परिचय:
अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान : दोस्तों आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी जिस तरीके से हो गई है उसमें हमारे लिए अपने स्वास्थ्य के ऊपर विशेष रूप से ध्यान देना काफी मुश्किल हो गया है।
जिसकी वजह से हमें कई तरीके के रोग घेर लेते हैं। इसमें से एक प्रकार का रोग है अधकपारी या जिसे आम भाषा में हम बोलते हैं माइग्रेन।
अगर आप भी माइग्रेन से पीड़ित हैं तो इसमें अब आपको घबराने की जरूरत नहीं है।
क्योंकि अभी हम जिस औषधि के बारे में आपको बताने जा रहे हैं यह अधकपारी या माइग्रेन के लिए एक विशेष प्रकार की सर्वश्रेष्ठ दवा है। इसका नाम मदन फल है
जिसे आम भाषा में मैनफ़ल भी कहते हैं वैसे तो इसे अनेक भाषाओं में अलग-अलग नाम से जाना जाता है लेकिन यहां पर हम जिस नाम का उल्लेख कर रहे हैं उसका नाम है मदन फल।
इस दवा को आपकी भाषा में क्या बोला जाता है उसे आप नीचे दिए गए विवरण से जान सकते हैं कि हम किस दवा के बारे में बात कर रहे हैं। [अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]
वैसे तो इसे आप प्राकृतिक अवस्था में लेना चाहते हैं तो आपको किसी भी पंसारी की दुकान पर मिल सकती है। लेकिन फिर इसे आपको प्रयोग करने के लिए कूट पीसकर तैयार करना पड़ेगा।
और अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो फिर आप वैद्यनाथ या पतंजलि या डाबर या इसी तरीके की और दूसरी कंपनी की दवा के स्टोर से भी ले सकते हैं।
लेकिन दोस्तों मैं यहां पर आपको थोड़ा सा आगाह करना चाहता हूं कि इस दवा के प्रयोग में थोड़े सावधानी की जरूरत होती है। क्योंकि इसकी प्रकृति जो होती है वह उल्टी कराने वाली होती है।
अगर इसकी सही मात्रा न ली जाए तो इसकी वजह से आपको उल्टी हो सकती है और वह भी बहुत ज्यादा तरीके से हो सकती है।
इन्हीं सब परेशानियों को ध्यान में रखते हुए हमने इसके प्रयोग की कुछ विधि बताने की कोशिश की है जिसे आप सावधानीपूर्वक पढ़ें और उसके बाद इसको प्रयोग करने के विषय में विचार करें।
लेकिन यहां पर मैं इस बात का विशेष रूप से उल्लेख करना चाहता हूं कि इन सब परेशानियों के बाद भी यह बहुत ही उच्च कोटि की औषधि है जिसे अगर आप सही तरीके से प्रयोग में लाते हैं तो यह निश्चित ही आपको फायदा देगी। [अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]

वानस्पतिक नाम : Catunaregam spinosa (कटुनेरेगम स्पाइनोसा)
कुल :
Rubiaceae (रूबिएसी)
अंग्रेज़ी नाम :
Emetic Nut (इमेटिक नट)
संस्कृत :
मदन, छर्दन, पिण्ड, नट, करहाट, मरुवक, शल्यक, विषपुष्पक, श्वसन, पिचुक, कण्टकी, करहाटक, शल्य, कण्ठ, बस्तिशोधन, मादन;
हिन्दी :
मैनफल, मदनफल, करहर (Karhar);
उड़िया :
पोटुआ (Potua);
उर्दू :
मैनफल (Mainphal);
असमिया :
गुरोल (Gurol);
कोंकणी :
गद्दी (Gaddi);
कन्नड़ :
मंगरिकै (Mangrikkei);
गुजराती :
मींढोल (Mindhol), मींढल (Mindhal);
तैलुगु :
बसन्त कड़िमि चेट्टु (Basant kadimi chettu), मण्डचेट्टु (Mandchettu), मंगचेटटु (Mangchettu);
तमिल :
मरूक्कलम (Marukkalam), पुंगारै (Pungarei);
बंगाली :
मेनफल (Mein Phal), मयना कांटार गाछ (Mayana kantar gach);
