गाय के पेशाब के साथ पीस लें।
फिर उसे भेंड़ के दूध में पका कर और उसको कड़वी लौकी के अंदर रख दें। फिर उस मिश्रण को पैरों की फटी वीडियो पर लगाएं। इससे फटी एड़ियों में लाभ होने लगता है।
सूजन कम करें कड़वी लौकी से :
अगर किसी बीमारी के कारण अथवा किसी चोट के कारण किसी अंग में सूजन हो जाए तो उसे कड़वी लौकी के प्रयोग से ठीक किया जा सकता है।
इसके लिए कड़वी लौकी और जटामांसी को पानी में पकाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें और उसको सूजन वाले स्थान पर प्रयोग करें। इससे सूजन जल्दी उतर जाती है और दर्द में भी राहत मिलने लगती है। [दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान ]
कड़वी लौकी का उपयोग कैसे करनी चाहिए?
किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए कड़वी लौकी का उपयोगआयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करें ।
10-20 मिली कड़वी लौकी क रस का उपयोग कर सकते हैं।
कड़वी लौकी के नुकसान
कड़वी लौकी के बिना शोधित किए हुए फल, पत्ते या फूल जहर की तरह काम करते हैं। इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसको प्रयोग करने से बेचैनी, हार्ट अटैक या लकवा या सांस रुक रुक जाना , इस तरीके के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। इसीलिए बिना चिकित्सक के सलाह के इसका प्रयोग करना वर्जित है।
दाँत के कीड़े की घरेलू दवा कड़वी लौकी के उपयोग ,फायदे और नुकसान – FAQ –
दांत में कीड़ा लगने की दवा आयुर्वेदिक
दांत में कीड़ा लगने पर चिकित्सक की देखरेख में कड़वी लौकी का विधि पूर्वक प्रयोग करने से आराम मिल जाता है
क्या लौकी से एलर्जी हो सकती है?
कुछ चिकित्सीय प्रयोग में यह परिणाम सामने आया है कि यदि कड़वी लौकी का प्रयोग बिना चिकित्सक की देखरेख में और उसके दिशा निर्देशों के अनुसार नहीं किया जाता है तो इससे बहुत ही भयंकर एलर्जी हो सकती है
कड़वी लौकी के क्या नुकसान हैं?
कड़वी लौकी के बिना शोधित किए हुए फल, पत्ते या फूल जहर की तरह काम करते हैं। इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसको प्रयोग करने से बेचैनी, हार्ट अटैक या लकवा या सांस रुक रुक जाना , इस तरीके के लक्षण प्रकट हो सकते हैं। इसीलिए बिना चिकित्सक के सलाह के इसका प्रयोग करना वर्जित
लौकी जहरीली होती है?
हाल के वैज्ञानिक प्रयोगों से यह पता चला है कि कड़वे स्वाद वाली लड़की जोहरीली होती है अगर इसका प्रयोग बिना चिकित्सक की देखरेख की किया जाता है तो इस मिट्टी तक होने की संभावना रहती है
जहरीली लौकी की पहचान कैसे करें?
जहरीली लौकी को पहचान करने का एक तरीका यह हो सकता है कि किसी भी लौकी को पकाने से पहले उसका एक बहुत ही छोटा सा टुकड़ा लेकर उसे हल्के दांतों से चबाकर या खा कर देखें अगर वह कड़वी है तो उसके रस को अंदर ना ले। बल्कि उसको तुरंत थूक दें और उसका सेवन न करें।
लौकी कड़वा क्यों होता है?
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार लौकी में कुकुरबिटा सिंह नाम का एक तरह का रसायन होता है। यह रसायन लौकी को जहरीला बनाने के साथ-साथ इसके स्वाद को कड़वा भी बना देता है। इसीलिए जो लौकी कड़वे स्वाद वाली हो उसका सेवन भूल करके भी ना करें।
चेतावनी
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य यह बताना है कि पृथ्वी पर पायी जाने वाली कोई भी जड़ी बूटी का अकारण नहीं होती है। अगर उसका सही से चिकित्सक की देखरेख में प्रयोग किया जाए तो वह भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है। इसीलिए इस लेख में दी गई जानकारी को प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।