पंजाबी :
अरारा (Arara);
मराठी :
गेल (Geil), गेलफल (Geilphala);
मलयालम :
कारा (Kara)।
अंग्रेजी :
बुशी गार्डेशीया (Bushy Gardenia), कॉमन एमेटिक नट (Common emetic nut);
लैटिन :
रंडिया डुमेटोरियम (randia dumetorium )
आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव :
मदन फल की प्रकृति गर्म होती है। यह हल्का मीठा और तीखा होता है।
यह उल्टी कराने वाला , फोड़े फुंसियों से पीप को खत्म करने वाला ,रुखा ,
जख्म को भरने वाला ,कोढ़ , कफ ,अफारा और सूजन को ठीक करने वाला होता है।
हमारे आयुर्वेद में उल्टी कराने वाली जितनी भी जड़ी बूटियां हैं उनमें मदन फल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
इसकी थोड़ी ज्यादा मात्रा लेने पर बिना किसी परेशानी के या बिना किसी विशेष प्रयोजन के उल्टी शुरू हो जाती है।
लेकिन यहां पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इसको ऐसा करने के लिए चिकित्सक की सलाह लेना या उसकी देखरेख में करना जरूरी होता है।[अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]
इसका प्रयोग पेट के कीड़ों को मारने के लिए भी किया जाता है।
जब हमारे शरीर में कफ ज्यादा जमा हो जाता है जो किसी कारणवश बाहर नहीं निकल पाता है तो इसका सेवन करके उल्टी के द्वारा हमारे शरीर से कफ को बाहर निकाला जाता है।
इसका प्रयोग एक निश्चित मात्रा के द्वारा भूख को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है। [अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]

मदन फल के प्रयोग की मात्रा और विधि :
1 . अधकपारी अथवा माइग्रेन :
मदन फल और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर इनको पीसकर थोड़े से गाय के दूध में मिलाकर सूर्योदय से पहले नाक में 1 से 2 बूँद डालने से अधकपारी के दर्द में आराम मिलने लगता है.
और पढ़ें : अर्द्धसीसी दर्द
2 . पेट दर्द में :
मदनफल तथा कुटकी दोनों की बराबर – बराबर मात्रा लेकर और उसे पीसकर नाभि पर लगाने से पेट दर्द में आराम मिलता है।
3 . कफ और पित्त की समस्या में :
2 या 3 मदनफल लेकर उसके ऊपर का छिलका हटा दें। फिर उसको दरदरा कूटकर रात भर 60 मिली पानी में भिगों कर छोड़ दें।
अब सुबह में अच्छी तरह मसलकर छान लें। अब इसको पीने से उल्टी के साथ कफ और पित्त बाहर आ जाता है। जिससे इस समस्या में फायदा मिलता है।
4. सर के रोगों में :
1 मदनफल , 250 मिग्रा अफीम और 4 पिप्पली को किसी तांबे के बर्तन में भून लीजिये। अब उसको खूब बारीक कूट पीसकर पाउडर बना लीजिये।
अब इसकी 1 या 2 बूँद नाक में डालने से हर तरह के सर दर्द में फायदा होता है।
5. दमा के लिए :
मदनफल,अर्कमूल की छाल और मुलेठी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर इसका पाउडर बना लें।
फिर इसकी 2 से 5 ग्राम की मात्रा लेकर प्रयोग करें। यह दमा और जुकाम लिए बहुत अच्छी दवा का काम करती है।
और पढ़ें : खाँसी और कफ़ की घरेलू दवा मुलेठी (यष्टिमधु ) के उपयोग ,फायदे और नुकसान

6. बुखार के लिए :
यहां पर बुखार के लिए जो प्रयोग विधि बताई जा रही है उसके लिए यह ध्यान रखना है कि यह विधि चिकित्सक की देखरेख में ही करना है।
आयुर्वेद के अंदर एक पंचकर्म विधि होती है। इसमें उलटी कराकर रोग को कम करने का प्रयास किया जाता है।
क्योंकि बुखार में हमारे शरीर में कई प्रकार की समस्याएं हो जाती है तो उन समस्याों से निजात दिलाने के लिए पंचकर्म की वमन विधि की सहायता ली जाती है।
इसमें मदनफल चूर्ण को पिप्पली चूर्ण या इन्द्रजौ अथवा मुलेठी के चूर्ण के साथ खिलाया जाता है। फिर साथ में गुनगुना पानी या शहद का शर्बत या गन्ने का रस पेट भर पिलाया जाता है ।
जिससे उल्टी हो जाती है। और फिर बुखार में फायदा होता है। [अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]
7. प्रसव पीड़ा में :
मदनफल के सूखे हुए फलों को जलाकर योनि पर इसका धुंआ करने से प्रसव शीघ्र हो जाता है।
8. खुजली में :
सिन्दूर,मदनफल, सौवीरांजन तथा गुग्गुलु के चूर्ण को सरसों के तैल में पकाकर लगाने से खुजली में फायदा होता है।
9. नाभि हट जाने पर :
2 से 4 ग्राम मदनफल के बीज के पाउडर को छाछ के साथ गर्म करके नाभि के चारों ओर लगाने से पेट दर्द में फायदा होता है।
10. फोड़ा हो जाने पर :
मदन फल और रेवन्द चीनी के चूर्ण को आपस में मिलाकर इसका लेप फोड़े पर लगाने से वह जल्दी पक कर फूट जाता है और सूख जाता है।
11. चूहे के काट लेने पर :
मदन फल के चूर्ण और रसोई घर की राख को थोड़ी मात्रा में मिलाकर जिस स्थान पर चूहे ने काटा है वहां पर इसका लेप लगाने से चूहे के विष का प्रभाव कम हो जाता है।
12. गठिया या जोड़ों के दर्द में :
मदन फल के चूर्ण को गोमूत्र में मिलाकर जोड़ों पर लगाने से गठिया के सूजन और उसके दर्द में फायदा मिलता है।
13. कील मुंहासे के लिए :
मदन फल के चूर्ण को गुलाब जल में मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे से कील और मुंहासे खत्म हो जाते हैं।
14. बाँझपन में :
जिन माता और बहनों में बांझपन की शिकायत होती है वह वैद्य परामर्श के अनुसार बताई गयी विधि का प्रयोग करके इसका लाभ ले सकती हैं।
मदनफल के 1 ग्राम सुखाए हुए बीज चूर्ण को दूध, गुड़ और केसर के साथ सेवन करें।
इसके अलावा मदनफल के 1 ग्राम बीजों के चूर्ण की बत्ती बनाकर योनि में रखे। इससे योनिमार्ग और गर्भाशय के सब विकार दूर हो जाते हैं।
मासिक-धर्म की रुकावट, उसका दर्द , अनियमितता आदि परेशानियाँ दूर हो जाती हैं।
इस विधि से गर्भाशय की शुद्धि हो जाती है और गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है।[अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]
15. पुरुषों के अंडकोष के सूजन और दर्द में :
मदन फल को पानी के साथ पीसकर उसका लेप बनाकर यदि पुरुष अपने अंडकोष पर लगता है तो उसे अंडकोष के सूजन और दर्द में फायदा मिलता है।
16. अनाज में कीड़ों से बचाव के लिए :
यदि मदन फल के अधपके फल को गेहूं और चावल में रखा जाता है तो उसके अंदर कीड़े नहीं लगते हैं।
मदन फल के प्रयोग होने वाले भाग :
बीज, फल, छाल और जड़।
सामान्य अवस्था में सेवन की मात्रा :
- उल्टी में : 3 से 6 ग्राम
- सामान्य : 1 से 2 ग्राम
दुष्प्रभाव होने की अवस्था में क्या लें :
कतीरा अथवा ठंडे पेय पदार्थ
अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान FAQ –
मैनफल क्या होता है?
मैनफल मधुर, तिक्त, उष्णवीर्य, लघु, वमनकारक, विद्रधिनाशक, रूक्ष, प्रतिश्याय नाशक, व्रण, कोढ़, कफ, अफारा, सूजन और गुल्म तथा व्रण को नष्ट करता है।
देशी चिकित्सा विज्ञान में जितनी वामक औषधियाँ हैं, उनमें मैनफल सर्वश्रेष्ठ है। बिना किसी परेशानी के इसके फलों के सेवन से वमन हो जाता है।
माइग्रेन को हमेशा के लिए कैसे दूर करें?
माइग्रेन के लक्षणों को दूर करने के लिए दवा नहीं प्रयोग करें ये 3 देसी उपाय, मिनटों में होगी दर्द की छुट्टी
- माइग्रेन में रात भर भिगोये गए किशमिश खायें .
- माइग्रेन में जीरा-इलायची की चाय पियें
- माइग्रेन का गाय का घी खाएं.
- माइग्रेन के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं
अधकपारी को कैसे ठीक करें?
अधकपारी को ठीक करने के लिए आयुर्वेदिक प्रक्रिया के तहत पूरे शरीर को भाप स्नान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त शिरोधारा प्रक्रिया का प्रयोग किया जाता है।
इस प्रक्रिया में सिर में लगाने वाले गुनगुने तेल को सिर पर 15 से 20 मिनट तक के लिए डाला जाता है यह प्रक्रिया 20 से 25 दिन तक चलती है।
माइग्रेन किसकी कमी से होता है?
वह विटामिन डी ही है जिसकी कमी से माइग्रेन या आधे सिर के दर्द की समस्या होती है या यूं कहें कि हमें न्यूरॉन्स की प्रॉब्लम होने लगती है।
माइग्रेन के लिए कौन सी एक्सरसाइज करनी चाहिए?
यदि आप माइग्रेन को कम अरने लिए योग करना चाहती हैं, तो ये आसन मदद कर सकते हैं:
- शवासन शवासन पूर्ण विश्राम की अवस्था है।
- उष्ट्रासन उष्ट्रासन ऑक्सीजन युक्त रक्त को आपके सिर तक पहुंचने देता है और शरीर से तनाव मुक्त करता है।
- ब्रिज पोज
- चाइल्ड पोज
- पवनमुक्तासन
माइग्रेन में कौन सा खाना खाना चाहिए?
माइग्रेन की समस्या में हमें सूखे मेवे जैसे कि काजू बादाम अखरोट और कद्दू के बीज का सेवन करना चाहिए .
हरी सब्जियों में हमें पालक का सेवन करना चाहिए क्योंकि हरी पत्तेदार सब्जियां माइग्रेन की समस्या में बहुत अधिक फायदा पहुंचती है .
माइग्रेन वालों को क्या नहीं खाना चाहिए?
माइग्रेन या आधे सिर के दर्द में कैफीन और निकोटिन से बचना चाहिए। यह दोनों चाय और काफी में पाए जाते हैं।
इसलिए चाय और कॉफी का सेवन माइग्रेन के दर्द में नहीं करना चाहिए।
आधा सिर दर्द की आयुर्वेदिक दवा ?
आधे सिर के दर्द से हैं परेशान तो इन घरेलू नुस्खों को अपनाएं। तेजी से मिलेगी आराम
- गुड़ और दूध का सेवन माइग्रेन के लिए सटीक उपाय है।
- अदरक का सेवन फायदेमंद है।
- दालचीनी फायदेमंद है।
- लौंग का सेवन फायदेमंद है।
- ठंडी सिंकाई फायदेमंद है।
- हीटिंग पैड फायदेमंद है।
- सिर की मालिश फायदेमंद है।
- तेज रोशनी से बचें
चेतावनी :
यहां पर दी गई समस्त जानकारी शिक्षा, देशी जड़ी बूटी के प्रति जागरूकता और ज्ञानवर्धन के लिए है। इसका प्रयोग करने से पहले चिकित्सक की सहायता अवश्य लें।[अधकपारी की घरेलू दवा मदनफल के उपयोग ,फायदे और नुकसान]